बागबानी से भागलपुर के किसानों की आमदनी होगी दोगुनी, 100 हेक्टेयर में आम और 10 हेक्टेयर में लगाए जाएंगे लीची के पौधे

बागवानी से भागलपुर के किसानों की आमदनी बढ़ेगी। इसके लिए सौ हेक्‍टेयर में इस बार आम के पौधे लगाए जाएंगे साथ ही 10 हेक्‍टेयर में लीची के भी पौधे लगाए जाएंगे। इसके लिए उद्यान विभाग की ओर से अनुदान भी दिया जा रहा है।

Abhishek KumarWed, 04 Aug 2021 02:11 PM (IST)
बागवानी से भागलपुर के किसानों की आमदनी बढ़ेगी।

 जासं, भागलपुर। जिले में आम व लीची के बागानों का दायरा बढ़ेगा। इसके लिए उद्यान विभाग किसानों को अनुदानित दर पर पौधे उपलब्ध कराए जा रहे हैं। पपीता, केला और अमरूद की भी सघन बागवानी होगी। किसान अधिकतम एक एकड़ और न्यूनतम 0.1 हेक्टेयर में पौधे लगा सकते हैं। इसके लिए तीन वर्षों तक अनुदान मिलेगा। पहले साल 60 फीसद, दूसरे और तीसरे साल 20-20 फीसद अनुदान मिलेगा। इस साल सौ हेक्टेयर में आम और दस हेक्टेयर में लीची के पौधे लगाए जाएंगे।

एक हेक्टेयर में लगेंगे चार सौ पौधे

सौ हेक्टेयर में आम के पौधे लगाने के लिए उद्यान विभाग की ओर से अनुदान दिया जाएगा। एक हेक्टेयर में चार सौ आम के पौधे लगेंगे। एक हेक्टेयर के लिए 50 हजार रुपये अनुदान मिलेगा। दस हेक्टेयर में लीची के पौधे लगेंगे। एक हेक्टेयर में 496 पौधे लगाए जाएंगे। इसके लिए भी 50 हजार का अनुदान मिलेगा। अमरूद के पौधे पांच हेक्टेयर में लगाए जाएंगे। एक हेक्टेयर में 1111 पौधे लगाए जाएंगे। इसके लिए भी 50 हजार रुपये का अनुदान मिलेगा। पहले साल 30 हजार रुपये और दूसरे और तीसरे साल दस-दस हजार रुपये मिलेंगे।

120 हेक्टेयर में केले की खेती

जिले में 120 हेक्टेयर में केले की खेती होगी। इसके लिए प्रति हेक्टेयर 62 हजार पांच सौ रुपये दिए जाएंगे। पहले साल 75 फीसद यानी 46 हजार 875 रुपये और अगले साल 15 हजार 625 रुपये किसानों को मिलेंगे। 50 हेक्टेयर में पपीते की खेती होगी। इसके लिए भी किसानों को अनुदान मिलेगा।

ग्लेडियोलस व लूज फ्लावर की भी होगी खेती

जिले में ग्लेडियोलस, लूज फ्लावर के साथ-साथ औषधीय व सुगंधित पौधे की भी खेती होगी। सौ हेक्टेयर में औषधीय व सुगंधित फूल की खेती होगी। दस हेक्टेयर में ग्लेडियोलस फूल की खेती होगी। 50 हेक्टेयर में लूज फ्लावर की खेती होगी। इसके लिए किसानों को उद्यान विभाग प्रोत्साहित करेगा। अनुदान भी देगा। जिले में गुलाब, जरबेरा, गेंदा, रजनीगंधा, ग्लेडियोलस व अन्य शोभाकारी पौधों की खेती की अपार संभावनाएं हैं। गुलदाउदी, कारनेशन, एंथुरियम, एस्टर एवं बेली चमेली को खेती भी जिले में हो सकती है। यहां की मिट्टी हर प्रकार के फूल के लिए अनुकूल है। सुगंधित पौधों में खस, सिट्रोनेला, लेमन ग्रास, पामारोजा जैसी फसलों की खेती होगी। औषधीय पौधों की खेती में अधिक-अधिक आमदनी और कम नुकसान होने के खतरे हैं। इन फसलों से विभिन्न अवधि में निरंतर आमदनी की जा सकती है।

एक एकड़ में होगी पाइन एपल की खेती

जिले में ट्रायल के तौर पर एक एकड़ में पाइन एपल की खेती होगी। यह खेती उद्यान विभाग की मदद से होगी। अगर ट्रायल सफल रहा तो अगले वर्ष से इसका रकबा बढ़ाया जाएगा। किशनगंज व पूर्णिया के इलाके में भारी पैमाने पर पाइन एपल की खेती होती है। इसको देखते हुए उद्यान विभाग में भागलपुर में भी इसकी खेती की योजना बनाई है।

फल रकवा

पाइन एप्पल एक हेक्टेयर

आम 100 हेक्टेयर

केला 120 हेक्टेयर

पपीता 50 हेक्टेयर

लीची 10 हेक्टेयर

अमरूद 05 हेक्टेयर

औषधीय व सुगंधित फूल सौ हेक्टेयर

ग्लेडियूलस 10 हेक्टेयर

लूज फ्लावर 50 हेक्टेयर

आम-लीची सहित अमरूद, पपीता व केला बागानों का दायरा बढ़ाया जाएगा। किसानों से आवेदन लिया जा रहा है। अधिकतम एक हेक्टेयर में किसान अनुदान पर पौधे लगा सकते हैं। -विकास कुमार, सहायक निदेशक उद्यान विभाग

 

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