खगडिय़ा में इस साल बाढ़ बहा ले गई 57 सड़कें और 11 पुलिया, जानिए सबसे अधिक कहां हुआ है नुकसान

बाढ़ से खगडिय़ा में भारी तबाही हुई है। यहां पर 57 सड़कें और 11 पुलिया बाढ़ में बह गई। चौथम बेलदौर से लेकर सुदूर परबत्ता के माधवपुर की सड़कें बाढ़ में बह गईं। इससे लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।

Abhishek KumarThu, 16 Sep 2021 04:27 PM (IST)
बाढ़ से खगडिय़ा में भारी तबाही हुई है। सांकेतिक तस्‍वीर।

जागरण संवाददाता, खगडिय़ा। जुलाई- अगस्त की विनाशकारी बाढ़ में जिले में एक दो नहीं कुल 57 सड़कें क्षतिग्रस्त हो गईं। बाढ़ से आरडब्ल्यूडी की 52 एवं आरसीडी की पांच सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं। चौथम, बेलदौर से लेकर सुदूर परबत्ता के माधवपुर की सड़कें बाढ़ में बह गईं। कई गांवों के लोग अब आवागमन का संकट झेलने को विवश हो रहे हैं। अभी दिसंबर तक प्रशासन पंचायत चुनाव में व्यस्त रहेगा। ऐसे में मरम्मत-निर्माण का कार्य तत्काल प्रभावित होने की उम्मीद है।

चौथम प्रखंड में निर्माणाधीन नवादा घाट-धमारा घाट सड़क इस बाढ़ में ठुठ्ठी-धमारा के बीच दो जगहों पर क्षतिग्रस्त हो गई। गोगरी प्रखंड में रामपुर-कटघरा सड़क भुडिय़ा के पास बाढ़ में बह गई। यह सड़क दियारा जाने का मुख्य मार्ग है। गोगरी पंचायत में भी एक ग्रामीण सड़क बाढ़ में टूट गई।

सर्वाधिक तबाही गंगा की बाढ़ ने मचाई। सबसे अधिक प्रभाव परबत्ता प्रखंड में पड़ा। यहां बाढ़ से कई सड़कें टूट गई हैं। गंगा की बाढ़ से सर्वाधिक प्रभावित माधवपुर पंचायत की मुख्य सड़क खाई में तब्दील हो चुकी है। यह पैदल चलने लायक नहीं है। यहां मुख्य सड़क समेत वार्ड नंबर-एक, चार, नौ, वार्ड नंबर- 13 की पीसीसी सड़क क्षतिग्रस्त हुई है। निवर्तमान मुखिया के अनुसार कुल 50 लाख का नुकसान है। माधवपुर, सलारपुर, कोरचक्का, तेमथा करारी, विकास नगर में सर्वाधिक नुकसान हुआ है। कुल्हडिय़ा पंचायत की सलारपुर में तीन सड़कें बाढ़ में क्षतिग्रस्त हुई है। ग्रामीण टूटी सड़कों पर होकर चलने को विवश हैं। दुर्घटना की आशंका बनी रहती हैं।

डीएम आलोक रंजन घोष ने बताया कि आपदा कार्य चुनाव आचार संहिता से अलग है। सड़क निर्माण या मरम्मति कार्य विभागीय स्तर से होनी है। जहां तक संभव होगा बाढ़ में ध्वस्त, क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मति कार्य यथाशीघ्र कराए जाएंगे।

एक ओर जल जमाव, दूसरी ओर नहर का अस्तित्व मिटा

बेला नौवाद पंचायत की प्रसिद्धि तो दूर-दूर तक है। परंतु यहां समस्याएं भी कम नहीं है। अधिकांश लोगों की जीवकोपार्जन का मुख्य साधन कृषि और पशुपालन है। लेकिन जल जमाव के कारण कृषि कार्य को नुकसान पहुंच रहा है। कृषि योग्य भूमि में जल जमाव किसानों के लिए ङ्क्षचता का विषय है। बेला नौवाद गांव के पूरब से गुजरी बेलदौर प्रशाखा नहर अर्ध निर्मित पड़ा हुआ है। जिसके कारण ङ्क्षसचाई का संकट है और किसान पंपसेट से ङ्क्षसचाई को विवश बने हुए हैं। उक्त नहर नारदपुर धार तक बनी थी। परंतु, अतिक्रमणकारियों ने बालू कुंडली से लेकर नारदपुर तक तीन किलोमीटर में नहर को अतिक्रमित कर लिया है। जिससे नहर का अस्तित्व एक तरह से समाप्त हो गया है। दूसरी ओर बेला नौवाद के बीचो- बीच होकर गुजरी एनएच 107 आज दयनीय स्थिति में है। जबसे चौड़ीकरण का कार्य आरंभ हुआ है तबसे यह सड़क दयनीय दशा में पहुंच चुकी है। पंचायत में एक उप स्वास्थ्य केंद्र है। लेकिन इसका संचालन ठीक से नहीं हो रहा है। पंचायतवासी ग्रामीण चिकित्सक के भरोसे रहते हैं।  

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