AMAZING! जीते जी गांव वालों के लिए देवता बन गए विजय, इसकी उपलब्धी जान कर आप भी कह उठेंगे वाह... वाह...

पर्यावरण संरक्षण के लिए काम कर रहे सुपौल के विजय कुमार सिंह आम लोगों के बीज आज काफी लोकप्रिय हैं

पर्यावरण संरक्षण के लिए काम कर रहे सुपौल के विजय कुमार सिंह आम लोगों के बीज आज काफी लोकप्रिय हैं। उनके सम्‍मान में गांव के लोगों ने एक रोड का नाम उनकी नाम पर विजय पथ रखा है।

Abhishek KumarWed, 17 Mar 2021 04:17 PM (IST)

संवाद सूत्र, सरायगढ (सुपौल)। पर्यावरण सुरक्षा के लिए हरियाली कायम रहे इसके लिए 14 वर्षोंं से सरायगढ़ भपटियाही प्रखंड क्षेत्र के समाजसेवी विजय कुमार सिंंह हनिष्ठा से काम कर रहे हैं। इन्होंने 2006 में पौधारोपण का बीड़ा उठाया था। एक तरफ सरकार द्वारा चलाया जा रहा पौधारोपण अभियान तो दूसरी इनका जगह-जगह घूमकर पौधे लगाना चर्चा में आया था। उसी समय से इन्होंने अपने दैनिक जीवन में पौधारोपण को शामिल कर लिया। अभी तक ये पांच हजार से अधिक पौधे लगा चुके हैं जो विभिन्न जगहों पर उदाहरण के रूप में मौजूद हैं। पिपरा खुर्द से नारायणपुर जाने वाली एक सड़क में इन्होंने इतने अधिक पौधे लगाए कि ग्रामीणों ने उसका नाम ही विजय पथ ही रख दिया।

सामाजिक कार्यों में है अभिरुचि

खासकर सरकारी जमीन और सड़क के किनारे पौधारोपण कर वे लोगों को जागरूक करते रहे हैं। इन्होंने नूतन वर्ष में अपने इस अभियान को और आगे बढ़ाने का संकल्प कर रखा है। नारायणपुर गांव निवासी विजय कुमार सिंह आगे बढ़ाने के लिए कई कार्य करते हैं उसमें सबसे अधिक महत्वपूर्ण कार्य पौधारोपण को मानते हैं। जहां गए वहीं लगे हाथ एक पौधा लगा देना उनकी नियति बन चुकी है। किसी के घर के आगे की जगह हो या फिर सड़क का किनारा यदि वहां पौधे नजर नहीं आए तो वे वहां पौधे लगा देते हैं। इसी कारण उनका नाम लोग पौधे लगाने वाला विजय भी बोलते हैं। अब तक उन्होंने प्रखंड क्षेत्र की कई जगहों पर पौधारोपण किया है। किसी कार्यक्रम में जाने पर भी वे पहले पौधे लगाने की बात करते हैं जिससे लोगों को प्रेरणा मिलती है।

रोजाना लगाना चाहिए कम से कम एक पौधा

वे बताते हैं कि शुद्ध वातावरण कायम रखने के लिए धरती हरी चादर से ढकी रहे यह बात लोग समझें और उस दिशा में आगे बढ़ें यही उनका प्रयास है। उन्होंने कहा कि विद्यालय के छात्र-छात्राओं या फिर सरकारी सेवक सभी को प्रतिदिन एक पौधे अवश्य लगाना चाहिए। यदि ऐसा हुआ तो पर्यावरण को कभी खतरा नहीं हो सकता। भारत-नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्र कोसी नदी के तट पर बसे सरायगढ़ भपटियाही प्रखंड क्षेत्र में कई ऐसे जगह है जहां पौधारोपण के लिए उनका नाम जाना जाता है। बताया कि इस साल वे और अधिक पौधे लगाकर अपने अभियान को आगे बढ़ाएंगे।

 

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