खरना संपन्न, सायंकालीन अ‌र्घ्य आज

खरना संपन्न, सायंकालीन अ‌र्घ्य आज

दरभंगा। लोक आस्था का महापर्व चैती छठ के दूसरे दिन खरना पूरा संपन्न हुआ। छठव्रती शनिवार

JagranSat, 17 Apr 2021 10:56 PM (IST)

दरभंगा। लोक आस्था का महापर्व चैती छठ के दूसरे दिन खरना पूरा संपन्न हुआ। छठव्रती शनिवार की शाम खरना का प्रसाद छठ माता को अर्पित कर प्रसाद ग्रहण की। इसके बाद 36 घंटे का निर्जला उपवास शुरू हो गया। रविवार को अस्ताचलगामी सूर्य को अ‌र्घ्य देने के बाद सोमवार को उदयीमान सूर्य को अ‌र्घ्य देने के साथ ही चैती छठ का व्रत संपन्न हो जाएगा।

छठ पूजा के दिन सूर्य को अ‌र्घ्य देने का महत्व

छठ पूजा के दिन सूर्य को अ‌र्घ्य देने का विधान है। छठ पूजा का व्रत महिलाएं अपनी संतान की रक्षा और सुखी जीवन के लिए रखती हैं। साथ ही पूरे परिवार की सुख शांति की कामना के लिए भी यह व्रत किया जाता है। मान्यता है कि खरना की पूजा करने के बाद घर में देवी षष्ठी का आगमन होता है। फिर तीसरे और चौथे दिन इस पर्व का सबसे अहम होता है। इसे ही सांध्य और उषा अ‌र्घ्य कहा जाता है। संध्या अ‌र्घ्य: छठ पूजा का पर्व षष्ठी के दिन ही होता है। इस दिन संध्या अ‌र्घ्य का महत्व है। इस दिन संध्या के समय सूर्य देव को अ‌र्घ्य दिया जाता है। साथ ही इनकी विधिवत पूजा भी की जाती है। इस दौरान सूर्यदेव अपनी पत्नी प्रत्यूषा के साथ होते हैं। ऐसे में प्रत्यूषा को अ‌र्घ्य देने का लाभ भी इस दौरान मिलता है। इस दिन शाम के समय बांस की टोकरी में ठेकुआ, चावल के लड्डू और कुछ फल रखे जाते हैं। इसे सजाने के बाद सूर्य को अ‌र्घ्य दिया जाता है। ऐसे ही छठी मैय्या की पूजा की जाती है। फिर व्रत कथा सुनी जाती है और छठी मैय्या के गीत गाए जाते हैं। उषा अ‌र्घ्य: इस दिन सुबह सूर्योदय से पहले उठ जाना चाहिए और फिर नदी के घाट पर पहुंचकर उगते सूर्य को अ‌र्घ्य दिया जाता है। षष्ठी के दूसरे दिन सप्तमी को उषाकाल में सूर्य को अ‌र्घ्य दिया जाता है। इससे ही व्रत का पारण और समापन होता है। छठ पूजा के अंतिम दिन का अ‌र्घ्य सूर्य की वरुण वेला में दिया जाता है। इस दिन का अ‌र्घ्य सूर्य की पत्नी उषा को दिया जाता है। पूजा करने के बाद जिस व्यक्ति ने व्रत रखा होता है वह दूध का शरबत पीकर और प्रसाद खाकर व्रत को पूरा करता है। इसी दिन छठ का समापन होता है।

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