विश्व वन्यप्राणी दिवस : हम चले अपने देस, फिर लौटेंगे परदेस

नागी पक्षी आश्रयणी को बिहार का पहला पक्षी महोत्सव का गवाह बना।

विश्व वन्यप्राणी दिवस जमुई के नागी-नकटी से पूरे देश में गूंजता है पक्षियों का कलरव। नागी के तट पर दिखे थे दो दुर्लभ प्रजातियों के पक्षी। हाल में यहां राज्‍य स्‍तरीय पक्षी महोत्‍सव का आयोजन हुआ था। खुद सीएम नीतीश कुमार यहां आए हुए थे।

Dilip Kumar shuklaWed, 03 Mar 2021 11:32 AM (IST)

जमुई [अरविंद कुमार सिंह]। गर्मी के दस्तक देते ही जमुई के नागी-नकटी पक्षी आश्रयणी से प्रवासी पक्षियों की विदाई शुरू हो गई है। अब ये पक्षी शरद ऋतु में लौटेंगे।  नागी-नकटी पक्षी आश्रयणी में विदेशी पक्षियों का थम जाएगा। हालांकि देसी पक्षी यहां मौजूद रहेंगे। 

नागी पक्षी आश्रयणी को बिहार का पहला पक्षी महोत्सव का गवाह बनने का भी गौरव प्राप्त है। हाल ही में यहां राज्यस्तरीय पक्षी महोत्सव हुआ था। अब पक्षियों के संरक्षण व संवर्धन के लिए यहां वन विभाग द्वारा लागतार स्थानीय लोगों को जागरुक किया जा रहा है, उन्हें पक्षी प्रेम का पाठ भी पढ़ाया जा रहा है। यहां डेढ़ सौ प्रकार के विदेशी और देसी पक्षियों का आश्रय है। राजकीय पक्षी महोत्सव पर जुटे पक्षी विज्ञानियों ने दो और दुर्लभ प्रजाति की पक्षियों के विचरण को कैमरे में कैद किया है। राजहंस पक्षी भी यहां काफी संख्या में हैं। मुंबई नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी की नीता शाह तथा बीएनएसएस के समन्वयक पक्षी विशेषज्ञ अरविंद मिश्रा ने इस संबंध में कई जानकारी दी। उन्होंने कहा कि 21 वर्षों बाद नागी के तट पर इंडियन कोर्सर देखा गया जबकि यूरेशियन ब्रेनिक भी हिंदुस्तान की धरती पर लंबे अंतराल के बाद दिखी। जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया बिहार के उपनिदेशक गोपाल कुमार कहते हैं कि राजगीर के बाद नागी में भी शेड क्रूज की उपस्थिति पाई जा रही है।

नागी पक्षी आश्रयणी को प्रथम राजकीय पक्षी महोत्सव का आयोजक बनने का गौरव इसी साल हासिल हुआ। 15 से 17 जनवरी तक आयोजित तीन दिवसीय पक्षी महोत्सव में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार तथा उपमुख्यमंत्री सहित देशभर के जाने-माने पक्षी विज्ञानियों की उपस्थिति क्षेत्र के लिए यादगार लम्हा बन गई।

जागृत किया जा रहा पक्षी प्रेम 

नागी-नकटी पक्षी आश्रयणी के आसपास के गांवों में 30 सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है। पक्षियों की सुरक्षा को लेकर राजहंस समूह अध्यक्ष गणेश यादव के नेतृत्व में क्रियाशील है। पक्षियों का शिकार नहीं करने के लिए लोगों को प्रेरित किया जा रहा है। पेड़ लगाने के लिए भी लोगों को कहा जा रहा है। नागी-नकटी जलाशय से मछली निकालने पर भी पाबंदी है। 

इन पक्षियों का होता है आगमन

प्रवासी पक्षियों का सीजन जाड़े के मौसम में होता है। बारहेडेड गीज, फालकोटेड डक, व्हाइट थ्रॉटेड किंगफिशर आदि कई प्रजातियों के विदेशी पक्षियों के कलरव से नागी-नकटी गुलजार होता रहा है।  

मुंबई नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी, मुंबई की नीता शाह ने बताया कि जलवायु परिवर्तन का असर पशु-पक्षियों के जीवन पर भी पड़ता है, इसलिए हमें पर्यावरण संरक्षण के लिए आम नागरिकों को जागृत करना होगा। नागी-नकटी पक्षी आश्रयणी जमुई ही नहीं, बिहार और देश के लिए गौरव है।

 

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