ट्रेनों में होती जांच मगर बसों व प्राइवेट गाड़ियों से आनेवालों को कोई पूछनेवाला नहीं

ट्रेनों में होती जांच मगर बसों व प्राइवेट गाड़ियों से आनेवालों को कोई पूछनेवाला नहीं

मोतिहारी। लॉकडाउन के भय से दूसरे प्रदेश में काम करने वाले प्रवासी श्रमिक घरों को पहुंच

JagranSat, 17 Apr 2021 10:07 PM (IST)

मोतिहारी। लॉकडाउन के भय से दूसरे प्रदेश में काम करने वाले प्रवासी श्रमिक घरों को पहुंचने लगे हैं। प्राइवेट बस और ट्रेन द्वारा सभी घर आने को आतुर दिख रहे हैं। रेलवे स्टेशन पर उतरने वाले यात्रियों की कोरोना जांच एंटीजन किट से जरूर हो रही है। लेकिन बसों से उतरने वाले यात्री सीधे अपने घरों को रवाना हो रहे हैं। उन्हें स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा होम आइसोलेट करने की भी व्यवस्था नहीं की जा रही है। इससे ग्रामीण क्षेत्र में कोरोना संक्रमण तेजी से फैल रहा है। स्वास्थ्य विभाग सिर्फ संक्रमितों को ही होम आइसोलेट कर रहा है। जबकि बाहरी राज्यों से आनेवाले लोगों के कारण जिले में खतरा बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। मुंबई और दिल्ली से आनेवाली ट्रेनों में कई यात्री कोरोना पॉजिटिव पाए जा रहे हैं। यही कारण है कि जिले के हालात दिन व दिन बदतर ही होते जा रहे हैं। रोजाना कोरोना के सक्रिय मामलों में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। नए वैरिएंट का है खतरा

महाराष्ट्र में कोरोना वायरस के प्रकोप का असर अब जिले में भी दिखना शुरू हो गया है। रोजाना सैकड़ो की संख्या में यात्री ट्रेनों में भरकर बिहार पहुंच रहे हैं। जिनमें कई लोग संक्रमित भी पाए जा रहे हैं। शुक्रवार को जिले के विभिन्न स्टेशनों पर हुई जांच में तकरीबन 11 यात्री संक्रमित मिले थे। वहीं गुरुवार को विभिन्न स्टेशनों पर हुई जांच में 24 यात्री संक्रमित मिले थे। ऐसे कई मामले भी सामने आ रहे हैं जब जांच के डर से ट्रेन के पहुंचते ही यात्री इधर-उधर से निकल लेते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की माने तो इससे आने वाले दिनों में संक्रमण का खतरा और भी बढ़ेगा। विशेषकर मुंबई से आने वाले प्रवासी कोरोना के नए वैरिएंट के वाहक हो सकते हैं। वही अन्य प्रदेशों से बस से आने वाले प्रवासियों के जांच में भी लापरवाही बरती जा रही है। अधिकतर मामलों में बसों से आने वाले लोग बिना जांच के आराम से अपने घरों को चले जा रहे हैं। पूछने पर सीएस अखिलेश्वर सिंह ने बताया कि समय समय पर स्वास्थ्य विभाग की टीम बस पड़ाव पर जाकर दूसरे प्रदेशों से आने वाले यात्रियों की जांच करती है। जबकि धरातल पर ऐसा कुछ देखने को नही मिल रहा है। गांवों तक फैला संक्रमण तो होगी मुश्किल

जिले में कोरोना संक्रमण का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। ऐसे में अगर संक्रमण ने ग्रामीण इलाकों तक अपनी पहुंच बना ली तो यहां के स्वास्थ्य व्यवस्था पर भारी दबाव बन जायेगा। खुद सीएस अखिलेश्वर प्रसाद सिंह भी इस बात की तस्दीक करते हुए कहते हैं कि गांव हो या शहर सभी जगह लोगो को सावधानी बरतने की जरूरत है। इस बार पिछली बार के मुकाबले संक्रमण का दर दुगुने से भी ज्यादा है। सीएस श्री सिंह की माने तो ऐसा वायरस के डबल म्युटेंट वैरिएंट के कारण भी हो सकता है। स्वास्थ्य विभाग के पास ऑक्सीजन की व्यवस्था पर्याप्त

सीएस श्री सिंह ने बताया कि संक्रमण से गंभीर रूप से जूझ रहे मरीजों के लिए ऑक्सीजन सबसे जरूरी होता है। स्वास्थ्य विभाग के पास यह पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। फिलहाल 42 मरीज आइसोलेशन सेंटर में भर्ती हैं, जिनमे से 2 ऐसे मरीज ही हैं जिन्हें समय समय पर ऑक्सीजन की जरूरत पड़ रही है। वही एक अन्य प्रश्न के जवाब में उन्होंने बताया कि कोरोना प्रोटोकॉल का तहत रेमेडेसीवीर इंजेक्शन का इस्तेमाल मेडिकल कॉलेज में ही होना है। जिला अस्पताल में इसका प्रयोग वर्जित है।

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