मुंगेर के राजस्व से दूसरे जिले हो रहे मालामाल, इस साल हुआ 45 लाख का नुकसान, पढ़ें पूरा मामला

मुंगेर से तकरीबन 45 लाख का राजस्व अन्य जिलों के पास चला गया। ये लोगों की मजबूरी रही कि उन्हें अन्य जिलों का रुख करना पड़ा। इधर जिम्मेदारों ने इसपर ध्यान देने के बावजूद लगता है दूरी भड़ा ली हो।

Shivam BajpaiPublish:Tue, 07 Dec 2021 08:57 AM (IST) Updated:Tue, 07 Dec 2021 08:57 AM (IST)
मुंगेर के राजस्व से दूसरे जिले हो रहे मालामाल, इस साल हुआ 45 लाख का नुकसान, पढ़ें पूरा मामला
मुंगेर के राजस्व से दूसरे जिले हो रहे मालामाल, इस साल हुआ 45 लाख का नुकसान, पढ़ें पूरा मामला

संवाद सूत्र, मुंगेर : मुंगेर जिले का राजस्व लखीसराय, भागलपुर, जमुई, कटिहार, खगड़िया, बेगूसराय सहित कई जिलों में जा रहा है। आंख से सामने से राजस्व जाता देख भी संबंधित पदाधिकारी कुछ नहीं कर पा रहे हैं। दरसअल, पहले खेत और रैयती जमीन का नक्शा पटना में बनता था। नक्शा बनाने के लिए लोग पटना जाते थे। सरकार ने लोगों की परेशानी को देखते हुए हर जिले के मुख्यालय प्रखंड में नक्शा उपलब्ध कराने का निर्णय लिया।

मई 2017 में सदर प्रखंड में अलग से नक्शा निकालने के लिए मशीन उपलब्ध कराई गई। जिले का नक्शा जिले में ही मिलने से लोगों को काफी सहूलियत हो रही थी, पर 11 माह से नक्शा मशीन खराब पड़ी हुई है। ऐसे में यहां के लोगों को खेत और रैयती जमीन का नक्शा निकालने के लिए दूसरे जिला जाना पड़ रहा है। एक नक्शा निकालने पर 200 से 250 रुपये खर्च आता है। हर दिन 60 से 70 लोग नक्शा निकालने के लिए पहुंचते थे। एक वर्ष में नक्शा के एवज में जिले को आने वाला राजस्व लगभग 45 लाख रुपये दूसरे जिले को चला गया। सीओ ने बताया कि मशीन खराब होने की सूचना विभाग को दी गई है। अभी तक मशीन को दुरुस्त नहीं किया गया है।

परेशान हैं लोग, नहीं ले रहे सुधजिले के एकमात्र सदर अंचल कार्यालय स्थित आरटीपीएस काउंटर पर रहा प्लाटर मशीन 11 माह से खराब है। इससे आम लोगों को परेशान होना पड़ रहा है। आधुनिक मशीन के जरिए आवेदकों को मिनटों में बड़ा सा पेपर पर जमीन का प्रिंटेड नक्शा मिलता था। मशीन के खराब रहने से हर दिन पांच से 10 लोग इस काउंटर पर आकर निराश हो लौटने को मजबूर है। विभाग को रेवेन्यू का भी नुकसान उठाना पड़ रहा है। मशीन खराब होने से पहले तक इस मशीन से राजस्व विभाग को तीन लाख से ज्यादा आमदनी मिली है। मशीन ठीक कराने में अधिकारियों की दिलचस्पी नहीं दिख रही है।

'प्लाटर मशीन को ठीक कराने के लिए विभाग को पत्राचार किया गया है। जनवरी से मशीन बनने की उम्मीद है। राशि भी आवंटित कराई जा रही है। मशीन के ठीक होते ही आवेदकों को नियमानुसार नक्शा उपलब्ध होगा।' -शशिकांत कुमार, सीओ, मुंगेर।