Supaul: कोरोना संक्रमण काल में नौनिहालों के निवाले वितरण में हो रही धांधली, कई वर्ष पूर्व बनी सूची के आधार पर दिखाया जा रहा टीएचआर वितरण

सुपौल में आंगनबाडी केंद्रों पर टीएचआर का सही से वितरण नहीं हो रहा है। कई साल पहले बनी सूची के आधार पर टीएचआर का वितरण किया जा रहा है। इससे हजारों बच्चे सरकार की योजनाओं से वंचित रह रहे हैं। लेकिन इस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

Abhishek KumarMon, 21 Jun 2021 04:46 PM (IST)
सुपौल में आंगनबाडी केंद्रों पर टीएचआर का सही से वितरण नहीं हो रहा है।

संवाद सूत्र, सरायगढ़(सुपौल)। बच्चों को कुपोषण से मुक्त रखने और स्कूल पूर्व शिक्षा देने के लिए भारत सरकार के बाल विकास परियोजना द्वारा संचालित आंगनबाड़ी केंद्र सिस्टम के लिए कामधेनु बनता जा रहा है। पिछले एक वर्ष के दौरान जब से कोरोना संक्रमण काल शुरू हुआ तो केंद्र पर नामांकित नौनिहाल, गर्भवती, धात्री के निवाले पर गिद्ध ²ष्टि पड़ गई है। हालत यह है कि पिछले कई वर्ष पूर्व सेविकाओं ने जो पंजी में लाभुकों का नाम अंकित किया वह आज भी चल रहा है। किन-किन लोगों को सूखा राशन दिया जाना है यह सब सेविकाओं के भरोसे छोड़ दिया गया है।

प्रखंड सहित सुपौल जिले के सभी 11 प्रखंड में तीन हजार से अधिक आंगनबाड़ी केंद्र है। प्रत्येक केंद्र पर 96 लाभुकों का नाम अंकित है जिसमें 40 वैसे बच्चे हैं जिसे स्कूल पूर्व शिक्षा दी जाती है। बाकी में किशोरी, धात्री, गर्भवती का नाम शामिल होता है। कोरोना संक्रमण काल से पहले स्कूल पूर्व शिक्षा के लिए नामांकित बच्चों को केंद्र पर दोपहर में पका-पकाया भोजन दिए जाने का प्रावधान था। फिर माह के एक दिन 15 या 30 तारीख को सूखा राशन वितरण होता था। कोरोना महामारी आने के बाद सरकार ने उस नियम में बदलाव कर दिया। स्कूल पूर्व शिक्षा के लिए बच्चों को रोक दिया गया और बच्चे घर पर रहने लगे। परियोजना के आदेश अनुसार सेविकाओं को घर-घर जाकर टीएच आर देना था। लेकिन इस आदेश में पर्यवेक्षिका और सेविका के आपसी सहमति से बार-बार बदलाव होता रहा। टीएचआर वितरण की जानकारी से लोग दूर रहे इसके लिए कभी केंद्र तो तब कभी घर-घर कुछ लोगों तक राशन पहुंचाया जाने लगा। बीच में निदेशक आईसीडीएस पटना के द्वारा प्रत्येक लाभुकों का ओटीपी लेने का आदेश दिया गया। जैसे ही ओटीपी लेने का आदेश मिला कि सेविकाओं की और चांदी कटने लगी। सेविकाओं द्वारा यह कहा गया कि अधिकांश लाभुकों का मोबाइल खराब रहा करता है। इस कारण सभी का ओटीपी देना संभव नहीं है। जबकि विभागीय आदेश था कि बगैर ओटीपी के लाभुकों को राशन नहीं मिलेगा और वह सारा राशन सेविका के पास जमा रहेगा।

टीएचआर वितरण के नाम पर की जा रही खानापूरी

कोरोना संक्रमण काल शुरू होते ही अधिकांश सेविकाओं द्वारा टीएचआर वितरण में धांधली की जा रही है। कुछ सेविका लाभुकों के घर जाकर सूखा राशन देती है तो कुछ केंद्र पर। यह राशन उन्हीं लोगों को दिया जाता है जो टीएचआर वितरण की जानकारी किसी न किसी रूप में हासिल कर लेते हैं। विभागीय स्तर से लाभुकों को कोई जानकारी नहीं दी जाती है। ऐसे में वास्तविक लाभुक बार-बार सूखा राशन लेने से दूर रह जा रहे हैं और उसके नाम पर राशन वितरण दिखा दिया जा रहा है।

