गंगा में शवों को बहाने से रोकने के लिए पेट्रोलिग शुरू

गंगा में शवों को बहाने से रोकने के लिए पेट्रोलिग शुरू

बक्सर बीते दिनों चौसा के महादेवा घाट के पास गंगा में दर्जनों शवों के मिलने बाद अब गंगा में श्

JagranFri, 14 May 2021 09:17 PM (IST)

बक्सर : बीते दिनों चौसा के महादेवा घाट के पास गंगा में दर्जनों शवों के मिलने बाद अब गंगा में शवों का बहना थमा है। बक्सर और पड़ोसी राज्य गाजीपुर का प्रशासन भी इसको लेकर हाई अलर्ट पर है। बक्सर में रिवर पेट्रोलिग शुरू कर दी गई है और गंगा तट पर बसे पंचायतों में भी लोगों को गंगा में शवों को बहाने पर सूचना देने के लिए जागरूक किया जा रहा है।

बक्सर में गंगा नदी में शव मिलने के बाद देश-विदेश की मीडिया ने सवाल उठाए थे। हालांकि, उसके बाद भी गंगा में बहते शवों का मिलना जारी रहा। अधिकांश शव यूपी की ओर से बहकर आ रहे थे। इस मामले में हाइकोर्ट ने भी स्वत: संज्ञान लिया है। इधर, जिलाधिकारी अमन समीर के निर्देश पर अनुमंडल पदाधिकारी केके उपाध्याय खुद गंगा की मॉनीटरिग कर रहे हैं। गंगा में बहते शवों को निकालकर उसे उचित सम्मान के साथ डिस्पोजल करने के भी निर्देश दिए गए हैं। गुरुवार को चार शवों को विभिन्न घाटों पर डिस्पोजल किया गया था। शुक्रवार को पेट्रोलिग के दौरान गंगा में शव नहीं दिखे। अनुमंडलाधिकारी ने बताया कि लोगों से अपील की गई है कि किसी भी हालत में गंगा में शवों का जल प्रवाह नहीं करें। चौसा श्मशान घाट पर भी पूरी व्यवस्था कर दी गई है। वहीं, श्मशान घाटों पर लकड़ी एवं अन्य सामग्रियों के रेट तय कर दिए गए हैं। तय रेट से ज्यादा कहीं कोई पैसे की मांग करता है तो प्रशासन से इसकी शिकायत कर सकते हैं।

नागरिक अधिकार मंच ने भेजा मानवाधिकार आयोग को पत्र

नागरिक अधिकार मंच के अध्यक्ष और आरटीआई कार्यकर्ता शिवप्रकाश राय ने गंगा में शव मिलने के मामले में मानवाधिकारी आयोग को पत्र लिखा है. उन्होंने कहा कि बक्सर में गंगा किनारे स्थित श्मशान घाट पर विद्युत शवदाह हेतु कोई व्यवस्था भी नहीं है. इसलिए भी गरीब तबके के लोग शवों को नदी में प्रवाहित कर देते हैं. यूपी के सीमावर्ती जिलों में भी यह प्रथा प्रचलित है.बक्सर जिला में महादेवा चौसा, कुतुबपुर बारा, दानी का कुटिया, कृतपुरा, मुक्तिधाम चरित्र वन बक्सर, उमर पुर, केशो पुर मानिकपुर, गंगौली डूभ से लेकर नैनीजोर तक

कोई श्मशान घाट नहीं है और गंगा किनारे स्थित किसानों के खेतों में ही शवदाह करना पड़ता है. अत: इन सभी जगहों पर शव-दाह हेतु सरकारी श्मशान घाटों का निर्माण कराना आवश्यक है।

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