बढ़ सकती हैं ग्रामीण कार्य विभाग के प्रभारी अधीक्षण अभियंता की मुश्किलें

दरभंगा ग्रामीण कार्य विभाग- टू के कार्यपालक अभियंता सह प्रभारी अधीक्षण अभियंता अनिल कुमार के पास 67 लाख की बरामदगी के बाद दिन प्रतिदिन उनकी मुश्किलें बढ़ने लगी है। दरअसल दरभंगा ग्रामीण कार्य विभाग- टू के कार्यालय में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के शिलान्यास किए गए दर्जनों शिलापट्ट धूल फांक रहे हैं।

JagranTue, 21 Sep 2021 12:52 AM (IST)
बढ़ सकती हैं ग्रामीण कार्य विभाग के प्रभारी अधीक्षण अभियंता की मुश्किलें

दरभंगा । दरभंगा ग्रामीण कार्य विभाग- टू के कार्यपालक अभियंता सह प्रभारी अधीक्षण अभियंता अनिल कुमार के पास 67 लाख की बरामदगी के बाद दिन प्रतिदिन उनकी मुश्किलें बढ़ने लगी है। दरअसल, दरभंगा ग्रामीण कार्य विभाग- टू के कार्यालय में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के शिलान्यास किए गए दर्जनों शिलापट्ट धूल फांक रहे हैं। सभी शिलापट्ट कार्यपालक अभियंता के चेंबर के बाहर दो भागों में रखे गए हैं। जो विभिन्न सड़कों से संबंधित हैं। बताया जाता है कि जल-जीवन हरियाली यात्रा कार्यक्रम के क्रम में मुख्यमंत्री ने विभिन्न सड़कों का शिलान्यास किया था। लेकिन, संबंधित सड़कों में शिलान्यास पट्ट लगाने की जगह सभी को कार्यालय में रख दिया गया। मामला सीएम से जुड़ा होने के बाद भी इस पर विभाग के किसी अधिकारी ने संज्ञान लेना उचित नहीं समझा। ऐसी स्थिति में कार्यपालक अभियंता के खिलाफ जांच शुरू होने से इस मामले को भी गंभीरता से लिया जाएगा। बहरहाल, घटना की तिथि से लेकर अब तक इस कार्यालय में पहले की तरह चहलकदमी नहीं देखी जा रही है। कार्यालय में सन्नाटा पसरा रहता है। काम बाधित रहने से संवेदकों का भी आना-जाना कम हो गया है। आर्थिक अपराध इकाई की टीम कार्यालय में कभी भी जांच के लिए पहुंच सकती है इस आशंका को देख संबंधित कई कर्मी अंदर ही अंदर डरे और सहमे रहते हैं।

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नए अधीक्षण अभियंता के लिए विभागीय स्तर पर मंथन :

प्रभारी अधीक्षण अभियंता के पास से मोटी रकम मिलने और पूरे मामले की जांच शुरू होने के बाद नए अधीक्षण अभियंता के योगदान के लिए विभागीय मंथन शुरू हो गया है। विभागीय सूत्र अनुसार दो से तीन दिनों में नए अधीक्षण अभियंता योगदान दे सकते हैं। इस तरह की चर्चाएं कार्यालय में जोरों पर हैं। कहा तो यह भी जा रहा है कि एक स्थानीय कार्यपालक अभियंता को ही तत्काल प्रभार मिल सकता है।

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सड़क मरम्मत की जमीनी जांच शुरू होने से बढ़ी बेचैनी : एफडीआर योजना की जमीनी जांच शुरू होने से अभियंताओं सहित फेक संवेदकों में बेचैनी बढ़ गई है। दरअसल, बाढ़ से क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत की जानकारी कई स्थानीय मुखिया को भी नहीं है। ऐसी स्थिति में अंदर ही अंदर सभी साक्ष्य जुटाने में जुटे हैं। लेकिन, यह संभव नहीं है। आर्थिक अपराध इकाई की टीम दो दिनों में कुछ सड़कों की जो जांच की है उससे एफडीआर योजना की पोल खुल चुकी है। बहुत जल्द टीम बारी-बारी से सभी सड़कों की जांच करने वाली है। बता दें कि एक अरब 15 करोड़ की राशि से दरभंगा अंचल के दरभंगा और मधुबनी जिले के 538 सड़कों की कराई गई मरम्मति में सबसे अधिक दरभंगा ग्रामीण कार्य विभाग टू में 227 सड़कों की मरम्मति कराई गई है। इसमें 21 करोड़ 59 लाख रुपये खर्च की गई है। यही कारण है कि जिले के सिंहवाड़ा, जाले, हनुमाननगर, बहेड़ी, बहादुरपुर, केवटी आदि प्रखंडों के संवेदकों में हड़कंप मचा है।

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मास्टर रॉल व ईंट बिल पर भी नजर :

एफडीआर योजना से जिन सड़कों की मरम्मति कराई गई है उसकी सच्चाई जमीनी निरीक्षण के साथ-साथ कागजी जांच से होगी। बताया जाता है कि आर्थिक अपराध इकाई मास्टर रॉल और ईंट बिल की भी जांच करेगी। यह पता लगाया जाएगा इसमें कौन-कौन मजदूर काम किए हैं और क्षतिग्रस्त सड़क को मरम्मत कराने के लिए कहां से और कितनी ईंट मंगाई गई है। इसमें कई कागजात फर्जी पाए जाने की आशंका व्यक्त की जा रही है। --------

24 दिनों से चर्चा में हैं प्रभारी अधीक्षण अभियंता :

प्रभारी अधीक्षण अभियंता अनिल कुमार 24 दिनों से चर्चा में है। हालांकि, अभी तक उनके खिलाफ कोई विभागीय कार्रवाई नहीं की गई है। लेकिन, मुख्यमंत्री सचिवालय ने पूरे मामले की जांच आर्थिक अपराध इकाई और विभागीय स्तर पर करने का आदेश दिया है। बता दें कि प्रभारी अधीक्षण अभियंता स्कार्पियो गाड़ी से 28 अगस्त को पटना जा रहे थे। इस बीच मुजफ्फरपुर के कुढ़नी थाने के फकुली ओपी पुलिस ने वाहन जांच दौरान उनकी गाड़ी से 18 लाख रुपये बरामद किए थे। इसके बाद मुजफ्फरपुर पुलिस ने उनके दरभंगा आवास सहित पटना के दो घरों पर छापेमारी की थी। इस दौरान दरभंगा के बहादुरपुर थानाक्षेत्र के बरहेता रोड स्थित उनके आवास से 49 लाख रुपये के साथ लगभग दो दर्जन संपत्ति के दस्तावेज, डायरी, लैपटाप, बाउंड, सादा स्टांप पेपर आदि बरामद किए गए थे। इसमें भूमि व भवन से संबंधित दस्तावेज अलग-अलग नामों से मिले थे। मुजफ्फरपुर पुलिस ने सभी दस्तावेजों और लैपटाप को आर्थिक अपराध इकाई को सौंप दिया था।

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