प्रधानमंत्री आवास योजना में व्यापक अनियमितता, कागज पर तैयार हो रहे गरीबों के घर

पूर्व संप्रग सरकार की इंदिरा आवास योजना रही हो या वर्तमान में प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण इसमें व्यापक स्तर पर अनियमितता बरती जा रही है। अब इसे गरीब की किस्मत कहें या सरकारी योजनाओं का मूर्त रूप न लेना परंतु असल गरीब आज भी उपेक्षित हैं।

JagranSat, 24 Jul 2021 02:16 AM (IST)
प्रधानमंत्री आवास योजना में व्यापक अनियमितता, कागज पर तैयार हो रहे गरीबों के घर

मोतिहारी । पूर्व संप्रग सरकार की इंदिरा आवास योजना रही हो या वर्तमान में प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण, इसमें व्यापक स्तर पर अनियमितता बरती जा रही है। अब इसे गरीब की किस्मत कहें या सरकारी योजनाओं का मूर्त रूप न लेना, परंतु असल गरीब आज भी उपेक्षित हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना भी अपात्रों के चंगुल में जकड़ी हुई है। इसका खुलासा सुगौली बीडीओ सरोज कुमार बैठा द्वारा आवास योजना के पात्रों की जांच में भी हो रही है। प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत जनगणना में दर्ज स्थाई पात्रता सूची के परिवारों को आवास दिया गया था। इसके तहत 25 वर्ग मीटर में पक्के आवास व रसोईघर के लिए 1.20 लाख, शौचालय के लिए 12 हजार तथा मजदूरी के लिए सरकार द्वारा मनरेगा के तहत 15 हजार दिया गया। पुन: वर्ष 2018 में आवास योजना से वंचित रहे परिवारों से आवेदन लिया गया। जिसमे ग्यारह हजार से अधिक लोगो ने आवेदन किया। जिसकी जांच बीडीओ द्वारा टीम गठित कर सभी पंचायतों में कराई जा रही है। जिसमें व्यापक गड़बड़ी भी सामने आ रही है। जानकारी के अनुसार पात्र लाभार्थी के पास न तो पक्के मकान होने चाहिए और न ही बाइक। सरकारी नौकरी, ट्यूबवेल आदि कई बिदुओं पर जांच कर इन्हें बाहर करना है। परंतु पूर्व के सरकारी तंत्र के आगे सरकार के फरमान दब गए। पूर्व में ग्राम पंचायत से लेकर प्रखंड कार्यालयों पर मोटी रकम में अपात्रों को आवास का लाभ प्रतिवर्ष दिया गया। आज भी गांवों में हाल यह है कि हर एक गांव में बड़ी संख्या में गरीब परिवार छप्पर व कच्चे मकान में निवास कर रहे हैं। उधर शासन व प्रशासन आए दिन अपात्रों को योजनाओं का लाभ देने के दम पर अपने आंकड़े गिनाता रहता है। आलम यह है कि वित्तीय वर्ष 2016-17 से बीते वित्तीय वर्ष 2018-19 में लगभग आवासों को पूर्ण दिखा गया गया है। केंद्र सरकार द्वारा गरीबों को कम से कम एक पक्का मकान देने की योजना थी, परंतु सरकारी तंत्र की हालत यह कि एक तो पहले तो बड़े पैमाने पर अपात्रों को लाभ दिया गया। दूसरे जिन गरीबों को लाभ भी मिला उनसे प्रति आवास 20 से 30 हजार की वसूली करने का मामला भी प्रकाश में आया था। प्रखंड के कई ग्राम पंचायतों के गरीबों ने इसके खिलाफ प्रशासन के समक्ष आवाज भी उठाई परंतु प्रशासनिक तंत्र के आगे गरीबों की आवाज दब सी गई. वर्जन सभी की जांच कराई जा रही है। अनियमिता करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।

सरोज कुमार बैठा, बीडीओ, सुगौली

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