Supaul : बच्चों का निवाला हड़पने वाले इन हेडमास्टरों पर कार्रवाई तय... इस तरह विभाग वसूल करेगा पैसा

एमडीएम में राशि की अवैध निकासी करने वाले स्‍कूलों के हेडमास्‍टरों पर कार्रवाई तय है।

एमडीएम में राशि की अवैध निकासी करने वाले स्‍कूलों के हेडमास्‍टरों पर कार्रवाई तय है। इन शिक्षकों से राशि वसूली के लिए विभाग ने नोटिश जारी कर दिया है। तय समय के अंदर अगर राशि जमा नहीं की गई तो आगे केस दर्ज हो सकता है।

Abhishek KumarMon, 22 Mar 2021 04:36 PM (IST)

जागरण संवाददाता, सुपौल। सदर प्रखंड स्थित मदरसा नूरुल उलूम बेला सितुहर के प्रधान मौलवी द्वारा मध्याह्न भोजन योजना मद में गबन की गई करीब 15 लाख रुपये वसूली की दिशा में एक बार फिर विभाग सजग दिख रहा है। मामले को लेकर जिला शिक्षा पदाधिकारी सुरेंद्र कुमार ने दोषी प्रधान मौलवी मु. एनामुल्लाह को 24 घंटे के अंदर गबनित राशि को बिहार राज्य मध्याह्न भोजन योजना समिति सुपौल के खाते में जमा करने को कहा है। जिला शिक्षा पदाधिकारी ने चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि तय समय सीमा के अंदर उक्त राशि जमा नहीं की जाती है तो फिर इनके विरूद्ध कार्रवाई की जाएगी।

जारी पत्र में जिला शिक्षा पदाधिकारी ने कहा है कि मध्याह्न भोजन योजना के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी के पत्रांक 1718 दिनांक 9 दिसंबर 2019 को मध्याह्न भोजन योजना मद में गबनित 15 लाख 18 हजार 284 रुपये बैंक ड्राफ्ट के माध्यम से बिहार राज्य मध्याह्न भोजन योजना समिति सुपौल के खाते में जमा करने का निर्देश दिया गया था। निर्देश के बाद भी प्रधान मौलवी द्वारा यह राशि अब तक जमा नहीं की गई है। डीईओ ने स्मारित करते हुए पत्र प्राप्ति के 2 दिनों के अंदर राशि को योजना समिति के खाते में जमा करने को कहा है। अन्यथा की स्थिति में कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

क्या है मामला

मध्याह्न भोजन योजना के तत्कालीन डीपीओ के निर्देश पर 21 अक्टूबर 2019 को उक्त मदरसा का अनुश्रवण प्रखंड साधनसेवी मध्याह्न भोजन योजना सुपौल से करवाया गया था। अनुश्रवण के दौरान योजना मद में घोर अनियमितता पाई गई थी। जिसके बाद दोषी प्रधान से स्पष्टीकरण के साथ-साथ अभिलेख की छाया प्रति की मांग की गई थी। परंतु तय समय सीमा बीतने के बाद भी प्रधान द्वारा न ही स्पष्टीकरण का जवाब दिया गया और न ही किसी प्रकार का अभिलेख ही प्रस्तुत किया गया। अनुश्रवण में पाई गई अनियमितता के संबंध में पूछे गए स्पष्टीकरण का जवाब प्रधान द्वारा नहीं देने के बाद पुन: डीपीओ कार्यालय द्वारा स्मारित करते हुए स्पष्टीकरण का जवाब तथा पंजी और अभिलेख उपलब्ध कराने को कहा गया। बावजूद काफी समय बीतने के बाद भी प्रधान द्वारा इस संबंध में ना ही कोई जवाब दिया गया और ना ही अभिलेख प्रस्तुत किया गया।

पूर्व में भी राशि वसूली को ले दिया गया था निर्देश

डीपीओ द्वारा बार-बार स्पष्टीकरण पूछने के बाद भी प्रधान के द्वारा कोई जवाब दाखिल नहीं करने से क्षुब्ध योजना में अनियमितता संबंधी लगाए गए सभी आरोपों को सत्य करार करते हुए 9 अगस्त 2016 से अक्टूबर 2019 तक एमडीएम योजना के परिवर्तन मूल्य मद में 7 लाख 75 हजार 970 रुपया 75 पैसा, अंडा मौसमी फल मद में 73 हजार 134 रुपया तथा इस दौरान खाद्यान्न सामग्री के रूप में उपलब्ध कराए गए 18 हजार 578.45 किलोग्राम चावल जिनका मूल्य 06 लाख 69 हजार 179 रूपया 5 पैसे समेत कुल 15 लाख 18 हजार 284 रुपये के दुरुपयोग को गबन मानते हुए बिहार राज्य मध्याह्न भोजन योजना समिति सुपौल में ड्राफ्ट द्वारा एक सप्ताह के अंदर प्रधान को उपलब्ध कराने को कहा गया था। उस समय भी राशि जमा नहीं करने की स्थिति में उनके ऊपर विभागीय कार्यवाही किए जाने की बात कही गई थी। बावजूद अब तक राशि नहीं जमा की गई तो एक बार फिर जिला शिक्षा पदाधिकारी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए राशि जमा करने का निर्देश जारी किया है।

सवालों के घेरे में विभाग

इस पूरे मामले में शुरू से ही विभाग की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है। प्रधान द्वारा गबनित राशि को ले महज पत्राचार किया जा रहा है। अधिकारी जो सीमा तय करते हैं उसमें नतीजा सामने नहीं आने पर भी कोई कार्रवाई नहीं हो पाती है और फिर अगले पत्र का इंतजार होने लगता है।

 

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