दरभंगा में खुद के बूते महिलाएं लिख रही विकास की नई इबारत

दरभंगा में खुद के बूते महिलाएं लिख रही विकास की नई इबारत

दरभंगा। ग्रामीण क्षेत्रों में पहले जहां महिलाओं को घरों की दहलीज पार करने के लिए सोचना प

JagranTue, 05 Jan 2021 01:06 AM (IST)

दरभंगा। ग्रामीण क्षेत्रों में पहले जहां महिलाओं को घरों की दहलीज पार करने के लिए सोचना पड़ता था। वहीं महिलाएं अब ग्रामीण क्षेत्र में जीविका से जुड़कर समाज के विकास के साथ ही परिवार का भी जिम्मेदारी उठा रही हैं। परिवार के खर्च को खुद वहन करने के लिए सबल बन रही हैं। ग्रामीण महिलाओं की गरीबी दूर करने और उन्हें सशक्त बनाने में जीविका की बड़ी भूमिका रेखांकित हो रही है। जिले में 42 हजार दो सौ 55 स्वयं सहायता समूह काम कर रहे हैं। इन समूहों से चार लाख 50 हजार महिलाएं जुड़ी हैं। ये महिलाएं आर्थिक क्रियाकलापों से जुड़कर न सिर्फ स्वावलंबी बन रहीं हैं। बल्कि उनका सामाजिक सशक्तिकरण भी हो रहा है। जीविका से जुड़ी महिलाओं के हाथ कभी खाली नहीं रहते। इन्हें अपनी आर्थिक जरूरतों के लिए पति या अभिभावक पर निर्भर नहीं होना पड़ रहा। वे स्वरोजगार से जुड़ आर्थिक उन्नयन की राह पर हैं। सबल महिलाएं प्रशिक्षण पाकर सीएसपी, मधुमक्खी पालन, सिक्की कला, अगरबत्ती व्यवसाय आदि कर हजारों कमा रही हैं। खेती एवं सब्जी उत्पादन कर रुपये कमा रही हैं। साथ ही कोरोना काल में 7.50 लाख मास्क तैयार कर कीर्तिमान बनाया है।

बैंक सखी बन निधि कमा रही हजारों रुपये

गरीबी उन्मूलन के लिए बिहार सरकार द्वारा लांच की गई जीविका की परियोजना का लाभ बहेड़ी प्रखंड अतंर्गत बहेड़ी पश्चमी की रहने वाली बैंक सखी जीविका सहायता समूह की निधि कुमारी प्रखंड क्षेत्र में खूब नाम कमा रही हैं। सीएसपी(ग्राहक सेवा केंद्र) जिसे जीविका की भाषा में सखी बैंक कहा जाता है, इसके माध्यम से निधि प्रति माह 30 से 40 हजार रुपये कमा रही हैं । जीविका बहेड़ी प्रखंड परियोजना प्रबंधक मनोज कुमार बताते हैं , निधि वर्ष 2019 में निधि ने सीएपी( जीविका के भाषा में सखी बैंक) के माध्यम से एक करोड़ रुपये का ट्रांजेक्शन कर मिशाल स्थापित की हैं ।

जिले के सभी 18 प्रखंडों में खुले हैं स्वयं सहायता समूह

जिले के सभी 18 प्रखंडों को मिलाकर अबतक कुल 42 हजार दो सौ 55 स्वयं सहायता समूहों का निर्माण किया जा चुका है। इसमें कुल 4.5 लाख जीविका दीदियां जुड़ी हैं। बता दें कि समूह में 12 सदस्य होते हैं। इसमें सैकड़ों की संख्या में पुरुष कैडर भी जुड़े हैं। समूह निर्माण एवं उसके संचालन में सहयोग के लिए भी बड़ी संख्या में युवक-युवतियों को आकर्षक वेतन पर नौकरी मिली हुई है।

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