पारंपरिक विषयों के इतर विषयों में छात्रों का रुझान कम, दो दर्जन नये कोर्सों को प्रारंभ करना चुनौती भरा काम

पारंपरिक विषयों के इतर विषयों में छात्रों का रुझान कम, दो दर्जन नये कोर्सों को प्रारंभ करना चुनौती भरा काम

दरभंगा। ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय में छात्रों का रुझान पारंपरिक विषयों के इतर विषयों म

JagranTue, 29 Dec 2020 12:46 AM (IST)

दरभंगा। ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय में छात्रों का रुझान पारंपरिक विषयों के इतर विषयों में कम देखने को मिल रहा है। पारंपरिक विषयों के इतर पाठ्यक्रमों में नामांकन को लेकर छात्रों की दिलचस्पी बहुत कम देखी जा रही है। इससे विश्वविद्यालय द्वारा दो दर्जन से अधिक पारंपरिक विषयों से इतर पाठ्यक्रम आरंभ करने की योजना चुनौती भरा हो सकता है। छात्रों में नये पाठ्यक्रमों में नामांकन को लेकर दिलचस्पी पैदा करने के लिए विश्वविद्यालय को काफी जद्दोजहद करनी पर सकती है। हालांकि, विश्वविद्यालय इन कोर्सों में नामांकन को लेकर निश्चित दिख रही है। सत्र 2020-23 में नामांकन को लेकर इस वर्ष सभी विषयों में कुल एक लाख 78 हजार पांच सौ 13 आवेदन मिले थे। इसमें पारंपरिक इतिहास प्रतिष्ठा में कुल 25 हजार तीन सौ 94 सीटों के विरुद्ध 41 हजार आठ सौ 16 आवेदन मिले थे। पारंपरिक विषय से इतर सबसे कम ड्रामा प्रतिष्ठा विषय के 450 सीटों के विरुद्ध मात्र एक आवेदन मिले थे। अब विश्वविद्यालय के सामने पहले से चल रहे पारंपरिक विषयों के इतर विषयों की सीटों को भरने के साथ ही पारंपरिक पाठ्यक्रम के इतर दो दर्जन नये पाठ्यक्रम में भी नामांकन को लेकर सीटों के भरने की चुनौती सामने रहेगी।

पारंपरिक विषयों के इतर इन पाठ्यक्रमों में नामांकन के लिए कुल सीटों के विरुद्ध मिले आवेदनों की संख्या

. ड्रामा प्रतिष्ठा के 450 सीटों के विरुद्ध एक आवेदन

. पर्शियन पाठ्क्रम के 2080 सीटों के विरुद्ध दो आवेदन

. एंट्रोपोलॉजी प्रतिष्ठा के 1480 सीटों के विरुद्ध दो आवेदन

. एलएसडबल्यू पाठ्यक्रम के 2005 सीटों के विरुद्ध पांच आवेदन मिले थे।

- पारंपरिक विषयों में नामांकन को लेकर सीटों से अधिक मिले थे आवेदन

. इतिहास प्रतिष्ठा में कुल 25394 सीटों के विरुद्ध 41816 आवेदन

. भूगोल प्रतिष्ठा में 16270 सीट के विरुद्ध 19835 आवेदन

. हिदी प्रतिष्ठा में 12400 सीट के विरुद्ध 15423 आवेदन

. जंतु विज्ञान प्रतिष्ठा में 9093 सीट के विरुद्ध 13885 मिले थे।

पारंपरिक विषयों के इतर इन नये कोर्सों को मिली है मंजूरी

पारंपरिक विषयों के इतर विषयों में स्ववित्तपोषित योजना अंतर्गत स्नातक प्रतिष्ठा एवं स्नातकोत्तर स्तर की पढ़ाई प्रारंभ करने की योजना बनी है। दो दर्जन से अधिक नये पाठ्यक्रमों में पढ़ाई शुरू की जाएगी। इसमें बायोकेमिस्ट्री, माइक्रोबायोलॉजी एंड वायरोलॉजी , इनवायरामेंट साइंस, फिशरीज, फार्मोकोलॉजी, बीसीएएमसीए , मास कम्युनिकेशन एंड मीडिया, सोशल वर्क, बीबीए, एमबीए, डिसेस्टर मैनेजमेंट, मास्टर ऑफ इवेंट मैनेजमेंट, पांच वर्षीय इंटीग्रेटेड कोर्स इन एलएलबी, बीपीएड, एमपीएड साइंस, एमटेक इन इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी एण्ड कंप्यूटर साइंस आदि शामिल है।

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चल रहे पारंपरिक विषयों के इतर पाठ्यक्रमों में बदलाव की जरूरत : कुलपति

ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सुरेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि वर्तमान में चल रहे पारंपरिक विषयों के अलावे पाठ्यक्रमों में बदलाव की जरूरत है। तभी बच्चों का रुझान इन पाठ्यक्रमों में होगी। पाठ्यक्रमों को रोजगार से जोड़ना सबसे पहला लक्ष्य होना चाहिए। पाठ्यक्रमों को प्रतियोगिता से जोड़ने की जरूरत है। तभी इन पाठ्यक्रमों में छात्रों की रुचि बढ़ेगी। इसके लिए संबंधित विषयों के शिक्षकों की भी जवाबदेही बनती है, कि सिलेबस में क्या परिवर्तन की जाए जो छात्रों में रुचि लाया जा सके। कुलपति ने कहा कि पारंपरिक कोर्स से इतर दो दर्जन नये कोर्स आरंभ की जा रही है। ये सभी कोर्स रोजगार और प्रतियोगिता आधारित हैं। इसमें छात्रों के लिए अधिक अवसर हैं। विशेषज्ञों के साथ काफी मंथन और विचार के बाद नये कोर्स को आरंभ किया गया है।

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