खिलाड़ियों का संसार बनता जा रहा संसारपुर, खगड़िया के इस मैदान से निकले एथलीट गाड़ रहे सफलता के झंडे

बिहार के खगड़िया के संसारपुर में मानों खिलाड़ियों का संसार बसता हो। यहां सुबह से लेकर शाम तक गर्मी हो या ठंड बरसात हो या बसंत। खिलाड़ी अपनी प्रतिभा को निखार रहे हैं। यहां से कई खिलाड़ी निकले और...

Shivam BajpaiFri, 26 Nov 2021 03:41 PM (IST)
खिलाड़ियों के लिए संसारपुर की धरती बनी वरदान, वजह...

जागरण संवाददाता, खगड़िया: जिले में परिंदों में उड़ान भरने का काम पवन कुमार कर रहे हैं। दादा फिजिकल ग्रुप आज किसी परिचय का मोहताज नहीं है। संसारपुर खेल मैदान में सुबह की पहली किरण के साथ युवक-युवतियां रोजाना पसीना बहाने के लिए पवन कुमार के नेतृत्व में पहुंच जाते हैं। कड़कड़ाती धूप हो, बरसात हो या हड्डी गलाने वाली ठंड हो, संसारपुर के इस मैदान पर युवाओं का जोश देखते बनता है। इस टोली में दर्जनों युवाओं के साथ- साथ युवतियां भी कंधे से कंधा मिलाकर जब मैदान में दौड़ लगाने उतरती है, तो पैरों के थाप से मैदान गूंज उठता है।

पवन कुमार के द्वारा बीते एक वर्ष से खगड़िया व दूसरे जिले के विभिन्न भागों से आए युवक-युवतियों को प्रशिक्षण देने का काम किया जा रहा है। प्रशिक्षण में भाग लेने वाले युवक- युवतियों से फीस के तौर पर एक रुपये भी नहीं लिए जाते हैं। जो युवा इस मैदान से सफल होते हैं वह प्रशिक्षण में भाग लेने वाले युवाओं के बेहतर व्यवस्था के लिए व्यायाम की सामग्री दान करते हैं। दादा फिजिकल ग्रुप दिन प्रतिदिन बड़ा होता जा रहा है। आज इस ग्रुप से जुड़कर एक सौ से अधिक युवक- युवतियां अपनी भविष्य को तलाशते हुए मैदान में पसीने बहा रहे हैं। जबकि बीते एक वर्ष के दौरान पवन कुमार के नेतृत्व में 17 युवक- युवतियों ने बिहार पुलिस की परीक्षा पास कर सफलता के झंडे गाड़े हैं।

वहीं सात सब इंस्पेक्टर, एक असिस्टेंट कमांडेंट, एक कोस्ट गार्ड और वर्तमान में 12 युवक-युवतियों ने बिहार पुलिस ड्राइवर का फिजिकल पास कर लिया है। जबकि तीन युवा देश की सीमा की रक्षा के लिए आर्मी में हैं। पवन कुमार बताते हैं कि आज युवाओं का एक बड़ा वर्ग अपने मार्ग से भटक चुका है। अपने आप को नशा के लत में डुबाता जा रहा है। ऐसे कई युवा हैं जो अपने मार्ग से भटक चुके थे। उन्हें उनके घर पर जाकर प्रेरित कर सही मार्ग पर लाने का काम किया गया।

कई ऐसे युवक-युवतियां हैं, जो आर्थिक तंगी के कारण प्रतिभा होने के बावजूद सफल नहीं हो पा रहे थे। ऐसे युवाओं को इस ग्रुप के माध्यम से हर तरह से मजबूत किया गया। जिसका परिणाम भी सामने आया। आज समाज में उन्हें सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है। युवा अगर ठान ले तो सफलता मिलना कोई बड़ी बात नहीं है। बस दृढ़ इच्छा शक्ति होनी चाहिए।

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