मुंगेर विश्वविद्यालय: पीजी वन व एलएलवी में नामांकन की तिथि बढ़ी, जानिए

मुंगेर विश्वविद्यालय पीजी सेमेस्टर वन सत्र 2020- 2022 एवं एलएलबी सेमेस्टर वन सत्र 2020- 2023 में जारी नामांकन की तिथि को बढ़ा दिया गया है। जारी प्रथम मेरिट सूची में चयनित छात्र छात्राओं द्वारा ऑनलाइन नामांकन 17 जून कर दिया गया है।

Dilip Kumar ShuklaWed, 16 Jun 2021 09:42 AM (IST)
पीजी सेमेस्टर वन एवं एलएलबी सेमेस्टर वन की नामांकन तिथि बढ़ा दी गई है।

जागरण संवाददाता, मुंगेर। मुंगेर विश्वविद्यालय ने पीजी सेमेस्टर वन सत्र 2020- 2022 एवं एलएलबी सेमेस्टर वन सत्र 2020- 2023 में जारी नामांकन की तिथि को बढ़ा दिया गया है। अब पीजी सेमेस्टर वन और एलएलबी सेमेस्टर वन के लिए जारी प्रथम मेरिट सूची में चयनित छात्र छात्राओं द्वारा ऑनलाइन नामांकन 14 जून से बढ़ाकर 17 जून कर दिया गया है। जिसकी अधिसूचना मुंगेर विश्वविद्यालय प्रशासन ने जारी कर दिया है। इस संदर्भ में मुंगेर विश्वविद्यालय के नामांकन समिति के पदाधिकारी सह डीएसडब्ल्यू डॉ. अनुप कुमार ने बताया कि विश्वविद्यालय द्वारा पीजी सेमेस्टर वन और एलएलबी सेमेस्टर वन के लिए जारी प्रथम मेरिट सूची में चयनित छात्र छात्राओं द्वारा ऑनलाइन नामांकन की तिथि को कुलपति के आदेश पर 14 जून से बढ़ाकर 17 जून कर दिया गया है. प्रथम मेरिट सूची में चयनित वैसे छात्र-छात्राएं जो अबतक किसी कारणवश नामांकन नहीं ले पाए हैं। वैसे छात्र-छात्राएं 17 जून तक नामांकन ले सकते हैं।

अंगिका भाषा में बच्चों को पढ़ाए जाने से बौद्धिक विकास और बेहतर होगा

टीईटी शिक्षक संघ के प्रदेश संयोजक अमित विक्रम के नेतृत्व में टीईटी शिक्षक संघ का प्रतिनिधिमंडल डीईओ से मिला। मांग किया कि नई शिक्षा नीति के आलोक में राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद कार्यालय द्वारा मांगी गई मातृभाषा की सूची में अंगिका को अधिसूचित किया जाए। इस संबंध में उन्होंने बताया कि नई शिक्षा नीति के तहत प्राथमिक उच्च प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों में मात्री भाषा में पढ़ाने का प्रावधान है। मुंगेर प्राचीन अंग जनपद का केंद्र रहा है। जिसकी प्रमुख भाषा अंगिका है। मुंगेर जिले के अंतर्गत सभी वर्ग के लोग अंगिका को मातृभाषा में के तौर पर प्रयोग करते हैं। ऐसे में नई शिक्षा नीति के तहत विद्यालयों में बच्चों को मातृभाषा में पढ़ा जाने का प्रस्ताव स्वागत योग्य है। जिलाध्यक्ष राहुल देव सिंह ने बताया कि कई सारे सर्वे एवं वैज्ञानिक रिसर्च से यह बात सामने आई है कि बच्चे सबसे ज्यादा अपनी मातृभाषा में ही समझते हैं।

 

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