शराब बेचकर घर चलाने वाली मीना अब बन चुकी है शराबबंदी की नायिका, दर्जनों महिलाओं से कटिहार में छुड़वा दिया ये धंधा

बिहार में शराबबंदी की नायिका बन चुकी मीना ने खुद को शुरुआती दौर में स्थानीय लोगों का विरोध भी सहना पड़ा। शराब बेचती थी तो खरीददार उसे गंदी निगाहों से देखते थे। लेकिन अब वो एक अच्छा जीवन यापन कर रही है। चलिए मिलते हैं शराबबंदी की नायिका मीना से...

Shivam BajpaiWed, 01 Dec 2021 08:16 AM (IST)
किराना दुकान चलाती मीना देवी साथ में जेएसवाई की एमआरपी अनुपम कुमारी।

भूपेन्द्र सिंह, बरारी (कटिहार) : बरारी प्रखंड के लक्ष्मीपुर महादलित टोला वार्ड दो के निवासी दारा ऋषि की पत्नी मीना देवी की पहचान शराबबंदी की नायिका के रूप में बन चुकी है। पूर्व में देशी शराब और ताड़ी के धंधे से जुड़ी मीना इस व्यवसाय से तौबा कर गत आठ माह से किराना दुकान चला अपनी गृहस्थी चला रही है। मीना को इस कार्य मे प्रोत्साहन के लिए सतत जीविकोपार्जन योजना एसजेवाई के तहत लाभान्वित किया गया है। मुख्यमंत्री द्वारा शराबबंदी लागू किए जाने तथा इसको लेकर चलाए गए जागरूकता अभियान से मीना प्रेरित हुई। शराब बनाने से लेकर उसे बेचने तक के काम को अब मीना अलविदा कर चुकी है।

यही नहीं, मीना ने इस धंधे से जुड़ृी गांव की अन्य महिलाओं को भी सतत जीविकोपार्जन योजना से जोड़ने का काम किया। मीना के प्रयास से एक दर्जन महिला अब शराब व ताड़ी के कारोबार से जुड़ी थीं। अब सभी नए मार्ग पर प्रशस्त हैं। वहीं, मीना को इसके लिए स्थानीय स्तर पर विरोध का भी सामना करना पड़ा। लेकिन संघर्ष और दृढ इच्छाशक्ति के बूते क्षेत्र में शराब व नशामुक्ति को लेकर मुहिम भी चला रही है। जीविका के बीपीएम अजीत कुमार और एसजेवाई की एमआरपी अनुपम कुमारी के प्रति कृतज्ञता जाहिर करते हुए मीना ने बताया कि वो अपने और अपने परिवार के लिए दो वक्त की रोटी के लिए देसी राब एवं ताड़ी बेचने का काम करती थी।

मीना कहती है, 'शराब पीने आने वाले बुरी नजर भी रखते थे। इस काम से ग्लानि भी महसूस होती थी। लेकिन फिर परिवार के भरण पोषण की चिंता भी रहती थी। इसलिए मजबूरन शराब बेचने वाला काम करते थे। अब सब छोड़ दिया है। जिंदगी आसान सी लगने लगी है। लोगों को जागरूक भी करती हूं।'

 शुरू कर दिया बकरी पालन 

मीना ने बताया कि जीविका के सम्पर्क मे आकर सीता स्वंय सहायता समूह का गठन कर स्वयं व गांव की अन्य महिलाओं को भी समूह से जोड़ने का काम किया। जीविका के माध्यम से मिले 20 हजार की सहायता राशि से किराना दुकान शुरू की। मिले रुपयों से दो बकरी खरीदी और अब बकरी पालन भी शुरू किया।

जीविका की एसजेवाई की एमआरपी ने बताया कि शराब व ताड़ी के धंधे को छोड़ अब मीना किराना दुकान चलाने लगी है। उसके लगन को देखते हुए जीविका द्वारा उजाला महिला ग्राम सगठन से भी जोड़ा गया है। फिलहाल वे भी शराबबंदी और नशा मुक्ति के प्रति जागरूकता कार्यक्रम में सहभागी बन गांव समाज के लिए नजीर बनी हुई है। जीविका के बीपीएम अजीत कुमार ने बताया कि मीना देवी ने अपनी मेहनत से नजीर पेश की है।

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