गेहूं बीज को खराब बताकर हाजीपुर से कुदरा को लौटाया 18 ट्रक बीज, बीज निगम में उभरे अंदरूनी मतभेद

रबी सीजन में बोआई के लिए तैयार किए गए गेहूं के बीजों की गुणवत्ता को लेकर बिहार राज्य बीज निगम के दो क्षेत्रीय कार्यालयों में मतभेद हो गया है। निगम के कुदरा क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा तैयार कर भेजे गए 18 ट्रक गेहूं के बीजों को खराब बताकर लौटा दिया गया

Sumita JaiswalMon, 11 Oct 2021 05:42 PM (IST)
हाजीपुर कार्यालय के द्वारा लौटाए गए 18 ट्रक बीज के अबीज घोषित होने की आशंका, सांकेतिक तस्‍वीर।

कुदरा (कैमूर), संवाद सूत्र। चालू वित्तीय वर्ष के रबी सीजन में बोआई के लिए तैयार किए गए गेहूं के उन्नत किस्म के बीजों की गुणवत्ता को लेकर बिहार राज्य बीज निगम के दो क्षेत्रीय कार्यालयों में मतभेद की स्थिति हो गई है। निगम के कुदरा क्षेत्रीय कार्यालय के द्वारा तैयार कर भेजे गए 18 ट्रक गेहूं के बीजों को जहां खराब बताकर हाजीपुर क्षेत्रीय कार्यालय के द्वारा वापस लौटा दिया गया है, वहीं कुदरा क्षेत्रीय कार्यालय के अधिकारियों व कर्मियों का कहना है कि उनके द्वारा उच्च गुणवत्ता वाले बीज भेजे गए थे जिन्हें तैयार करने में मानकों का पूरा ध्यान रखा गया था।

कुदरा क्षेत्रीय कार्यालय के प्लांट अभियंता उमेश कुमार गुप्ता ने सोमवार को बताया कि हाजीपुर क्षेत्रीय कार्यालय अंतर्गत मुजफ्फरपुर से वापस किए गए गेहूं के बीजों के 18 ट्रक में से 8 ट्रक के बीज कुदरा प्लांट में अनलोड किए जा चुके हैं और उसकी वीडियोग्राफी भी की गई है। उनमें से एक बोरी भी खराब बीज नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि सारी जानकारी निगम के मुख्यालय में भेजी जा रही है। उन्होंने आशंका जताई कि हो सकता है कि ट्रांसपोर्टर की गलती से गेहूं के बीज की कुछ बोरियां बारिश में भीग गई हों और उस गलती को छिपाने के लिए ट्रक के सारे बीज को ही खराब घोषित करवा दिया गया हो। बहरहाल बीज निगम के अंदरूनी मतभेद से जहां उसके बीजों की प्रतिष्ठा दांव पर है, वहीं बड़ी मात्रा में गेहूं के बीज के अबीज घोषित कर दिए जाने की आशंका प्रबल हो गई है। बीज के अबीज घोषित हो जाने पर उसे नीलामी के जरिए खुले बाजार में बेचना पड़ता है, जिसकी अक्सर कम कीमत मिलती है।

व्यक्तिगत लाभ के लिए अतीत में होता रहा है बीज को अबीज करवाने का खेल

बताते चलें कि बिहार राज्य बीज निगम द्वारा उत्पादित बीज के किन्हीं कारणों से अबीज घोषित हो जाने के चलते अतीत में जहां  संस्था को काफी आर्थिक क्षति हुई है, वहीं उसकी नीलामी में उसे कम कीमत पर खरीद कर कुछ निहित स्वार्थ वाले लोग मालामाल होते रहे हैं। चर्चा तो यहां तक रही है कि जानबूझकर साठगांठ में बीज निगम के बीज को अबीज घोषित कराने का खेल होता था ताकि संस्था को नुकसान पहुंचा कर व्यक्तिगत लाभ कमाया जा सके। इसी तरह की गड़बडिय़ों के चलते प्रदेश की यह अग्रणी बीज उत्पादक संस्था अपनी स्थापना के कुछ ही वर्षों बाद मृतप्राय हो चुकी थी। बाद में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार के शासनकाल में इस संस्था को पुनर्जीवित कर इसकी साख को बहाल किया गया। वर्तमान समय में प्रदेश सरकार की उन्नत बीज विस्तार योजनाओं में इस संस्था की अग्रणी भूमिका रहती है।

 

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