पर्यावरण संरक्षण के लिए पौधारोपण के साथ पुराने पेड़ों की रखवाली

पुराने वृक्षों के दिन अब बहुरने वाले है। इनके संरक्षण व संव‌र्द्धन के लिए एक योजना बनाई जा रही है। इस दिशा में निर्देश जारी किया गया है। सरकार का मानना है कि एक तरफ जल-जीवन हरियाली अभियान के तहत पौधारोपण किया जा रहा है।

JagranWed, 04 Aug 2021 11:34 PM (IST)
पर्यावरण संरक्षण के लिए पौधारोपण के साथ पुराने पेड़ों की रखवाली

रक्सौल । पुराने वृक्षों के दिन अब बहुरने वाले है। इनके संरक्षण व संव‌र्द्धन के लिए एक योजना बनाई जा रही है। इस दिशा में निर्देश जारी किया गया है। सरकार का मानना है कि एक तरफ जल-जीवन हरियाली अभियान के तहत पौधारोपण किया जा रहा है। वहीं इको सिस्टम की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले पुराने वृक्ष जैसे पीपल, बरगद, पाकड, आम, नीम, ईमली आदि बाढ, वज्रपात या मिट्टी कटाव सहित अन्य कारणों से नष्ट व गिर जा रहे है। मानव व पशु-पक्षियों से इन वृक्षों का गहरा संबंध रहा है। ऐसे वृक्षों के बचाने के लिए चंपारण के प्रहरी-पुराने वृक्ष नामक योजना की शुरूआत की जा रही है। पुराने वृक्ष का महत्व पुराने वृक्ष हमारे धार्मिक, पौराणिक परंपराओं के साथ भारतीय संस्कृति का अमूल्य धरोहर है। ऐसे वृक्ष नए वृक्षों से अधिक ऑक्सीजन उत्सर्जन, पर्यावरण शुद्धिकरण व जैव विविधता में संतुलन बनाते है। एक पुराना वृक्ष एक वर्ष में 15 हजार लीटर पानी अवरोधन का कार्य करता है। साथ ही नए वृक्ष की अपेक्षा कार्बनडाईऑक्साइड उत्सर्जन को रोकता है। इन कर्मियों को मिली है सर्वे की जिम्मेवारी बीडीओ व मनरेगा पीओ द्वारा अपने अधीनस्थ कर्मियों से प्रति पंचायत पांच पुराने वृक्ष का सर्वे कराया जा रहा है। इस दौरान वृक्ष की उम्र, वृक्ष के तने का व्यास व वृक्ष से जुड़ी कहानी इनकी प्राथमिकता का आधार होगा। मनरेगा पीओ प्रखंड स्तर पर इस अभियान के नोडल पदाधिकारी होंगे। बनेगा पांच सदस्यीय संरक्षण मंडल वृक्षों के सामुदायिक दायित्व को सुनिश्चित करने के लिए पांच सदस्यीय संरक्षण मंडल बनाया जाएगा। इनमें वर्तमान मुखिया पूर्व मुखिया, संबंधित वार्ड सदस्य, गांव के वयोवृद्ध व्यक्ति जैसे स्वतंत्रता सेनानी, सेवानिवृत्त शिक्षक, सेवानिवृत्त सैनिक, सरकारी कर्मी को शामिल किया जाएगा। कहते है पर्यावरणविद रक्सौल केसीटीसी कालेज के वनस्पति विझान के विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. अनिल कुमार सिन्हा ने कहा कि कार्बनडाई ऑक्साइड उत्सर्जन को रोकने, अधिक ऑक्सीजन उत्सर्जन करने, पर्यावरण शुद्धिकरण करने, जैव विविधता में संतुलन बनाने सहित अन्य कई कारणों से पुराने वृक्ष का महत्व नये वृक्ष से अधिक है। इसलिए इनको संरक्षित किये जाने की जरूरत है।

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