बिहार की ये कोर्ट सुनाती है आन द स्पाट फैसला, दुष्कर्म के मामले में Fastest Trial और फांसी जैसे ऐतिहासिक निर्णय, पढ़ें एक दिन में दिया गया जजमेंट

एक दिन में गवाही बहस सहित कानून की कई प्रक्रिया पूरी कर अंतिम सांस तक जेल में रहने का फैसला सुनाना हो या जब तक मौत न हो जाए तब तक लटकाए रखने का ऐतिहासिक फरमान। बिहार में एक ऐसी अदालत भी है जो आन द स्पाट फैसले सुनाती है।

Shivam BajpaiSat, 27 Nov 2021 11:49 AM (IST)
तारीख पे तारीख नहीं, यहां सुनाए गए कई ऐतिहासिक फैसले।

संवाद सूत्र, अररिया:  'तारीख पे तारीख.. तारीख पे तारीख…तारीख पे तारीख और तारीख पे तारीख मिलती रही है…लेकिन इंसाफ नहीं मिला माई लॉर्ड, इंसाफ नहीं मिला…मिली है तो सिर्फ ये तारीख।' दामिनी फिल्म का ये डायलाग आज लोग उस समय याद कर ही लेते हैं, जब देश की लगभग सभी कोर्ट में आपराधिक मामलों की सुनवाई के बाद तारीख मुकर्रर की जाती है। मुकदमों के बोझ तले दबी अदालतों में लंबी सुनवाई होती है लेकिन बिहार के अररिया जिले के अदालत में तस्वीर बदली हुई नजर आती है। एक नहीं कई मामले इस बात की तस्दीक करते हैं।

अररिया की अदालत में अबोध बच्चियों के साथ यौन उत्पीड़न व दुष्कर्म जैसी घृणित घटनाओं में काफी संजीदगी से मामले का त्वरित निपटारा करते अपना ऐतिहासिक फैसला दे रहा है। ऐसे ही एक मामले में आठ वर्षीय एक बच्ची के साथ स्थानीय युवक द्वारा दुष्कर्म को अंजाम देने के मामले में अररिया के पाक्सो एक्ट के स्पेशल कोर्ट के स्पेशल जज शशिकांत राय की अदालत ने एक दिन में कानून की अनेक प्रक्रिया पूरी करते मामले को न्याय के अंतिम मुकाम पर ला दिया और दोषसिद्ध आरोपित दिलीप कुमार को अंतिम सांस तक का उम्र कैद की सजा का फैसला सुनाया।

इतना ही नहीं, एक अन्य मामले में उक्त कोर्ट ने त्वरित फैसला सुनाते अमर कुमार नामक दोषसिद्ध आरोपित को फांसी की सजा मुकर्रर करने के साथ-साथ पाक्सो एक्ट के झूठे मामले पर नकेल कसने को लेकर सूचक के खिलाफ मामले दर्ज करने का आदेश देते बिहार राज्य में एक इतिहास कायम कर दिया था।

- दुष्कर्म के आरोपित को दी गई है फांसी की सजा। -झूठे मामले पर नकेल कसने को लेकर उल्टे हो रहा है केस दर्ज

8 माह की बच्ची के साथ दुष्कर्म मामले में ऐतिहासिक फैसला

उक्त घटना 22 जुलाई, 2021 को नरपतगंज थाना क्षेत्र की है। नरपतगंज थाना क्षेत्र में दिलीप कुमार यादव नामक एक 30 वर्षीय युवक ने अपने ही गांव की एक आठ वर्षीय बच्ची के घर में दुष्कर्म का अंजाम दिया। उक्त आरोपित गांव के रिश्ते में पीडिता का भाई कहा जाता है। इस मामले में पीडिता की मां ने नरपतगंज थाना में दिनांक-23 जुलाई को कांड संख्या-349/21 दर्ज कराई थी।

इस मामले में अररिया की महिला एचएसओ रीता कुमारी, स्पेशल पीपी श्याम लाल यादव सहित पाक्सो एक्ट के स्पेशल कोर्ट की विशेष सक्रियता रही और एक दिन में कोर्ट ने मामले के पुलिस जांचकर्ता बनीं एचएसओ रीता कुमारी एवं दो चिकित्सक सहित कुल 11 गवाहों की गवाही कलमबंद किया। इससे पूर्व 23 जुलाई को दर्ज इस मामले में 20 सितंबर को पुलिस ने आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल कर दी। उधर कोर्ट ने अपनी सक्रियता से उसी दिन 20 सितंबर को दाखिल आरोपित के खिलाफ संग्यान भी ले लिया।

