गांधी के विचार हमेशा प्रासंगिक, पूरे देश में एक जैसा होगा गांधी विचार का सिलेबस Bhagalpur News

भागलपुर [माधबेंद्र]। अब पूरे देश में गांधी विचार विषय का पाठ्यक्रम एक जैसा होगा। भारतीय गांधी अध्ययन समिति की आम सभा में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया। समिति के 42वें राष्ट्रीय अधिवेशन के पहले दिन हुई सभा में महात्मा गांधी के विचार के प्रचार-प्रसार का मसला छाया रहा। कहा गया कि देश के करीब 25 विश्वविद्यालयों में गांधी विचार की पढ़ाई होती है। इसके लिए लिए केंद्रीय स्तर पर एक पाठ्यक्रम तैयार किया जाए। डॉ. वसंत के प्रस्ताव पर गांधी विचार विभाग के अध्यक्ष डॉ. विजय कुमार को इसकी जिम्मेदारी दी गई। इसके लिए जल्द ही गांधी विचार विभाग में देश के विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधियों की बैठक होगी। पाठ्यक्रम का स्वरूप तय करने के बाद विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) से इसकी अनुशंसा की जाएगी। इसके साथ ही देश भर चल रहे सौ से अधिक गांधी अध्ययन केंद्रों के लिए भी एक समान पाठ्यक्रम बनाने का निर्णय लिया गया।

देश के विभिन्न राज्यों से आए प्राध्यापक और विद्वतजन गांधी विचार के पठन-पाठन में इसी विषय से जुड़े छात्रों को प्राथमिकता देने पर एकमत दिखे। हाल के दिनों में गुजरात और मोतिहारी स्थित केंद्रीय विश्वविद्यालय के गांधी विचार विभाग में अन्य विषयों से जुड़े अभ्यर्थियों को असिस्टेंट प्रोफेसर बनाए जाने पर सवाल उठा। यह कहा गया कि नियम के मुताबिक असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति में अभ्यर्थी को संबंधित विषय से एमए में 50 फीसद अंक होना चाहिए। इसकी अनदेखी की जा रही है। गांधी अध्ययन समिति की अध्यक्ष डॉ. शीला राय और कार्यकारिणी सदस्य, गांधी विचार विभाग के अध्यक्ष डॉ. विजय कुमार, डॉ. उमेश प्रसाद नीरज, डॉ. अमित रंजन, बीएन मंडल विवि मधेपुरा के डॉ. सुधांशु रंजन और अन्य इस पर एकमत दिखे। सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि समिति राष्ट्रपति, कुलाधिपति, यूजीसी और राज्यों की सरकार और लोक सेवा आयोग को इसके लिए पत्र लिखेगी। यह अनुशंसा करेगी कि गांधी विचार से जुड़े असिस्टेंट प्रोफेसरों के लिए इसी विषय से बहाली सुनिश्चित की जाए। समिति ने कहा कि गांधी अध्ययन से जुड़े संस्थानों में गांधी विचार के छात्रों को प्राथमिकता दिए जाने की भी सरकार से अनुशंसा की जाएगी।

देशभर के शिक्षण संस्थानों में होंगे विविध कार्यक्रम

भारतीय गांधी अध्ययन समिति के कार्यकारिणी की विवि गेस्ट हाउस में बैठक जिसकी अध्यक्षता खुद समिति की अध्यक्ष डॉ. शीला राय ने की। बैठक में कई फैसले लिए गए। यह निर्णय लिया गया कि बा और बापू के 150 वीं जयंती वर्ष के मौके पर देशभर के शिक्षण संस्थानों में समिति के सहयोग से सेमिनार, कांफ्रेंस, वर्कशॉप, वाद विवाद, क्विज आदि कराया जाएगा। ताकि आज के युवा पीढ़ी भी गांधी के विचारों को अंगीकृत कर सकें। बैठक में समिति के मजबूती के लिए नए सदस्यों को भी जोडऩे पर बल दिया गया। बैठक में डॉ. दीपक कुमार दिनकर ने कहा कि यहां के कॉलेजों में भी गांधी विमर्श को बढ़ावा देने के लिए विविध कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसकी जल्द रूपरेखा तैयार की जाएगी। समिति के जर्नल के प्रकाशन पर भी चर्चा हुई। ई-जर्नल के लिए भी सहमति बनी। बैठक में महासचिव डॉ. एससी जेना, डॉ. सीपी शर्मा, संयुक्त सचिव डॉ. घनश्याम राय, विप्लब सिंह, डॉ. सतीश अग्रवाल, डॉ.मनोरंजन भारती सहित अन्य उपस्थित थे। वहीं, उद्घाटन के बाद दो तकनीकी सत्र का भी आयोजन हुआ। पहला सत्र गांधी विचार विभाग के स्वराज कक्ष में तथा दूसरा कॉमर्स विभाग में संचालित हुआ। धन्यवाद ज्ञापन प्रोफेसर रीता झा ने दिया।

