धान में झुलसा से बचाव को नाइट्रोजन का कम करें उपयोग

धान में झुलसा से बचाव को नाइट्रोजन का कम करें उपयोग
Publish Date:Fri, 25 Sep 2020 04:18 PM (IST) Author: Jagran

बक्सर : इन दिनों आम तौर पर किसानों द्वारा धान की फसल में झुलसा अथवा गलका नामक बीमारी का प्रकोप होने की शिकायतें मिल रही हैं। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने क्षेत्र के निरीक्षण के बाद बताया है कि अधिकांश किसानों द्वारा काफी अधिक मात्रा में नाइट्रोजन का खेतों में छिड़काव किया गया है। धान की फसल में झुलसा अथवा गलका नामक बीमारी का प्रकोप होने की यह एक मुख्य वजह है। इसके बचाव के लिए किसानों को समुचित उपाय करना बेहद जरूरी होगा।

इसकी जानकारी देते हुए कृषि विज्ञान केन्द्र, बक्सर के विशेषज्ञ एवं प्रभारी प्रमुख रामकेवल सिंह ने बताया कि यह बीमारी विशेष रूप से धान की एमटीयू-7029 प्रजाति में सबसे अधिक लगता हैं। यह रोग अधिक खरपतवार वाले खेतों मे ज्यादा लगता है और काफी तेजी से फैलता हैं। सबसे बड़ी बात है कि अंधाधुंध नाइट्रोजन का उपयोग भी धान फसलों में इस रोग के कारक है। यदि इस रोग का प्रकोप अधिक होने पर 50 से 60 प्रतिशत तक उपज मे कमी आ सकती हैं। रोग के लक्षण पर जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि इसमे नीचे की पत्तियां सूखकर गलने लगती है तथा तने को घेरे हुए पत्तियों पर भी झुलसन दिखाई देने लगता हैं। ध्यान न देने पर ऊपर की 2-3 पत्तियों को छोड़कर सभी पत्तियां झुलसकर गल जाती है, जिससे उपज पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता हैं। इस बीमारी से बचाव के लिए किसान भाई संतुलित मात्रा मे नाइट्रोजन का प्रयोग करें, साथ ही खेत को खरपतवार मुक्त रखें। इसके अलावा प्रोपिनाजॉल 25 ईसी की 500 एम.एल. मात्रा या टेबुकोनाजॉल 250 ईसी की 750 एम.एल. मात्रा प्रति हेक्टेयर 500 लीटर पानी मे मिलाकर खेत मे छिड़काव कर सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए कृषि विज्ञान केन्द्र, बक्सर से संपर्क कर सकते हैं।

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