स्पेशल कोर्ट ने इस मामले में इंसाफ के अंतिम मुकाम पर लाने की तत्परता दिखाते 24 सितंबर, 21 को आरोप गठन कर दिया। तत्पश्चात इसके पाक्सो एक्ट के इस कोर्ट ने एक दिन मे गवाहों की गवाही व आरोप सिद्ध के साथ साथ दोषसिद्ध आरोपित दिलीप कुमार यादव को भादवि की धारा-376 ए तथा बी के तहत अंतिम सांस तक यानि जीवन भर जेल में रहने का ऐतिहसिक फैसला सुनाया है।

कोर्ट ने पचास हजार की जुर्माना राशि में 75 प्रतिशत की राशि सहित पीड़िता को विक्टिम कंपनसेशन फंड से दो लाख रुपए आर्थिक सहायता राशि देने को लेकर अररिया के डीएलएसए को निर्देश दिया है। जब कि इसी मामले में कोर्ट के निर्देश पर पीडिता को पूर्व में उक्त फंड से पांच लाख रुपए का अंतरिम सहायता राशि दिया जा चुका है।

ऐतिहासिक फैसला: तब तक फांसी पर लटाकाएं, जब तक मौत न हो जाए

अपनी नानी के साथ करीब दो साल पहले बिषहरी पूजा का मेला देखने गई एक नाबालिग छात्रा के साथ 5 अगस्त, 2019 में दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या कर दी गई थी। इस अतिसंवेदनशील मामले में अररिया के पाक्सो एक्ट के स्पेशल कोर्ट के विशेष न्यायाधीश शशिकांत राय की अदालत में अक्टूबर महीने में सजा की बिंदु पर सुनवाई पूरी की तथा उसी गांव के 21 वर्षीय अमर कुमार नामक एक युवक को जीवन समाप्त होने तक का फांसी की सजा मुकर्रर किया है। साथ ही कोर्ट ने पीडिता की मां को विक्टिम कंपनसेशन फंड से दस लाख रुपए आर्थिक सहायता राशि देने को लेकर अररिया के डीएलएसए को निर्देश दिया है।

स्पेशल कोर्ट ने सजा की बिंदु पर सुनवाई के बाद दोषसिद्ध आरोपित सिमराहा थाना क्षेत्र के मिर्जापुर छर्रापट्टी टोला निवासी किशनलाल दास के एक्कीस वर्षीय पुत्र अमर कुमार को साक्ष्य के आधार पर भादवि की धारा 376(डी) (बी), 302 तथा 201 सहित पाक्सो एक्ट की धारा-4 के तहत दोषी करार दिया तथा सजा की बिंदु पर सुनवाई के दौरान सिद्धदोष आरोपित अमर कुमार को भादवि की धारा -376 (डी) (बी) एवं धारा-302 के अंतर्गत उसे उसके जीवन समाप्त होने तक फांसी पर लटकाए जाने का फैसला सुनाया था। साथ ही उक्त आरोपित को भादवि की धारा-201 में तीन वर्षो का सश्रम कैद व तीन हजार रुपये जुर्माना भरने का आदेश दिया और जुर्माना नही देने पर दस दिनों का अतिरिक्त साधारण कैद की सजा भी मुकर्रर किया।

कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया की आरोपित को पोक्सो एक्ट की धारा-4 के प्रकाश में उसे केवल दोषसिद्ध करार दिया और उसे भादवि की धारा-376 (डी) (बी) में दंडित होने के कारण बडे दंड से उक्त आरोपित सुसज्जित है।

यह घटना दिनांक-05 अगस्त की रात्रि दस बजे से 06 अगस्त, 2019 के बीच पीडिता सूचक बनी अपनी नानी के साथ गांव में नागपंचमी के उपलक्ष्य में लगे बिषहरी स्थान पर पूजा स्थल पर लगे मेला देखने गई थी। काफी खोजबीन के बाद 06अगस्त को प्राप्त सूचना पर पीड़िता का शव बिषहरी स्थान के समीप सडक किनारे पाया गया।

पोक्सो एक्ट मामले पर है काफी संजीदगी: उधर, अररिया के पाक्सो एक्ट के स्पेशल कोर्ट इस तरह के मामलो मे काफी संजीदगी से मामले का त्वरित निपटारा करते हुए जहां अब तक कई ऐतिहासिक फैसले देते हुये बिहार में अपना इतिहास रच दिया है। वहीं ऐसे मामलों को हथियार बनाकर झूठे मुकदमें करने वालों पर नकेल कसते हुए मामले के सूचक/सूचिका के खिलाफ उल्टे केस करने का आदेश भी पारित कर झूठे मामले को लगाम लगाने में भी तत्पर है।

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