दीपावली में रंगों से ऐसे सज रहे घर कि दीवारें बोल उठीं

दीपावली में रंगों से ऐसे सज रहे घर कि दीवारें बोल उठीं

बक्सर घर की दीवारों पर चढ़ा हर रंग यहां रहने वालों की शख्सियत बयां करता है। घर न

Publish Date:Sun, 01 Nov 2020 03:21 PM (IST) Author: Jagran

बक्सर : घर की दीवारों पर चढ़ा हर रंग यहां रहने वालों की शख्सियत बयां करता है। घर नया हो या पुराना, दिवाली हर घर के लिए खास होती है। कोरोना संक्रमण की जिच ने भले ही लोगों को आर्थिक रूप से परेशान किया है। लेकिन, आशियाने को सुंदर बनाने की चाहत में उनके खर्च कोई मायने नहीं रखता। बल्कि, इसे दोहरे लाभ प्राप्ति की दृष्टि से देख रहे हैं।

दीप पर्व के 13 दिन शेष रह गए हैं। सो रंग-रोगन व साफ-सफाई कर घरों को सुंदर बनाने की कवायद लोगों ने जोर-शोर से शुरू कर दी है। पेंट, डिस्टेंपर आदि की कीमतों में भी पिछले साल की तुलना में कोई उछाल नहीं आया है। स्टेशन रोड में पेंट का व्यवसाय करने वाले संदीप अग्रवाल ने बताया कि गत दो वर्ष से इन सामानों के भाव में कोई इजाफा नहीं हुआ है। जो भी अंतर है वो ब्रांड के नाम को लेकर है। बाजार में एनामिल पेंट 210 से 250 रुपये व प्लास्टिक पेंट 400-450 रुपए प्रति लीटर विभिन्न ब्रांडों में उपलब्ध हैं। वहीं, मध्यम ब्रांडेड कंपनी में डेढ़ से दो सौ रुपये तक में भी यह उपलब्ध है। सेम 350 से 550 रुपए की रेंज में एक बोरी (25 किग्रा.) बेची जा रही है।

कारोबारियों के लिए दिवाली खास

दिवाली का त्योहार चूना, पेंट व डिस्टेंपर उद्योग के लिए खास है। व्यवसायियों ने इस बार दिवाली में 5 से 6 करोड़ रुपये तक का कारोबार पूरे जिले में होने का अनुमान लगाया है। इनके मुताबिक पहले लोग दशहरा से दिवाली के बीच ही घर का रंग-रोगन करवाते थे। लेकिन, अब ऐसा नहीं है। जब जी चाहा, घर को संवार लिया। बावजूद इसके दीप पर्व में डिमांड अधिक बढ़ जाती है।

मजदूरी में गत वर्ष से मामूली इजाफा

मजदूरी खर्च में इस बार गत वर्ष से मामूली इजाफा हुआ है। पांडेयपट्टी के रजनीकांत पांडेय, नया बाजार के सुशील सिन्हा व चरित्रवन के राहुल उपाध्याय बताते हैं कि पिछले साल के 350 सौ के मुकाबले इस बार पेंट मजदूर 400 से 550 रुपये दिहाड़ी मांग रहे हैं। आदर्श नगर के हेमन्त वर्मा व विराट नगर के देव प्रकाश कहते हैं कि दिवाली से पहले वे अपने घर का पेंट जल्द से जल्द करा लेना चाहते हैं। अन्यथा, पर्व के समीप आने पर मजदूर मिले न मिले। वैसे भी पर्व के समीप आने पर मजदूर अनाप-शनाप मजदूरी मांगने लगते हैं।

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