अनशनकारी की स्थिति गंभीर, अस्पताल भेजने की मंशा पर फिरा पानी

दरभंगा। संबद्ध कॉलेज संघर्ष समिति के मुख्य संरक्षक डॉ. राममोहन झा एवं सचिव डॉ. चंद्रकांत झा छठे दिन आमरण अनशन पर रहे। इन दोनों की स्थिति गंभीर बनी हुई है। सोमवार को दिनभर सांप-सीढ़ी का खेल चलता रहा। विवि प्रशासन जहां चिकित्सकों की सहमति से दोनों अनशनकारी को अस्पताल भेजने के लिए प्रयासरत रहा। वहीं अनशनकारी विवि की उस मंशा पर पानी फेरते नजर आए। जिला प्रशासन की ओर से आए चिकित्सक ने जांच के बाद कहा कि 11 सितंबर को 4.00 बजे तक इन दोनों का ब्लड प्रेशर स्थिर रहेगा। इस पर दोबारा विवि स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. गीतेंद्र मिश्रा को बुलाया गया। उन्होंने जांच कर 12 घंटे तक दोनों के ब्लड प्रेशर स्थिर रहने की बात कही। फिर तो मजूबरन प्रशासनिक पदाधिकारी जबरन दोनों अनशनकारी को अस्पताल नहीं ले जा सके। जबकि, दोनों अनशनकारी की स्थिति काफी गंभीर बनी हुई है। दूसरी ओर विवि की ओर से रविवार को पूर्व विधान पार्षद डॉ. विनोद कुमार चौधरी को वार्ता करने के लिए संकेत दिया गया था। उन्होंने तत्काल इसके लिए प्रयास शुरू कर दिया। रविवार को शाम से लेकर सोमवार को दो-दो बार अनशनकारी से वार्ता कर उन्हें समझौता के लिए राजी किया। इसकी सूचना उन्होंने कुलसचिव और कुलपति के निजी सहायक को दी। लेकिन, उधर से कोई सकारात्मक संकेत नहीं मिला। अंत में संध्या में विवि से आवास के लिए प्रस्थान कर गए।

कुलसचिव कर्नल निशीथ कुमार राय ने कहा कि दूसरे दिन से ही वार्ता के लिए प्रयास कर रहे हैं। मेडिकल अफसर ने दोनों अनशनकारी की हालत गंभीर होने की जानकारी दी थी। इस पर उन सबको अस्पताल भेजने का निर्णय लिया गया था। बाद में सरकारी चिकित्सक की जांच में हालत स्थिर बताया गया। फिर विवि के चिकित्सक ने भी जांच कर कल सुबह तक के लिए हालत ठीक बताया है। दूसरी ओर आंदोलनकारियों ने विवि प्रशासन की मंशा को देखकर अगले की रणनीति बना ली है। समिति के अध्यक्ष डॉ. रामसुभग चौधरी ने मंगलवार से अनशनकारी के समर्थन में दो शिक्षक प्रो. उदय शंकर मिश्र एवं प्रो. अंजनी कुमार सिन्हा को अनशन पर बैठने की लिखित जानकारी कुलपति को दी है। मौके पर अभय कुमार, अखिल रंजन झा, सुरेश राम, डॉ. कुशेश्वर ¨सह, इंद्रकिशोर मिश्र, अंजनी रंजन सिन्हा, उदय शंकर मिश्र, नवल किशोर यादव, विष्णुदेव राम, कृष्ण मोहन झा, सुमन कुमार झा सहित अन्य लोग दिनभर विचार मंथन करते रहे।

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