अस्पताल की कुव्‍यवस्‍था पर भड़की जाप की राष्ट्रीय महिला अध्यक्ष, कहा यहां मरीजों का नहीं होता है बेहतर इलाज

जाप कार्यकर्ताओं ने अस्‍पताल की कुव्‍यवथा पर काटा बवाल

जाप की राष्‍ट्रीय महिला अध्‍यक्ष जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंची वहां की कुव्‍यवस्‍था को देख वह भड़क गई और अपने मोबाइल से वीडियो बनाने लगी। ऐसा करने से उन्‍हें सुरक्षा गार्ड ने रोका फिर क्‍या था शुरू हुआ बवाल।

Amrendra kumar TiwariWed, 03 Mar 2021 02:06 PM (IST)

जागरण सवांददाता, भागलपुर । जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में लाइजरत मरीजों का हाल जानने पहुंची जाप की राष्‍ट्रीय महिला अध्‍यक्ष रानी चौबे वहां की कुव्‍यवस्‍था और मरीजों के स्‍वजनों की शिकायत सुन अस्‍पताल प्रशासन पर भड़क उठी। फि‍र तो वहां जाप कार्यकर्ताओं ने हंगामा और बवाल शुरू कर दिया। अस्‍पताल की बदहाली पर मोबाइल से वीडियो बनाया जाने लगा ताकि यहां की कुव्‍यवस्‍था को राज्‍य व केंद्र सरकार के सामने रखा जा सके।

सुरक्षा गार्ड ने वीडियो बनाने से नेत्री को रोका बवाल

जाप नेत्री को वीडियो बनाने से वहां के सुरक्षा गार्ड ने रोका। इस पर कार्यकर्ताओं ने जमकर बवाल काटा। मरीजों के स्‍वजन भी प्रदर्शनकारियों के साथ हो गए। उन्‍होंने ने भी जाप नेत्री व कार्यकर्ताओं को अपनी अपनी व्‍यथा सुनाई कहा, डॉक्‍टर की बात तो दूर रही नर्स तक मरीजों को देखने नहीं आते हैं। काउंटर पर जरूरत की दवाएं नहीं मिलती है। कहा जाता है बाहर से दवा लाओ तभी इलाज होगा। बिजली पानी के लिए भी यहां मरीज तड़पते हैं। जाप कार्यकर्ताओं को बवाल करते देख अस्‍पताल के विभिन्‍न विभागों में कार्यरत चिकित्‍सक भी बाहर आए।

कुव्‍यवस्‍था से केंद्र व राज्‍य सरकार को कराया जाएगा अवगत

अस्पताल के अधिकारियों ने राष्‍ट्रीय महिला अध्‍यक्ष रानी चौबे को कार्यालय में बुलाया । चैम्बर में गई, लेकिन वह अस्‍पताल की कुव्‍यवस्‍था और मरीजों के स्‍वजनों की बात सुन काफी गुस्‍से में थी। उन्होंने कहा अस्पताल में अव्यवस्था है, मरीजो का इलाज ठीक से नहीं होता है। वरीय डॉक्टर मरीज को नहीं देखते हैं। यह गैर जिम्‍मेदाराना हरकत नहीं चलेगी। इस मामले को केंद्र व राज्‍य सरकार के मंत्री के समक्ष रखा जाएगा।

सुनिए क्‍याा बोले अस्‍पताल अधीक्षक

अस्पताल अधीक्षक डॉ अशोक भगत ने समझाया मैडम इलाज में कमी नही है। यहाँ गंभीर मरीज भी इलाज करवाने आते हैं। कई विशेषज्ञ नही रहने से मरीज को रेफर करना मजबूरी है।एक घंटा तक समझने पर वो शांत हुई। 

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