पुरुष के मुकाबले ज्यादा श्रेष्ठ है महिला

बहुद्देशीय प्रशाल में मधुकर श्याम चतुर्वेदी व्याख्यानमाला हुआ। बीएचयू से आईं प्रोफेसर चंद्रकला पांड्या ने गांधी और स्त्री विमर्श पर अपने विचार रखते हुए कहा कि महात्मा गांधी ने स्त्री को पुरुषों के मुकाबले हमेशा श्रेष्ठ समझा। उनका मानना था कि शरीर की ताकत मायने नहीं रखती। नारी आध्यात्मिक और नैतिक स्तर पर ज्यादा श्रेष्ठ हैं। प्रोफेसर सतीश कुमार राय ने कहा कि गांधी ने राष्ट्रीय आंदोलन को जन आंदोलन और फिर इसका नारीकरण किया। संबंध भागलपुर की ओर से सफदर के बोल नाटक का मंचन हुआ। महिला सुरक्षा और शिक्षा पर कलाकारों शानदार प्रस्तुति दी। आज दूसरे दिन का अधिवेशन टीएनबी कॉलेज और एसएम कॉलेज में होगा। इसके पहले गांधी अध्ययन समिति के सदस्य और छात्र-छात्रएं जैन मंदिर भ्रमण करने जाएंगी।

घर से शुरू करें स्त्री का सम्मान : अधिवेशन को संबोधित करते हुए बीएन मंडल विश्वविद्यालय मधेपुरा के प्रतिकुलपति डॉ. फारूक अली ने कहा कि आज समाज भटकाव की राह पर है। स्त्री का सम्मान हमें अपने घरों से शुरू करने की जरूरत है।

गांधी के विचार हमेशा प्रासंगिक

अधिवेशन की मुख्य वक्ता पटना विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग की प्रोफेसर डॉ. शेफाली राय ने कहा कि गांधी एक महान संत थे। उनके विचार सभी कालों में प्रासंगिक हैं। गांधी एक प्रगतिशील विचारक थे। वे कहा करते थे कि मेरे में कोई वाद नहीं है। आज मैं जो कुछ कह रहा हूं , कल उसे बदल सकता हूं। उनका व्यक्तित्व करिश्माई था। उनका कहना था, बदलाव प्रकृति का नियम है। आज माडर्न युग है। काश! वे जीवित होते तो इस युग के लोगों को भी जीने का आधार देते। उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता कर रहीं भारतीय गांधी अध्ययन समिति की अध्यक्ष डॉ. शीला राय ने कहा कि अहिंसा गांधी का शस्त्र और सत्याग्रह उसको संचालित करने की तकनीक थी। देश के अंदर हर व्यक्ति में गांधी विद्यमान है। जरूरत सिर्फ उसको मुखर करने की है। नगर विधायक अजीत शर्मा ने कहा कि गांधी के विचार कभी मर नहीं सकते। टीएमबीयू के निदेशक छात्र कल्याण डॉ. योगेंद्र ने कहा कि गांधीजी जैसे अहिंसक व्यक्ति की हत्या इतिहास में एक अचंभित घटना थी। इससे पूर्व कार्यक्रम की शुरुआत पीजी संगीत विभाग की छात्रओं द्वारा कुलगीत की प्रस्तुति के साथ हुई। कला केंद्र की ओर से ऋषभ एवं ऋषि द्वारा सामूहिक रूप से बापू के प्रिय भजन रघुपति राघव, राजाराम की प्रस्तुति की गई। स्वागत गांधी विचार विभाग के अध्यक्ष प्रो. विजय कुमार ने किया।

गांधी के विचार सुख, शांति, स्वच्छता और समृद्धि के प्रतीक

गांधी के विचार सुख, शांति, स्वच्छता और समृद्धि के प्रतीक हैं। वे नई राह दिखाते हैं। तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (टीएमबीयू) के गांधी विचार विभाग की मेजबानी में तीन दिवसीय 42वें वार्षिक राष्ट्रीय अधिवेशन का शुभारंभ करते हुए मुख्य अतिथि सूबे के लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण मंत्री विनोद नारायण झा ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि गांधी ने अपने विचारों से जीवन के हर क्षेत्र को नियंत्रित किया था। नैतिक मूल्यों को हथियार बनाकर अंग्रेजों को पराजित किया था। उनके विचार सदैव प्रासंगिक रहेंगे। आज का समाज हिंसात्मक हो गया है। ईष्र्या और वैमनस्यता बढ़ रही है। गांधी के विचारों को अपनाकर ही मानवता का कल्याण संभव है।

सत्य-अहिंसा के मार्ग से ही कल्याण संभव

तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एके राय ने कहा कि गांधी ने दुनिया को सत्य एवं अहिंसा का रास्ता दिखाया है। इसी रास्ते पर चलकर देश-दुनिया का कल्याण हो सकता है। गांधी-दर्शन में ही आतंकवाद, पर्यावरण संकट, बेरोजगारी, विषमता, अनैतिकता आदि समस्याओं का समाधान है। उनके जीवन-दर्शन का विस्तृत फलक है। इसके हरेक आयाम को लेकर देश-दुनिया में प्रयोग चल रहे हैं। स्वच्छता अभियान, मेक इन इंडिया व स्किल डेवलपमेंट कार्यक्रम गांधी से ही प्रेरित हैं।

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