बरमेश्वर मुखिया हत्याकांड में 10 लाख इनाम फिर भी नहीं मिला मुकाम

ठीक आज के ही दिन एक जून 2012 को रणवीर सेना के सुप्रीमो बरमेश्वर मुखिया की गोलियों से भून कर हत्या कर दी गई थी।

JagranMon, 31 May 2021 11:21 PM (IST)
बरमेश्वर मुखिया हत्याकांड में 10 लाख इनाम फिर भी नहीं मिला मुकाम

आरा : ठीक आज के ही दिन एक जून 2012 को रणवीर सेना के सुप्रीमो बरमेश्वर मुखिया की गोलियों से भून कर हत्या कर दी गई थी। हत्या के विरोध में बिहार में हुए आंदोलन पर सरकार ने पहले एसआइटी का गठन किया और सच सामने नहीं आने पर सीबीआई जांच का आदेश दिया था। इस चर्चित हत्याकांड की घटना के करीब नौ साल हो चुके हैं। लेकिन, अभी तक हत्या का मामला सीबीआई की जांच में उलझा हुआ है। जांच के करीब आठ साल बाद भी सीबीआइ किसी भी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है। स्वजनों का आरोप है कि मुखिया के कातिल सलाखों के पीछे होने के बजाए आजाद घूम रहे हैं। गौरतलब हो कि सीबीआई ने कातिलों का सुराग पाने के लिए तीन-तीन बार 10 लाख रुपये इनाम देने की घोषणा भी की है। सात साल के अंदर लगातार छह बार इनाम के पोस्टर भी चस्पाए जा चुके हैं। लेकिन, उपलब्धि शून्य है। दस लाख रुपये के इनाम की राशि भी सीबीआई को मुकाम तक नहीं पहुंचा सकी है।

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घर के बाहर टहलने के दौरान मारी गई थी गोली

पवना थाना क्षेत्र के खोपीरा गांव निवासी स्व. बरमेश्वर मुखिया का आवास कतीरा, स्टेशन रोड में अवस्थित है। एक जून 2012 को मुखिया अपने आवास की गली में ही टहल रहे थे। उसी दौरान गोली मारकर उनकी हत्या कर दी गई थी। घटना को लेकर आरा, पटना, औरंगाबाद, जहानाबाद एवं गया जिला समेत अन्य जगहों पर उपद्रव हुआ था। मुखिया के बेटे इंदुभूषण सिंह ने आरा के नवादा थाना में अज्ञात के विरुद्ध केस दर्ज कराई थी।

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तत्कालीन डीजीपी ने एसआईटी का किया था गठन

इसके बाद तत्कालीन डीजीपी अभयानंद ने कांड का पर्दाफाश करने के लिए एसआईटी का गठन किया था । पुलिस ने मुखिया की हत्या को स्कूल प्रबंधक से रंगदारी मांगे जाने एवं विरोध करने पर हत्या के लिए षड्यंत्र रचे जाने की बात बताकर आठ आरोपियों के विरूद्ध कोर्ट में चार्जशीट दाखिल किया था। उस दौरान पुलिस व एसआईटी ने एक-दो माननीय से भी इस मामले में पूछताछ की थी। सीबीआई ने जुलाई 2013 से कांड का अनुसंधान शुरू किया था।

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पहले तीन बिदुओं पर हुई थी जांच

सीबीआई ने अनुसंधान के दौरान तीन बिदुओं पर जांच-पड़ताल की थी। जिसमें हथियार संबंधी विवाद, संगठन के अंदर वर्चस्व से लेकर भाकपा-माले से चली आ रही प्रतिशोध की लड़ाई से जोड़कर जांच-पड़ताल की गई थी। साथ ही पूर्व में संगठन के अंदर हुई हत्याओं को भी आधार मान तफ्तीश चली थी। पूछताछ के लिए कुछ लोगों को सीबीआई ने तरारी से पटना भी बुलाया था। साल 2019 में सीबीआई चार संदिग्धों का आपराधिक इतिहास भी यहां से ले गई थी।

अभी तक कातिलों का नहीं पकड़ा जाना दुर्भाग्यपूर्ण: इंदुभूषण

अखिल भारतीय राष्ट्रवादी किसान संगठन के अध्यक्ष एवं स्व. बरमेश्वर मुखिया के पुत्र इंदु भूषण सिंह ने अपने पिता की हत्या की जांच में अभी तक कोई निष्कर्ष नहीं निकलने पर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि कई आईओ आए और बदल भी गए। लेकिन, अभी तक स्थिति ज्यों की त्यों है। वे और पूरा समाज न्याय की प्रतीक्षा में है। उनके अनुसार घटना के नौ साल हो गए है। सीबीआई करीब आठ साल से उनके पिता की हत्या की जांच कर रही हैं। लेकिन, अभी तक न तो अपराधी पकड़े जा सके और न ही साजिशकर्ता ही। उन्होंने बिना किसी दबाव में आकर जल्द से जल्द जांच पूरी कर दोषियों को गिरफ्तार करने की मांग की है।

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