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कोविड-19 की भेंट चढ़ गया छाता और रेनकोट का बाजार

बक्सर : मानसून अपने शबाब पर है। अमूमन रोज ही आसमानी बूंदें गिर रही हैं। बावजूद, छाता और रेनकोट का व्यवसाय मंद पड़ा हुआ है। कारोबारी इसे कोविड-19 संक्रमण काल की वजह बताते हैं। वर्षा ऋतु में रेनकोट व छातों की बिक्री बढ़ जाती है। शहर के मुनीम चौक पर ही आधा दर्जन से अधिक दुकानें हैं। मानसून की बारिश भी साथ दिए हुए है। इसे लेकर दुकानदारों ने तरह-तरह के रंगों के छाते और रेनकोट दुकान के बाहर टांगे हुए हैं। कई व्यवसायी बताते हैं कि इस मौसम में उनके घर का खर्च इसी की बिक्री से चल जाता है।

इस बार भी उम्मीद के अनुरूप लोगों ने माल मंगा रखा है। लेकिन, उनका पूरा व्यवसाय कोविड-19 की भेंट चढ़ गया है। छाता व्यवसायी अभय ने बताया कि बारिश को देखते हुए होनेवाली बिक्री को लेकर मन काफी प्रफ्फुलित था। कोलकाता के बाद पटना से भी कुछ माल मंगा लिए थे। परन्तु, बाजार पूरी तरह से उलट गया है। सेराज का कहना है कि छाते का इस्तेमाल सबसे अधिक बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग करते हैं। लेकिन, कोरोना के चलते महिलाएं और बुजुर्ग घर से बाहर कम ही निकल रहे हैं। वहीं, बच्चों के स्कूल बंद पड़े हैं।

तीन सौ से 6 सौ की रेंज में मिल रहे रेनकोट

बाजार में रेनकोट तीन सौ से छह सौ रुपये तक की रेंज में विभिन्न रंगों और डिजाइनों में उपलब्ध हैं। वहीं, महिलाओं के लिए टू-फोल्ड व थ्री-फोल्ड में आकर्षक आकृति के रंगीन छाते 150-200 रुपये प्रति पीस के दर से बेचे जा रहे हैं। जबकि, पुरुषों के लिए काले रंग वाले छाते सौ रुपये से तीन सौ रुपये तक की रेंज में उपलब्ध हैं। दुकानदारों ने बताया कि इन सामानों की कीमत गत वर्ष की भांति ही बनी हुई है।

बिक्री पर 60 फीसद का पड़ा असर

पीपी रोड के कारोबारी दुलार चंद और नेतलाल ने बताया कि लॉकडाउन के कारण लोगों के आमदनी का स्त्रोत रुक गया। जिससे खान-पान सम्बन्धित जरूरी मद में ही लोग खर्च कर रहे हैं। बाजार में देहाती क्षेत्रों से भी लोगों का आवागमन कम बना हुआ है। बिक्री को लेकर बताया कि 40 फीसद से अधिक नहीं है।

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