47 एकड़ में खुलेगा महात्मा गांधी चिकित्सा महाविद्यालय

47 एकड़ में खुलेगा महात्मा गांधी चिकित्सा महाविद्यालय

मोतिहारी। जिले में मेडिकल कॉलेज की स्थापना को लेकर महात्मा गांधी चिकित्सा महाविद्यालय खोलने

JagranSat, 17 Apr 2021 10:11 PM (IST)

मोतिहारी। जिले में मेडिकल कॉलेज की स्थापना को लेकर महात्मा गांधी चिकित्सा महाविद्यालय खोलने को लेकर कवायद तेज हो गई है। जिला मुख्यालय स्थित होमगार्ड मैदान के समीप 47 एकड़ सरकारी भूमि पर इस महाविद्यालय को स्थापित करने की तैयारी चल रही है। गन्ना उद्योग एवं विधि मंत्री प्रमोद कुमार ने इस संबंध में केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति को पत्र लिखा है। बताया है कि इस भूमि में केंद्रीय विश्वविद्यालय के मापदंड के अनुरूप चिकित्सा महाविद्यालय खोलने के लिए नगर निगम की बैठक व जिलाधिकारी द्वारा प्रस्तावित है। पूर्वी चंपारण में इस प्रकार के संस्थान की जरूरत है। सरकार की भी योजना है कि प्रत्येक जिला में एक-एक मेडिकल कॉलेज होना चाहिए। मंत्री ने कहा कि यह भूमि महात्मा गांधी चिकित्सा महाविद्यालय के लिए सबसे योग्य है। जिलाधिकारी के स्तर से प्रशासनिक कार्रवाई भी प्रारंभ कर दी गई है। मंत्री ने कहा कि केविवि जिला प्रशासन से सामंजस्य स्थापित कर उक्त भूमि पर चिकित्सा महाविद्यालय को स्थापित करने की दिशा में प्रयास करना चाहिए।

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आयुर्वेद कॉलेज की भूमि अधिगृहित कर कराएं चालू वर्षों से बंद पड़े रविद्रनाथ मुखर्जी आयुर्वेद कॉलेज को अधिगृहित कर इस महाविद्यालय को चालू कराने को लेकर गन्ना मंत्री प्रमोद कुमार ने केविवि के कुलपति को पत्र लिखा है। मंत्री ने कहा कि इस कॉलेज को चालू कराने को लेकर लगातार प्रयास किया गया, पर महाविद्यालय की स्थिति खराब होने के कारण बंद हो गई। इस महाविद्यालय की सरकारी भूमि को सरकार के अधीनस्थ करते हुए इसका पुन: उद्धार किया जा सकता है। यह महाविद्यालय महाराजा हरेंद्र किशोर सिंह बेतिया राज की लगभग 15 एकड़ भूमि में स्थित है। जिसमें तीन एकड़ में प्राचार्य का आवास है। ज्ञातब्य हो कि वर्तमान समय में शासी निकाय के अध्यक्ष के रूप में वर्तमान जिलाधिकारी को राज्य सरकार के आयुष्मान विभाग ने अधिकृत किया है। जिला प्रशासन के माध्यम से ही इसकी देखरेख होती है। मंत्री ने कहा कि जिला प्रशासन व केंद्रीय विश्वविद्यालय के अधिकारियों के साथ उन्होने बात की है। उनका कहना है कि राज्य सरकार सहमति प्रदान करे तो सरकारी भूमि व भवन को महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय को समर्पित कर आयुष मंत्रालय भारत सरकार से इसकी तकनीकी स्वीकृति प्राप्त कर केविवि के अधीनस्थ इस आयुर्वेद कॉलेज को फिर से जीवंत किया जा सके।

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