अब कोसी की बारी, उतरेगा पानी और शुरू होगी प्रलय लीला, जानिए इस बार क्या है बाढ़ को लेकर तैयारी

मानसून के प्रवेश करते ही कोसी में बाढ़ की आशंका बढ़ गई है। पिछले साल की तरह इस साल भी अब तक इससे बचाव के लिए तेजी से काम शुरु नहीं हो सकता है। इससे करीब तीन लाख से ज्‍यादा लोग सबसे अधिक परेशान होते हैं।

Abhishek KumarThu, 10 Jun 2021 04:19 PM (IST)
मानसून के प्रवेश करते ही कोसी में बाढ़ की आशंका बढ़ गई है।

सुपौल [भरत कुमार झा]। बाढ़ की अवधि 15 जून से शुरू होगी। दो दिनों में मानसून का भी प्रवेश होने जा रहा है। अब कोसी की प्रलयलीला शुरू होगी। कोसी तटबंध के अंदर बसे लोगों की तबाही शुरू हो जाएगी। हर साल कोसी बाढ़ की अवधि में तटबंध के अंदर तकरीबन तीन सौ गांवों को तबाह करती रहती है। इस अवधि में तटबंध के बाहर के लोग बाढ़ की आशंका से सहमे रहते हैं। कोसी कटाव के लिहाज से दुनिया की दूसरी सबसे खतरनाक नदी मानी जाती है। यह बार-बार अपनी धारा बदलती रहती है। इसके कटाव के कारण कई गांवों के नाम-ठिकाने तक मिट चुके हैं। तटबंध में बंधने के बाद भी लगभग तीन लाख की आबादी इसके अंदर निवास करती है। बारिश के दिनों में जहां ये लोग जलप्रलय झेलते हैं वहीं पानी कम होने पर इन्हेंं कटाव से दो-चार होना पड़ता है।

जून का महीना आते ही बजने लगती खतरे की घंटी

कोसी के दोनों तटबंधों के अंदर लगभग चार सौ गांव हैं। यहां लगभग 03 लाख की आबादी बसती है। कोसी की धारा हमेशा बदलती रहती है। नतीजा होता है कि इन गांवों का भूगोल भी बदलता रहता है। जून का महीना शुरू होते ही खतरे की घंटी बजने लगती है और अंदर बसी आबादी सुरक्षित ठौर की तलाश में जुट जाती है। साल के छह महीने उन्हेंं निर्वासित ङ्क्षजदगी गुजारनी पड़ती है। तटबंध निर्माण के साथ ही इन्हें पुनर्वासित किए जाने की योजना बनी, लेकिन पूरी आबादी को यह सुविधा नहीं मिल सकी। आर्थिक पुनर्वास का वादा भी खोखला साबित हुआ। अधिकारियों की मानें तो इन्हेंं तटबंध के अंदर रहना ही नहीं है। ये लोग अपनी माटी का मोह नहीं छोड़ पाते हैं। इनकी जीविका का मुख्य साधन खेती-बारी भी तटबंध के अंदर ही है।

बारिश शुरू होते ही नदी की भेंट चढ़ जाते हैं गांव

जिले के पांच प्रखंड क्षेत्र सुपौल, बसंतपुर, सरायगढ़ भपटियाही, किशनपुर, निर्मली और मरौना के गांव कोसी तटबंध के अंदर पड़ते हैं। सरायगढ़ भपटियाही प्रखंड क्षेत्र के लौकहा पलार, कोढ़ली पलार, कवियाही, करहरी, तकिया, बाजदारी, गौरीपट्टी पलार, बलथरवा, बनैनियां, सियानी, ढ़ोली, झखराही, भुलिया, कटैया, औरही, सिहपुर, सनपतहा, किशनपुर प्रखंड के बौराहा का भेलवा टोला आदि बारिश शुरू होते ही नदी की भेंट चढ़ जाते हैं। झखराही, बेंगा, लछमिनिया, झखराही, हांसा, चमेलवा, कमलदाहा, नौआबाखर आदि टोले के लोग भी परेशानी से जूझ रहे हैं। निर्मली का डेंगराही, सिकरहट्टा, मौरा, झहुरा, पिपराही, लगुनियां, दुधैला पलार आदि गांव के लोगों की भी यही परेशानी है।

घटे या बढ़े पानी बनी रहती है परेशानी

कोसी में पानी बढऩे के साथ ही इनकी तबाही शुरू हो जाती है जो घटते-बढ़ते पानी के साथ जारी रहती है। पानी का बढऩा बाढ़ का कारण बनता है तो पानी घटने के साथ ही कटाव बढ़ जाता है। कटाव भी इतना तेज कि देखते ही देखते गांव के गांव कोसी में विलीन हो जाते हैं। खेतों की खड़ी फसलें कोसी की धार में तिनके सी बहती नजर आती हैं। अपने द्वारा बोई फसल का यह हालत देख किसान खून के आंसू रोने को विवश होते हैं।

 

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