मकर संक्रांति का पर्व समाज में समरसता लाने का प्रतीक

आरा। वीर कुंवर ¨सह रामलीला मंच सह साकेत कला कुंज के प्रांगण में नगर इकाई जगदीशपुर के स्वयंसेवकों ने मकर संक्रांति पर्व मनाया। इस मौके पर नगर के स्वयंसेवकों ने अपने-अपने घरों से चूड़ा, दही, तिलवा, तिलकुट, गुड़ आदि लेकर उत्सव में पहुंचे थे। स्वयंसेवकों द्वारा लाई गई खाद्य सामाग्री को एकत्र किया गया। इसके बाद स्वयं सेवक कतारबद्ध होकर साकेत कला मंच पर ध्वज लगाए। इस मौके पर स्वयंसेवक ने  सूर्य नमस्कार किया। स्वयंसेवक अशोक चौरसिया ने मकर संक्रांति पर्व के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि मकर संक्रांति पर्व संघ द्वारा मनाए जाने वाले पर्व में से एक है। इस पर्व में ग्रामीण परिवेश के कृषि की नई उपज का अलग महत्व होता है। एक माह तक चला खरमास मकर संक्रांति के बाद समाप्त हो जाता है और नए कार्य का शुभारंभ किया जाता है। वही राजेन्द्र जी ने कहा कि मकर संक्रांति का पर्व समाज में समरसता लाने का प्रतीक है। मकर संक्रांति समाज में तिल की तरह बिखरी हुई शक्तियों को एकजुट करने और आपसी मनमुटाव भूलकर खिचड़ी की तरह एकरूप हो जाने का पर्व है। इसके बाद आरएसएस की प्रार्थना हुई। प्रार्थना के बाद स्वयंसेवक एकत्र होकर मंडल के आकार में बैठे और चूड़ा, दही, तिलकुट, तिलवा, गुड़ का स्वाद लिया। कार्यक्रम का संचालन लाल बाबू ने की। इस मौके पर नगर संयोजक पंकज कुमार, पूर्व संयोजक मोनु निराला, सूरज कुमार राठी, अमर चौबे, अमर चौरसिया, रंजन ¨सह, अखिलेश ¨सह पुतुल, अविनाश ¨सह, मिलन प्रमुख दीपक गुप्ता, लालसहब शिक्षक, रा¨जदर जी, आदित्य कुमार, शारदा नंद, टाइगर जी, सत्यदेव जी सहित अन्य शामिल थे।

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