महाभारत काल में अज्ञातवास के दौरान माता कुंती के साथ पांडवों ने की थी भगवान सुंदरनाथ की आराधना

अब बहुरेंगे अररिया के सुंदरनाथ धाम के दिन। प्रधानमंत्री के 87 शिवालयों में सुंदरनाथ भी था शामिल। पांच नवंबर के प्रधानमंत्री के सीधा संवाद से लोगों में जगी इसके विकास की आशा डिप्टी सीएम ने भी दिया इसके विकास का भरोसा।

Dilip Kumar ShuklaTue, 23 Nov 2021 05:32 PM (IST)
बिहार के अररिया का प्रसिद्ध सुंदरनाथ धाम।

अररिया [अरूण झा]। अररिया के कुर्साकांटा प्रखंड के डुमरिया स्थित सुप्रसिद्ध धार्मिक स्थल सुंदरनाथ धाम के दिन अब बहुरेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के उन 87 शिवालयों का चयन किया था, जहां आदिगुरु शंकराचार्य आए थे। इनमें सुंदरनाथ धाम भी शामिल है। मंदिर न्यास समिति के अध्यक्ष सह सिकटी विधायक विजय कुमार मंडल के अनुसार इस मंदिर का गौरवशाली इतिहास रहा है। महाभारत काल में अज्ञातवास के दौरान पांडव पड़ोसी देश नेपाल के विराटनगर स्थित राजा विराट के यहां रहते थे। उस दौरान श्रीकृष्ण के कहने पर उन्होंने माता कुंती के साथ भगवान सुंदरनाथ की आराधना की थी।

सुंदरनाथ धाम में माता पार्वती के साथ भगवान शिव स्थापित हैं। पांच नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के केदारनाथ से लाइव प्रसारण के जरिए इस मंदिर से जुडऩा इस मंदिर के लिए ऐतिहासिक क्षण था। उस समारोह में सैकड़ों श्रद्धालुओं के साथ सूबे के डिप्टी सीएम तारकेश्वर प्रसाद मौजूद थे। उसमें उप मुख्यमंत्री ने इस धार्मिक स्थल को सजाने संवारनें का आश्वासन भी दिया। पीएम के सीधा संवाद तथा डिप्टी सीएम के आश्वासन से लोगों में इसके विकास व सूबे के पर्यटन स्थलों में शामिल होने की आशा बढ़ गई है।

जानकारी के अनुसार, 1930 ई. तक इस धर्मस्थल पर नागा बाबाओं का कब्जा था। स्थानीय श्रद्धालुओं ने उनसे इसे मुक्त कराया। पूर्णिया जिले के गढ़बनैली के राजा स्व. कुलानंद स‍िंह ने सन् 1935 ई. में यहां मौजूदा मंदिर का निर्माण कराया। फिर वर्ष 2005-06 से सिकटी विधायक विजय कुमार मंडल की अगुआई में 11 लोगों की समिति ने सार्वजनिक सहयोग से इस धर्मस्थल का निर्माण कार्य आरंभ कराया। अभी यह धर्मस्थल बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद, बिहार, पटना के अधीन है।

विधायक विजय कुमार मंडल पंजीकृत 'सुंदरी मठ न्यास समिति' के अध्यक्ष हैं। समिति सार्वजनिक सहयोग से मंदिर का विकास करा रही है। बीएडीपी योजना से इसका सौंदर्यीकरण कराया गया है। प्रतिवर्ष महाशिवरात्रि और सावन पूर्णिमा के अवसर पर यहां लगने वाले 15 दिवसीय मेले में आठ से 10 लाख लोग जलाभिषेक करते हैं। इस मंदिर में हर वर्ष सैकड़ों विवाह, एक लाख से अधिक मुंडन व अन्य शुभ संस्कार व अनुष्ठान होते हैं।

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