सुकदेव के घर मन सकती हैं होली की खुशियां, प्रारंभ हुई भुगतान की प्रक्रिया

सुकदेव के घर मन सकती हैं होली की खुशियां, प्रारंभ हुई भुगतान की प्रक्रिया

भू-अर्जन घोटाला उजागर होने के बाद तमाम तरह की कार्रवाई व उलझनों में पिसकर रह गए असली भू स्वामी सुकदेव साह के लिए इस बार का होली का त्योहार खुशियों वाला हो सकता है। इस घोटाला के सामने आने के कारण असली भूस्वामी सुकदेव साह को मुआवजा के रूप में अबतक एक रुपये भी हासिल नहीं हुआ है।

JagranFri, 05 Mar 2021 12:17 AM (IST)

मोतिहारी । भू-अर्जन घोटाला उजागर होने के बाद तमाम तरह की कार्रवाई व उलझनों में पिसकर रह गए असली भू स्वामी सुकदेव साह के लिए इस बार का होली का त्योहार खुशियों वाला हो सकता है। इस घोटाला के सामने आने के कारण असली भूस्वामी सुकदेव साह को मुआवजा के रूप में अबतक एक रुपये भी हासिल नहीं हुआ है। इसे देखते हुए विभागीय स्तर पर सुखदेव साह को मुआवजा राशि दिलाने की कार्रवाई की जा रही है। अगर विभागीय पहल सही दिशा में जाती है तो इस साल सुखदेव साह के घर में होली की खुशियां जरूर मनेगी। अपनी भूमि सरकार को दे चुके सुकदेव साह को प्रशासन से उम्मीद है कि उसकी राशि अब उसे जरूर मिलेगी। जिला भू-अर्जन विभाग भी इस दिशा में गंभीर है। प्रथम चरण में इस फर्जीवाड़ा के आरोपी जयकिशुन तिवारी के पास से जब्त एक करोड़ 31 लाख रुपये को भू-अर्जन विभाग में वापस करने का प्रयास किया जा रहा है। चूंकि यह मामला अब निगरानी देख रहा है इसलिए कोषागार में जब्त राशि को वापस करने के लिए जिला भू-अर्जन पदाधिकारी विजय कुमार ने पत्र भेजा है। कहा गया है कि वहां से आदेश मिलने के बाद तत्काल उक्त राशि को सुकदेव साह को दी जाएगी। यहां बता दें कि केंद्रीय विश्वविद्यालय के लिए भूमि अधिग्रहण में फर्जी सुखदेव साह बनकर 3.5 करोड़ राशि की अवैध निकासी की गई थी। बताया गया कि तत्काल सुकदेव साह को एक करोड़ 31 लाख रुपये भुगतान किए जाएंगे। शेष राशि आरोपी जयकिशुन साह की संपत्ति की नीलामी कर भुगतान किया जाएगा। वर्ष 2018 में साढ़े छह करोड़ का हुआ था घोटाला जिला भू-अर्जन में वर्ष 2018 में फर्जी तरीके से राशि की निकासी की गई थी। इन सभी घोटाले का पर्दाफाश उस समय हुआ जब केंद्रीय विश्वविद्यालय की भूमि अधिग्रहण मामले में सुकदेव साह मुआवजा की राशि लेने के लिए भू-अर्जन कार्यालय पहुंचे। उनके पहुंचने के बाद पता चला कि उनके मुआवजा की राशि उठा ली गई है। डीएम को आवेदन देने के बाद जब इसकी जांच हुई तक घोटालों की परत खुलने लगी। तत्कालीन भूअर्जन पदाधिकारी सुधीर कुमार ने प्राथमिकी दर्ज कराई। जयकिशुन साह को मुख्य आरोपी बनाया गया। वहीं कार्यालय के कर्मियों की संलिप्तता भी सामने आई। इसके बाद भारत-नेपाल सीमा परियोजना में भी राजेंद्र साह को एक ही भूमि के लिए दो बार भुगतान करने का मामला सामने आया। उसी प्रकार फर्जी तरीके से रक्सौल के प्रमोद कुमार के नाम पर भी मुआवजे की राशि की निकासी की गई। केविवि के भूमि अधिग्रहण में ललन पटेल, छपराबहास के विजय मिश्रा मामले में भी विभाग मुआवजा देने पर विचार कर रहा है। बताया गया कि विभागीय स्तर पर यह प्रयास किया जा रहा है कि इस प्रकार के भू-स्वामियों को दूसरे मद की राशि दी जाय। विभागीय स्तर पर मार्गदर्शन मिलने के बाद उनको मुआवजा की राशि का भुगतान किया जाएगा।

वर्जन

सुकदेव साह को मुआवजा की राशि के भुगतान की प्रक्रिया चल रही है। इस संबंध में निगरानी विभाग को पत्र भेजा गया है, जिसमें जयकिशुन तिवारी से कोषागार में जब्त एक करोड़ 31 लाख की राशि को भू-अर्जन विभाग में स्थानांतरित करने की मांग की गई है। तत्काल यह राशि सुकदेव साह को दी जाएगी। शेष राशि का भुगतान जयकिशुन तिवारी की संपत्ति की नीलामी कर किया जाएगा।

विजय कुमार

जिला भू-अर्जन पदाधिकारी

पूर्वी चंपारण

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