राम के लय में डूबी नगरी, सिय-पिय महोत्सव में बहने लगी भक्तिरस की धारा

बक्सर नया बाजार स्थित श्रीसीताराम विवाह महोत्सव स्थल पर आयोजित 52वां सिय-पिय मिलन महोत्सव के मौ

JagranWed, 01 Dec 2021 09:40 PM (IST)
राम के लय में डूबी नगरी, सिय-पिय महोत्सव में बहने लगी भक्तिरस की धारा

बक्सर : नया बाजार स्थित श्रीसीताराम विवाह महोत्सव स्थल पर आयोजित 52वां सिय-पिय मिलन महोत्सव के मौके पर देश के कोने-कोने से साधु-संतों एवं श्रद्धालु भक्तों का जमावड़ा लगना शुरू हो गया है। कोई हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल आदि से तो कोई मथुरा, वृंदावन, अयोध्या, काशी आदि धार्मिक स्थलों से कार्यक्रम में पहुंच अपने को धन्य मान रहे हैं।

प्रांत के नालंदा, पटना, जहानाबाद, गया, मुज्जफरपुर आदि से भी लोग पहुंचे हुए हैं। इस आनंदोत्सव की बेला में सिमडेगा (रांची) से तो 40 भक्तों का एक ग्रुप ही पहुंचा हुआ है। दमोह की कीर्तन मंडली एक दिन पूर्व ही पहुंच गई है। इस दौरान किसी ने अपने को साकेतवासी परम् पूज्य नारायणदास जी भक्तमाली उपाख्य नेहनिधि मामा जी का धर्म भाई तो किसी ने उनका परम् कृपा पात्र शिष्य बताया है। टाटा के सुरेंद्र कुमार झा कहते हैं कि इस बक्सर धाम की महिमा अपरिमेय है, यहां आने से सालभर की टानिक मिल जाती है। दूसरी ओर, जहां संत महानुभाओं के रज से महर्षि विश्वामित्र की यह धरती पावन हो रही है। वहीं, सीताराम विवाह महोत्सव स्थल पर बह रही भक्तिरस की धारा से पूरी विश्वामित्र नगरी राम के लय में गोते लगाते प्रतीत होने लगी है।

व्यासगद्दी की विधिवत पूजन और हुई आरती

श्री सीताराम विवाह महोत्सव आश्रम स्थल के महंत श्री राजाराम शरण दास जी महाराज के द्वारा बुधवार को व्यासगद्दी व श्री अवधधाम से पधारे कथाव्यास पूज्य श्रीमज्जगदगुरू रामानुजाचार्य स्वामी (डा.) श्री राघवाचार्य जी महाराज की विधिवत पूजन एवं आरती की गई। वहीं, आश्रम के संस्थापक सह संरक्षक साकेतवासी परम पूज्य नारायणदास जी भक्तमाली उपाख्य नेहनिधि मामा जी को स्मरण करते हुए कहा कि उन्हीं की कृपा से विगत 52 साल से यह आयोजन अनवरत जारी है। मौके पर प्रमुख कथा प्रवक्ता डा.राघवाचार्य जी ने अपने मुखार बिद से श्रीमद् बाल्मिकीय रामायण कथा का श्रोताओं को रसपान कराए।

मैया मोरी मैं नहीं माखन खायो..

सुबह में वृंदावन की विख्यात स्वामी फतेहकृष्ण के निर्देशन में आयोजित रासलीला कार्यक्रम में प्रभु झांकी दर्शन एवं गणेश वंदना के बाद रासलीला में माखन चोर लीला का मंचन किया जाता है। जिसमें दिखाया जाता है कि भगवान श्याम सुंदर गोपियों के यहां माखन चुराने जाते हैं। जहां गोपियों उन्हें पकड़ लेती हैं और मां यशोदा के पास लेकर आती हैं। जब गोपियां माखन चोरी किए जाने की शिकायत करती है तो मां यशोदा श्री कृष्ण से सवाल करती है कि क्या तूने माखन खाया? कृष्ण बड़े सहज भाव से उत्तर देते हैं-मैया मैं नहीं माखन खायो.। इस दृश्य को देख दर्शक भावुक हो जाते हैं और प्रभु वंदना, भक्ति संगीत बीच जयकारे से पूरा परिसर गूंजने लगता है। हिमाचल के यहां मां पार्वती का पुनर्जन्म

इधर, रात्रि में रामलीला कार्यक्रम के अन्तर्गत दिखाया जाता है कि सती जी के पिता दक्ष द्वारा यज्ञ का आयोजन किया जाता है और महादेव को निमंत्रण नहीं दिया गया है। इस बात की जानकारी होने पर सती जी बिना बुलाए वहां पहुंच जाती हैं और यज्ञ सभा में भोलेनाथ को निमंत्रण न मिलने की बात कहती हैं। दूसरी ओर, सती जी के इस मोह को देखकर भगवान शंकर द्वारा उन्हें त्याग दिया जाता है। मंचन प्रसंग में दिखाया जाता है कि यज्ञ के आयोजन में पहुंची सती जी अपने शरीर को पिता दक्ष के यज्ञ में योग द्वारा भस्म कर देती हैं। इसके उपरांत हिमाचल के यहां मां पार्वती के रूप में उनका पुनर्जन्म होता है और उनका विवाह शंकर जी के साथ होता है।

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