उम्मीद ए होप ने बजाया बिहार का डंका, 21 मिनट की मूवी को राष्‍ट्रीय स्तर पर मिला दूसरा पुरस्कार

उम्मीद ए होप बिहार कृषि विश्‍वविद्यालय का देश में एक बार फ‍िर डंका बजा है। 21 मिनट के इस फि‍ल्‍म को राष्ट्रीय स्तर पर दूसरा पुरस्कार मिला। जनजातियों के विकास के लिए सराही गई विश्वविद्यालय की डाक्यूमेंट्री फिल्म उम्मीद।

Dilip Kumar ShuklaThu, 25 Nov 2021 11:49 PM (IST)
बिहार कृषि विश्‍वविद्यालय की 21 मिनट की फिल्म उम्मीद ए होप।

राज्य ब्यूरो, पटना। सबौर स्थित बिहार कृषि विश्वविद्यालय को एक और बड़ी सफलता हाथ लगी है। जनजातियों के विकास के लिए विश्वविद्यालय की डाक्यूमेंट्री फिल्म 'उम्मीद' ने देश भर में दूसरा पुरस्कार जीता है। फिल्म का चयन राष्ट्रीय पुरस्कार योजना में शामिल करने के लिए इसी महीने किया गया था। गुरुवार को राष्ट्रीय ग्रामीण और पंचायती राज संस्थान द्वारा आयोजित कार्यक्रम में इसे दूसरे पुरस्कार से नवाज गया। हालांकि, 'उम्मीद' को पहला पुरस्कार मिलने की आशा थी, लेकिन वह किसी दूसरे के खाते में चला गया।

राष्ट्रीय ग्रामीण और पंचायती राज संस्थान के निदेशक निदेशक नरेन्द्र ने गुरुवार को विश्वविद्यालय के प्रसार शिक्षा निदेशक डा. आरके सोहाने के नाम का यह पुरस्कार संस्था के प्रतिनिधि को दिया। उन्हें प्रमाण-पत्र के साथ 30 हजार रुपये दिए गए।

बिहार कृषि विश्वविद्यालय के प्रसार शिक्षा निदेशालय की राष्ट्रीय स्तर पर यह तीसरी बड़ी उपलब्धि है। इसके पहले केंद्र सरकार ने जन-केंद्रित ई-गवर्नेंस सेवाओं के लिए विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय पुरस्कार दिया था। यू-ट्यूब ने भी क्रियेटर अवार्ड दिया था। यह पुरस्कार उन कृषि आधारित फिल्मों के लिए था, जो यू-ट्यूब पर सवा दो करोड़ बार देखे गए।

इन्होंने इस फिल्म निर्माण में भूमिका

-प्रभारी पदाधिकारी मीडिया सेंटर, फिल्म शोधकर्ता - डा. एस पाटिल -सह निर्देशक -मनीष कुमार स‍िंह -स्क्रिप्ट - अभिजीत विश्वास व अमरेंद्र कुमार तिवारी -सिनेमेटोग्राफर - संदीप कुमार तिवारी -वीडियो संपादक - ब्रजेश कुमार तिवारी -आवाज - डा. टी चट्टोपाध्याय - ड्रोन आपरेटर - इंजीनियर शालिग्राम यादव - आडियो रेकार्डर - अनु व शालिग्राम

नई उपलब्धि भारतीय कृषि अनुसंधान संस्था की मदद से चल रही आदिवासी उप योजना को लेकर है। इस योजना के तहत विश्वविद्यालय ने अपने काम के आधार पर एक फिल्म बनाई। उसे गरीबों को दिखाया गया। इस योजना में आदिवासियों का कौशल विकास किया गया। उन्हें प्रशिक्षण दिया गया। साथ में पशु स्वास्थ्य शिविर का नियमित आयोजन किया गया।

योजना का उद्देश्य तकनीकी के हस्तक्षेप से आदिवासी समाज के लोगों के लिए जीविकोपार्जन के साधन को बढ़ाने के साथ उनकी पोषण सुरक्षा को बढ़ाना है। विश्वविद्यालय की उक्त डाक्यूमेंट्री अपने अभियान में सफल रही।

उल्लेखनीय है कि बिहार कृषि विश्वविद्यालय के प्रसार शिक्षा निदेशालय के तहत संचालित मीडिया सेंटर से किसानों को ई-गवर्नेंस के माध्यम से सेवा मिलती है। इसके तहत 20 कृषि विज्ञान केंद्रों से प्रतिदिन वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से सौ से अधिक किसान प्रशिक्षण लेते हैं। वे खेतों में चल रही कृषि गतिविधियों का सीधा प्रसारण देखते हैं।

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