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चीन के टैग वाले ऑक्सीमीटर और थर्मामीटर दे रहे धोखा

चीन के टैग वाले ऑक्सीमीटर और थर्मामीटर दे रहे धोखा

दरभंगा। कोरोना महामारी के चलते बाजार में ऑक्सीमीटर और थर्मामीटर की डिमांड बढ़ने से

JagranSat, 15 May 2021 12:20 AM (IST)

दरभंगा। कोरोना महामारी के चलते बाजार में ऑक्सीमीटर और थर्मामीटर की डिमांड बढ़ने से कथित चीनी कंपनियों का रिजेक्ट माल भी बाजार में आ गया है। ऑक्सीमीटर लगातार कम ऑक्सीजन दिखा रहा है या फिर नॉर्मल। थर्मामीटर से बुखार का पारा कम होने का नाम नहीं ले रहा। चिकित्सकों द्वारा क्रॉस चेक करने के बाद यह सामने आया है। डिमांड बढ़ने के कारण व्यापारियों ने चीन से आनेवाले उन सामानों को भी बाजार में उतार दिया है, जो रिजेक्ट कर दिया गया था। आपदा को अवसर बनानेवाले कतिपय लोगों ने पैसा कमाने के लालच में जनता को धोखा देना शुरू कर दिया है। शहर में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें लोगों को बुखार नहीं हो पाने के बाद भी थर्मामीटर 99 और 100 बुखार दिखा रहा है। चिकित्सक के यहां जांच कराई और उसने अपने थर्मामीटर से देखा तो भेद खुला।

शहर के रामानंदपथ निवासी संजय कुमार कहते हैं, चीनी कंपनी का थर्मामीटर खरीदा था, लगातार उससे शरीर का तापमान माप रहा था। बुखार नहीं रहने पर भी थर्मामीटर 99 से 100 बुखार दिखा रहा था। चिकित्सक के पास जाने पर इसका पता चला। ऑक्सीमीटर को लेकर भी यही हालत है। डीएमसीएच में इलाज को पहुंचे बेनीपुर के युगल किशोर साह कहते हैं, परिवार के एक सदस्य को कोरोना संक्रमण हो गया था। जिसके लिए ऑक्सीमीटर खरीदा था। जब अपना ऑक्सीजन चेक किया, तो वह 80 आया। मुझे किसी तरह की कोई प्रॉब्लम नहीं थी। जब चिकित्सक के पास गया तो वहां जांच के बाद ऑक्सीजन लेबल 95 बताया गया। तब जाकर राहत की सांस ली। और चीनी कंपनी का खरीदा हुई पल्स ऑक्सीमीटर को नष्ट कर दिया। शहर के बेंता चौक स्थित कल्याणी सर्जिकल के संचालक अरूण कुमार कहते हैं, बात हुई, सस्ते के चक्कर में लोग चीनी ऑक्सीमीटर खरीद रहे हैं। जिसका कोई गारंटी नहीं है। बाजार में अधिकतम थर्मामीटर और ऑक्सीमीटर चीन निर्मित ही हैं। बड़ेही निवासी इनकम टैक्स कमिश्नर की मौत का एक कारण ऑक्सीमीटर की गलत रीडिग बहेड़ी प्रखंड के बारा निवासी विजय कुमार ने हाल में दिल्ली के एक निजी अस्पताल में कोरोना संक्रमण के बाद दम तोड़ दिया था। वे दिल्ली में इनकम टैक्स के प्रिसिपल कमिश्नर थे। पिछले कई दिनों से घर में आइसोलेट थे। वे घर पर ही ऑक्सीमीटर से अपने शरीर की ऑक्सीजन लेबल जांचते रहे। जिसमें उनके शरीर का ऑक्सीजन लेबल सामान्य पता चलता। लेकिन दो तीन दिनों के बाद उनकी सेहत अचानक खराब होने लगी। दिल्ली के एक निजी अस्पताल में इन्हें भर्ती कराया गया। जहां इस बात का खुलासा हुआ कि जिस ऑक्सीमीटर से वे अपने शरीर का ऑक्सीजन लेबल माप रहे थे। वह फर्जी था। अस्पताल में जब उनके शरीर का ऑक्सीजन लेबल मापा गया, तो वह काफी कम था। जिस कारण उनका असामयिक निधन हो गया।

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