मुंगेर में होती है सबसे ज्यादा परवल की खेती, थोक में खरीददारी के लिए पहुंच रहे दिल्ली और झाखंड के व्पापारी

बिहार के मुंगेर में सबसे ज्यादा परवल की खेती होती है। अभी से बाहर के कारोबारी किसानों से कर रहे संपर्क। बेहतर होती है क्वालिटी। तीन हजार एकड़ में की जा रही इस बार परवल की खेती। दिल्ली और झारखंड से व्पापारी यहां पहुंच रहे हैं...

Shivam BajpaiWed, 24 Nov 2021 01:15 PM (IST)
तीन हजार एकड़ में की जा रही परवल की खेती।

संवाद सूत्र, बरियारपुर (मुंगेर) : जिले के बरियारपुर प्रखंड में पूर्व बिहार में सबसे ज्यादा परवल की खेती होती है। इस बार यहां तीन हजार एकड़ में इसकी खेती की जा रही है। परवल की पैदावार मार्च से शुरू होती है। अभी से ही दिल्ली, झारखंड और पश्चिम बंगाल के व्यापारी बरियारपुर के किसानों से संपर्क करने लगे हैं। किसानों को वे एडवांस भी दे रहे हैं। प्रखंड में लगभग तीन हजार एकड़ खेत में लगभग एक हजार से ज्यादा किसान परवल की खेती करते हैं। मौसम के अनुकूल रहने पर किसानों को काफी लाभ मिलता है। कई जिलों के अलावे झारखंड व दिल्ली के व्यापारी बरियारपुर का परवल खरीदकर ले जाते हैं।

परवल के मौसम में घोरघट, बंगाली टोला, सरस्वतीनगर, बरियारपुर तथा कालीस्थान में आढ़त लगती है। इससे यहां के मजदूरों को काम भी मिलता है। लगभग तीन महीने तक यह रोजगार चलता है, यहां के परवल की ज्यादा मांग होती है। प्रखंड के दियारे में सफेद व धारीदार दो तरह के परवल की पैदावार होती है।

इस बार बेहतर पैदावार की उम्मीद

परवल की खेती करने वाले किसान कमलेश्वरी मंडल, बिंदेश्वरी सिंह, रामबालक सिंह, मुकेश कुमार सिंह, मंटू मंडल व दीपक ने बताया कि समय पर परवल की उपज शुरू हो जाने पर उन लोगों को अच्छी आय होती है। मौसम अनुकूल रहा तो परवल की खेती में लगा पूंजी के डूबने की संभावना कम होती है। शुरुआत में परवल की कीमत ठीक-ठाक मिलती है, बाद में भाव गिरने लगता है। किसानों ने बताया कि दिल्ली, झारखंड और कोलकता के कई व्यापारी जो पहले भी यहां से परवल ले जाते हैं, अभी से संपर्क में है।

बेहतर होता है सब्जी का कारोबार

किसानों ने बताया के मार्च माह के शुरुआत में ही परवल तैयार हो जाता है। बरियारपुर से परवल राज्य के अलावा दिल्ली, यूपी, पश्चिम बंगाल और झारखंड के शहरों में भेजा जाता है। इन जगहों के व्यापारी ट्रेन और ट्रांसपोर्ट, निजी मालवाहक से खरीदारी कर ले जाते हैं। सीजन में प्रतिदिन एक हजार क्विंटल से ज्यादा परवल बिकती है। इस सब्जी से प्रखंड के सैकड़ों किसान सालों भर परवल की उपज से परिवार का भरण पोषण करते हैं।

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