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सकारात्मक सोच व बेशुमार दुवाओं की बदौलत डॉ. अजय वर्मा ने कोरोना से जीती जंग

सकारात्मक सोच व बेशुमार दुवाओं की बदौलत डॉ. अजय वर्मा ने कोरोना से जीती जंग

कहते हैं कि चिकित्सक धरती के भगवान होते हैं। लोगो का मानना है कि जीवन की डोर उनके हाथों में होती है। पिछले कुछ दिनों से कोरोना का लगातार बढ़ता दायर अब धरती के भगवान कहे जाने वाले इन चिकित्सकों को भी अपनी चपेट में लेने लगा है।

JagranThu, 06 May 2021 11:21 PM (IST)

मोतिहारी । कहते हैं कि चिकित्सक धरती के भगवान होते हैं। लोगो का मानना है कि जीवन की डोर उनके हाथों में होती है। पिछले कुछ दिनों से कोरोना का लगातार बढ़ता दायर अब धरती के भगवान कहे जाने वाले इन चिकित्सकों को भी अपनी चपेट में लेने लगा है। तमाम एहतियात बरतने के बावजूद भी चिकित्सक व उनके सहयोगी स्टाफ महामारी की जद्द में आ जा रहे हैं। हालांकि राहत की बात जरूर है कि लोगो से मिलने वाली बेशुमार दुवाओं के बदौलत इनमें से अधिकांश कोरोना से होने वाली जंग में विजयी हो रहे हैं। चंपारण के मशहूर सर्जन डॉ अजय वर्मा ने भी हाल ही में सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास की बदौलत कुछ ही दिनों की जद्दोजहद के बाद कोरोना जैसी जानलेवा बीमारी को मात दे जिन्दगी की बाजी जीत ली है। डॉ वर्मा बताते हैं कि कुछ दिनों पहले जब वे अपने नर्सिंग होम में मरीजों का इलाज कर रहे थे। अचानक बुखार की तरह महसूस हुआ। कोरोना से जुड़े कुछ और लक्षण भी महसूस हुए। मरीजो की सुरक्षा के ख्याल से तत्काल उन्होंने इलाज बन्द कर दिया। अगले दिन कोरोना का जांच कराने पर रिपोर्ट पॉजिटिव आया। तब उन्होंने ईश्वर को याद कर मजबूत इरादों के साथ इस बीमारी को परास्त करने की मुहिम शुरू कर दी। सबसे बड़ी बात कि उन्होंने बीमारी के खौफ को अपने ऊपर बिल्कुल हावी नहीं होने दिया। खुद को घर में हीं ''सेल्फ आइसोलेट'' कर लिया। इस दौरान परिवार वालों के साथ ही सहयोगियों का भी भरपूर साथ मिला। डॉ वर्मा बताते हैं कि बीमारी चाहे कोई भी हो सबसे जरूरी है होता है कि मरीज अपने हौशले व जीवटता को बरकरार रखें। ये मंत्र वे अपने सभी मरीजों को भी अक्सर बताते हैं। उन्होंने खुद भी अपनी इन बातों का अनुसरण किया व इस महामारी को मात देने में सफल रहें। आइसोलेशन के दौरान उन्होंने अपने मनपसंद गीत -संगीत का खूब लुत्फ उठाया। चिकित्सकों द्वारा बताए दवाओं का सेवन लगातार जारी रखा। साथ मे घरेलू उपचार भी करते रहें। कुछ दिनों की जद्दोजहद के बाद ही उनका रिपोर्ट नेगेटिव आ गया। इस तरह मजबूत इरादों और आत्मविश्वास के बलबूते कोरोना जैसी जानलेवा बीमारी से उबरने में उन्हें सफलता मिली। डॉ वर्मा बताते हैं कि कोरोना संक्रमण से उबरने में दवाओं के साथ ही मरीज के आत्म विश्वास का भी अहम रोल होता है। अमूमन हो यह रहा है कि रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर लोग घबरा जाते हैं और उनके मन मे नकारात्मक विचार आने लगते हैं। लोगो को समझना चाहिए कि 85 फीसद से ज्यादा लोग घर पर रहकर ही मामूली दवाओं व घरेलू उपचार से ठीक हो जाते हैं। घर मे बना काढ़ा, गर्म पानी का भांप, मल्टी विटामिन व पौष्टिक आहार का सेवन कर उन्होंने खुद इस बीमारी को घर पर रहकर हरा दिया। लोग बेजरूरत भी पॉजिटिव होने पर ऑक्सीजन व अन्य गैर जरूरी दवाओं के लिए हाथ पैर मारने लगते हैं। जबकि अगर कोई विशेष परेशानी न हो व ऑक्सीजन लेवल सामान्य हो तो घर पर खुद को आइसोलेट कर चिकित्सकों द्वारा बताए गए दवाओं का सेवन व ज्यादा से ज्यादा आराम करना चाहिए। उन्होंने कोरोना मरीजों को सलाह देते हुए कहा कि वे अपना मनोबल बनाए रखें। बीमारी को अपने ऊपर हावी नहीं होने दें। ़खुद को आइसोलेट कर चिकित्सकों की सलाह पर दवा लें। वहीं सामान्य लोगों से अपील करते हुए कहा कि कोरोना एक गंभीर बीमारी है। जरूरी है कि लोग सोशल डिस्टेंसिग का पालन व मास्क का प्रयोग करें।

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