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सत्तर हजार रातों से बेहतर है एक शब-ए-कदर

सत्तर हजार रातों से बेहतर है एक शब-ए-कदर

दरभंगा। रमजानुल मुबारक का दूसरा अशरा संपन्न हो गया। सोमवार की रात से तीसरा और आखिर

JagranFri, 07 May 2021 12:16 AM (IST)

दरभंगा। रमजानुल मुबारक का दूसरा अशरा संपन्न हो गया। सोमवार की रात से तीसरा और आखिरी अशरा शुरू हो गया जो पूरे महीने का सबसे महत्वपूर्ण भाग है। बल्कि इसे पूरे रमजान का निचोड़ भी कहा जा सकता है। मिल्लत कॉलेज के पास मस्जिद-ए-नूर के इमाम मौलाना सरफराज अहमद ने कहा कि रमजानुल मुबारक के तीसरे अशरे में ही पांच मुकद्दस रातें आती हैं। इनके बारे में कहा गया है कि इनमें से एक रात की इबादत सत्तर हजार रातों में की जाने वाली इबादतों से बेहतर है। इस रात की कद्र करें और ज्यादा से ज्यादा इबादत करने का प्रयास करें। रमजान का महीना इबादत का , बुराइयों से परहेज करने का और कम•ाोरों से हमदर्दी जताने का महीना है । इसमे एक नेकी के सत्तर सवाब मिलते हैं । जितना आप अच्छा काम कीजिएगा दूसरे की मदद कीजिएगा आपको उतना ही ज्यादा सवाब मिलेगा । इसी महीने में रो•ो का फितरा भी निकाला जाता है। इसपर गरीबों का हक है । आप समय रहते गरीबों को उनका हक्क अदा कर दीजिएगा तभी वह इस रकम से अपने लिए और अपने परिवार के लिए ईद के अवसर पर कपड़े या अन्य उपहार ले सकेंगे। मौलाना ने कहा कि आज हमारे मुल्क के हालात खराब है ऐसे में रमजान पाक की आमद और भी महत्वपूर्ण हो गई है। मुसीबत के इस समय में जब लोगों को एक दूसरे की मदद की सख्त जरूरत है तब रोजेदारों को तो और भी सत्तर गुना अधिक सवाब कमाने का अवसर मिल गया है। महामारी की वजह से लोग घर में ही इबादत कर रहे हैं । इफ्तार का इंतजाम भी अपने घरेलू सदस्यों के बीच ही हो रहा है । ऐसे में जरूरी है कि कमजोर , बूढ़े और बीमार लोगों की मदद कोरोना से सुरक्षा के उपाय अपनाते हुए बढ़ चढ़ कर किया जाए । उन्होंने कहा कि लोग अल्लाह के आगे माफी मांगे । दूसरे से हमदर्दी के जज्बे को विकसित करें और महामारी से निजात के लिए रात के अंतिम पहर में दुआ मांगे ।

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