संचारी भावों में छिपा है भावाभिव्यक्ति का पूरा रहस्य

महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के मीडिया अध्ययन विभाग से संबद्ध आचार्य भरत मुनि संचार शोध केंद्र द्वारा भरत मुनि के संचार सूत्र की वर्तमान में उपादेयता विषय पर वेब संगोष्ठी का आयोजन को किया गया।

JagranSun, 26 Sep 2021 12:41 AM (IST)
संचारी भावों में छिपा है भावाभिव्यक्ति का पूरा रहस्य

मोतिहारी । महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के मीडिया अध्ययन विभाग से संबद्ध आचार्य भरत मुनि संचार शोध केंद्र द्वारा भरत मुनि के संचार सूत्र की वर्तमान में उपादेयता विषय पर वेब संगोष्ठी का आयोजन को किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महात्मा केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर संजीव कुमार शर्मा ने की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सह विशेष वक्ता बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग के प्रो श्रीकाश पांडेय ने भरतमुनि के संचार सूत्रों पर प्रकाश डालते हुए संचारी भावों को भावाभिव्यक्ति के संदर्भ में महत्वपूर्ण बताया। कहा स्थाई भाव से ही रसास्वादन होता है। अलौकिक आनंद का हेतु भी यही है। उन्होंने कहा कि संचरण का आशय गति से है और व्याकरण में संचरण करने के भाव को ही संचार कहते हैं। कालिदास, तुलसीदास एवं महर्षि पतंजलि जैसे आचार्यों के साथ उन्होंने नाट्यशास्त्र के व्याख्याकार आचार्य अभिनव गुप्त और अन्य विद्वानों की सम्मतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि अभिव्यक्ति के संदर्भ में भाषा, शब्द और प्रतीकों और भावभंगिमाओं की महत्ता सर्वविदित है। वर्णों तथा शब्दों के उच्चारण के सही तरीके को समझाते हुए उन्होंने पाठक के 6 गुणों की चर्चा की। कुलपति प्रो. संजीव कुमार शर्मा ने शोघ केंद्र से अन्य विभागों को जोड़ने की जरूरत पर बल देते हुए कहा कि मीडिया अध्ययन विभाग के शिक्षक, विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों की सक्रियता से विवि की अलग पहचान बनेगी। उन्होंने मीडिया के विद्यार्थियों के कौशल विकास को लेकर विश्वविद्यालय के विभिन्न प्रयासों पर भी प्रकाश डाला। प्रति कुलपति प्रोफेसर जी गोपाल रेड्डी ने वर्तमान समय में भरत मुनि के संचार सूत्रों को महत्वपूर्ण बताते हुए विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों का मार्गदर्शन किया। स्वागत उद्बोधन मीडिया अध्ययन विभाग के अध्यक्ष सह शोधकेंद्र के समन्वयक डॉ. अंजनी कुमार झा ने दिया, जबकि संचालन मीडिया अध्ययन विभाग के सहा. आचार्य एवं केंद्र के सह समन्वयक डॉ. साकेत रमण ने किया। धन्यवाद ज्ञापन सहायक आचार्य डॉ परमात्मा कुमार मिश्रा ने किया। कार्यक्रम में विभाग के सहायक आचार्य डॉ सुनील दीपक घोडके व डॉ उमा यादव भी उपस्थित रहीं। अतिथियों का परिचय विभाग की शोधार्थी गुंजन शर्मा और प्रमोद पांडेय तथा एमजेएमसी की प्रकृति ने कराया। इस अवसर पर विवि के संस्कृत विभागाध्यक्ष प्रो.प्रसून दत्त सिंह, हिदी विभागाध्यक्ष, प्रो.राजेंद्र सिंह बड़गूजर, चौधरी चरण सिंह, मेरठ विश्वविद्यालय के जनसंचार विभाग के अध्यक्ष प्रो. प्रशांत कुमार, संस्कृत विभाग के सह आचार्य डॉ. श्यामकुमार झा व अन्य प्राध्यापक तथा विवि के अधिकारी और शोधार्थी व अन्य छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

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