आयुष्‍मान योजना का खेल निराला, जमुई के आदिवासियों को नहीं मिल रहा लाभ, 143 गांवों में नहीं बना एक भी कार्ड

आयुष्‍मान योजना को लेकर प्रशासन के भले लाख दावे हो पर सच्‍चाई इससे इतर है। जमुई के आदिवासियों को इस योजना का लाभ नहीं मिल रहा है। ऐसे एक या दो गांव नहीं हैं जमुई के 143 गांव ऐसे हैं जहां एक भी कार्ड नहींबना है।

Abhishek KumarSat, 18 Sep 2021 04:18 PM (IST)
जमुई के 143 गांव ऐसे हैं जहां एक भी कार्ड नहींबना है।

जमुई [आशीष सिंह चिंटू]। जिले के अनुसूचित जनजाति के 143 गांव आयुष्मान भारत योजना से आच्छादित नहीं हो सके हैं। यह स्थिति योजना के लागू होने के लगभग तीन साल पूरे होने के बाद भी है। इन गांवों के एक भी परिवार के पात्र सदस्य का गोल्डन कार्ड नहीं बना है। अधिसंख्य वंचित गांव जंगली क्षेत्र में है। यहां अनुसूचित जनजाति के लोग निवास करते हैं। इसे आप व्यवस्थागत खामी कहें या फिर संचार तंत्र से उन गांवों को दूर होना, वजह जो भी हो लेकिन सरकार के दीर्घायु मंत्र से ये वंचित हैं। गरीबों को स्वास्थ्य सुरक्षा के उद्देश्य से पांच लाख तक की इलाज की सुविधा का प्रयास यहां नहीं पहुंच पा रहा है। यह राज्य द्वारा जारी आयुष्मान भारत के अद्यतन आंकड़े हैं।

-आयुष्मान योजना से इन गांवों के परिवार नहीं हो रहे दीर्घायु

-इन गांवों के लोगों का अब तक नहीं जुड़ सका है आयुष्मान भारत से तार

-जिले के 143 गांव के एक भी पात्र परिवार का नहीं बना आयुष्मान कार्ड

-अतिकतर गांव जंगली क्षेत्र में अवस्थित

चकाई में वंचित गांवों की संख्या सबसे अधिक

जिले में चकाई प्रखंड में सबसे अधिक गांव आयुष्मान भारत योजना से वंचित हैं। चकाई में 102 गांवों में इसका लाभ नहीं पहुंचा है। इन गांवों में कई सुदूर जंगली क्षेत्र में अवस्थित है। कई राज्य के बार्डर एरिया में हैं। चकाई के बोंगी पंचायत के टोला पहाड़ के सोनिया किस्कू, सुनील हेंब्रम, संजु हेंब्रम, बरमोरिया पंचायत के गोसवारा गांव के रंजीत हांसदा, मंगल सोरेन आदि ने बताया कि गांव के अधिकांश लोगों को इस योजना के बारे जानकारी नहीं है। यहां के लोग पैसा के अभाव में गंभीर बीमारी का इलाज बढिय़ा ढंग से नहीं करवा पाते हैं। ऐसे ही स्थिति चकाई प्रखंड के सुदूर पंचायत अंतर्गत गांव दुलमपुर, फरियत्ताडीह, गजही, घूटवे, नौउडीह, पेथरपहड़ी, झाझा प्रखंड के बाराकोला, बरवा, सोनो के रजौन, थम्मन, दहियारी, बरहट प्रखंड के बेलाटांड, भोरभंडारी आदि की बताई जाती है।

संचार और सुरक्षा बना बाधक

इन गांवों में गोल्डन कार्ड पहुंचने में सुरक्षा व संचार माध्यम बाधक बना है। सुदूर जंगली क्षेत्रों में अवस्थित अधिकांश गांव में इंटरनेट की समस्या है। कई गांवों में मोबाइल फोन की कनेक्टिविटी भी नहीं है। इसके साथ ही नक्सल प्रभावित व आवागमन की समस्या के कारण कई गांवों में बाहरी लोग जाने से परहेज करते हैं। पगडंडियों के सहारे ही कई गांव के लोग आज भी आवागमन करते हैं।

वसुधा केंद्र, सीएससी पर नि:शुल्क कार्ड बनाना का निर्देश दिया गया है। इसके अलावा माइक्रो प्लान बनाया जा रहा है। शिविर आयोजित कर पात्र परिवार का कार्ड बनाया जाएगा। इसके लिए प्रखंड प्रशासन से सहयोग मांगी जाएगी। -प्रणय कुमार, जिला कार्यक्रम समन्वयक, आयुष्मान भारत कार्यक्रम, जमुई।

आयुष्मान कार्ड से वंचित गांव की संख्या प्रखंडवार

प्रखंड ------गांव की संख्या

बरहट------5

चकाई-----102

झाझा-----10

खैरा-------1

सोनो------25

 

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