टीएचआर वितरण के लिए नहीं रह गया कोई नियम

हालात यह है कि सूखा राशन वितरण किस केंद्र पर होगा और किस पर नहीं इसका कोई नियम नहीं रह गया है। सेविकाओं की जब मर्जी किसी को राशन दे दे और फिर जिसे नहीं मन हो उसका पंजी से नाम काट दे। नाम रहने पर भी उसे यह कहते हुए लौटा दे कि आपके बच्चे की उम्र 5 वर्ष से अधिक हो गई है। भले ही पंजी में वैसे बच्चे का नाम दर्ज कर अभी भी राशन का उठाव हो रहा हो। इस तरह के धांधली से ना तो प्रखंड परियोजना कार्यालय को कोई मतलब रह गया है और ना ही जिला कार्यालय को।

एक साथ निर्धारित नहीं होती सूखा राशन वितरण की तिथि

पिछले कई माह से परियोजना में सूखा राशन वितरण के लिए एक साथ तिथि का निर्धारण नहीं किया जाता है। आधे केंद्र पर एक तिथि को तो आधे केंद्र पर दूसरे माह के किसी तिथि को सूखा राशन की राशि दी जाती है जिसमें सेविका बेखौफ बनी रहती है। बगल के केंद्र पर राशन वितरण की राशि नहीं मिलने का फायदा भी सेविका उठा लेती है। प्रखंड क्षेत्र में 145 आंगनबाड़ी केंद्र है। परियोजना द्वारा वर्तमान में 18219 रुपये सूखा राशन वितरण के लिए दिया जाता है। लेकिन कभी पुराने केंद्र को तो कभी नए केंद्र को राशि आवंटित करने से लाभुक असमंजस में फंस चुके हैं। किस केंद्र पर कब सूखा राशन का वितरण होगा इसकी जानकारी परियोजना कार्यालय भी नहीं दिया करता है। पूछने पर सिर्फ इतना बताते हैं कि बैंक जिसे पैसा दे देगा वह सेविका अपनी सुविधा अनुसार सूखा राशन का वितरण कर सकती है।

बच्चों को नहीं मिल रहा दूध

आंगनबाड़ी केंद्रों पर नामांकित बच्चों को पिछले कई माह से दूध नहीं दिए जा रहे। दूध का आवंटन जिला कार्यालय से किया जाता है और जब वह आवंटित होता है तो कई दिनों तक प्रखंड कार्यालय में पड़ा रह जाता है। फिर उसका फायदा उठाकर सेविका भी दूध को अपने-अपने घरों पर रख लेती है। जिस दूध से बच्चे का कुपोषण दूर किया जाना है उस दूध से सेविकाओं के घर चाय बनती है।

कहती है पर्यवेक्षिका

पर्यवेक्षिका रंजू देवी तथा रेखा कुमारी आर्या का कहना है कि 12 पंचायत में फैले 145 आंगनबाड़ी केंद्र का दो लोगों के भरोसे निगरानी संभव नहीं है। विभागीय स्तर से नए पर्यवेक्षिका को नियुक्त नहीं किया जा रहा। ऊपर से अलग-अलग तिथि में सूखा राशन के लिए राशि का आवंटन होता है। ऐसे में सूखा राशन वितरण के दिन दो से चार केंद्र पर जाते जाते समय बीत जाता है। सूखा राशन का वितरण केंद्र पर होना है या घर-घर जाकर इसके बारे में कोई स्पष्ट आदेश नहीं मिला है। इसी कारण सेविका अपने अपने हिसाब से काम करती है और निरीक्षण के दौरान कोई केंद्र पर मिलती है तो कोई मिलती ही नहीं है।

-सूखा राशन वितरण के लिए जो राशि दी जाती है उससे प्रथम फेज में जितने केंद्रों तक राशि पहुंचती है वहां टीएचआर का वितरण कराया जाता है। एक साथ सभी केंद्रों के लिए राशि मिलने पर सूखा राशन वितरण कराने में आसानी होगी। लेकिन ऐसा नहीं हो पा रहा है। सूखा राशन का वितरण सेविकाओं को घर-घर जाकर करना है। राशन वितरण में जहां से गड़बड़ी की शिकायत मिलती है उसकी जांच कर कार्रवाई हो रही है। -अरङ्क्षवद कुमार, प्रभारी बाल विकास परियोजना पदाधिकारी

 

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