बक्सर सिद्धनाथ आश्रम समेत देशभर में छह आश्रमों के पीठाधीश्वर थे नाथ बाबा

बक्सर सिद्धनाथ आश्रम समेत देशभर में छह आश्रमों के पीठाधीश्वर थे नाथ बाबा

बक्सर आदिनाथ संप्रदाय के प्रसार के लिए नाथ बाबा 57 साल पहले वर्ष 1964 में युवा साधु के रूप में

JagranSun, 18 Apr 2021 09:25 PM (IST)

बक्सर : आदिनाथ संप्रदाय के प्रसार के लिए नाथ बाबा 57 साल पहले वर्ष 1964 में युवा साधु के रूप में बक्सर आए थे। चरित्रवन में गंगा तट पर उन्होंने डेरा डाला और गहन तप किया। तीन साल में ही उनकी आभा और कृति दूर-दूर तक फैलने लगी और 1967 में कुटिया बना वहां धूनी रमाई। उनके नाम से ही चरित्रवन का यह गंगा तट नाथ बाबा घाट से मशहूर होने लगा। भक्तों की संख्या बढ़ती गई और वर्ष 1984 में यहां विशाल मंदिर की नीव पड़ी, जो 1987 में बनकर तैयार हुआ और नाथ बाबा मंदिर के नाम से प्रसिद्ध हुआ। यहां के अलावा नाथ बाबा हरिद्वार में श्री सिद्धलोक आश्रम, दिल्ली के शास्त्री नगर में श्रीशिव भैरवानाथ मंदिर, त्रयंकेश्वर में श्रीसिद्ध नवनाथ धाम आश्रम, उज्जैन में उखीमाता मंदिर और अलवर में श्रीगुरुदेवनाथ आश्रम के भी वे पीठाधीश्वर थे।

नाथ बाबा मंदिर में बाबा ने नर्मदा नदी से लाकर शिवलिग स्थापित की। जिन्हें चन्द्रमौलीश्वर महादेव के नाम से जाना जाता है। शिवलिग पर बालचन्द्र सुशोभित है। साथ ही यज्ञोपवीत की धवल रेखा भी स्पष्ट दिखाई देती है। इसके अलावा उन्होंने मंदिर में आदि शक्ति सिद्धेश्वरी मां दुर्गा, सप्ताश्वरथारुढ़ द्वादशादित्य, वीरबंक नाथ जी, बटुक भैरव नाथ, मकरवाहिनी श्री गंगा माता, आदिशेष नाग सहित नवनाथ चौरासी सिद्धमण्डल, भगवान सूर्य आदि के स्वरूप को स्थापित कराया। नाथ बाबा यहां जल में भासमान एक पत्थर लेकर आए, जिसे रामेश्वर सेतु का पत्थर कहा जाता है। मंदिर में तीन अखंड ज्योति पिछले 50 वर्षों से ज्यादा समय से जलती आ रही हैं। मंदिर में रूद्राक्ष के वृक्ष भी हैं। एक छोटी मगर समृद्ध गौशाला है। उनके परम शिष्य बसंत नाथ जी ने बताया कि मंदिर के मध्य में ''पंचमुखी महादेव'' नेपाल के पशुपति नाथ के बाद यहीं स्थापित है। भक्तों के अनुसार कुछ ही दिन पहले बातचीत के क्रम में उन्होंने अपनी उम्र 88 साल बताई थी। इसी महीने हरिद्वार के लिए रवाना होते समय ही उन्होंने भक्तों से देह त्यागने की अपनी इच्छा जाहिर की थी। शोक संवेदनाओं का तांता, केंद्रीय मंत्री ने जताया शोक नाथ बाबा के ब्रह्मलीन होने की सूचना बक्सर में मिलते ही शोक-संवेदनाओं का तांता लग गया। लोग मंदिर में पहुंचने लगे। केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने गहरी शोक संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि बक्सर और समस्त देश के लिए ये अत्यंत ही दु:ख की घड़ी है, सौम्य और सरल तथा सामाजिक सांस्कृतिक जीवन मूल्यों के प्रति संवेदनशील रहने वाले लोक कल्याणकारी संत नाथ बाबा का गोलोक वास हम सभी के लिए कष्टकारी है। विश्व हिदू परिषद के पूर्व प्रवक्ता डॉ.रामनाथ ओझा और रामेश्वरनाथ राय ने बक्सर के लिए इसे शोक की घड़ी बताया है। भाजपा नेता परशुराम चतुर्वेदी और कांग्रेस नेता टीएन चौबे ने कहा कि नाथ बाबा ने बक्सर में आध्याम की जो धारा प्रदान की, उसकी शीतलता युगो-युगों तक महसूस की जाएगी।

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