सुरक्षा व्यवस्था भगवान भरोसे... प्रभार में चल रहे पूर्णिया के कई थाने, लगातार बढ़ रहा अपराध का ग्राफ

पूर्णिया में अपराध का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रही है। इसके बाद भी थानों की व्यवस्था का हाल यह है की कई थानों में स्थायी थाना अध्यक्ष तक तैनात नहीं है और थानों की व्यवस्था प्रभारी थाना अध्यक्ष के भरोसे संचालित हो रही है।

Abhishek KumarSun, 01 Aug 2021 12:06 PM (IST)
पूर्णिया में अपराध का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रही है।

पूर्णिया [राजीव कुमार]। पूर्णिया जिले के थानों की वर्तमान में सुरक्षा व्यवस्था भगवान भरोसे हैं। थानों की व्यवस्था का हाल यह है की कई थानों में स्थायी थाना अध्यक्ष तक तैनात नहीं है और थानों की व्यवस्था प्रभारी थाना अध्यक्ष के भरोसे संचालित हो रही है। यह हाल केवल शहरी थाना का नहीं है बल्कि की ऐसे महत्वपूर्ण थाने हैं जहां कई माह से स्थायी थाना अध्यक्ष की तैनाती नहीं की गयी है। शहरी थानों का आलम यह है की जिस थाने के अधीन एक दर्जन से अधिक बैंक की मुख्य शाखाओं के अलावा एक दर्जन से अधिक स्वर्ण व्यवसायी की दुकानें एवं कई महत्वपूर्ण कार्यालय है इसके बाद भी सहायक खंजाची थाना प्रभारी थाना अध्यक्ष के भरोसे चल रहा है।

- शहरी क्षेत्र सहित कई थानों का प्रभार प्रभारी थाना अध्यक्ष के पास

- मधुबनी में दिनदहाड़े अपराधियों ने जिस तरह हत्या की घटना को दिया अंजाम पुलिस की सुरक्षा के दावे की खुली पोल

- सहायक खजांची, मुफ्फसिल. मधुबनी , केनगर, कसबा, सरसी सहित कई थानों की व्यवस्था चल रही प्रभारी दारोगा के भरोसे

बताया जाता है की यहां प्रभारी थाना प्रभारी कई महीने से काम कर रहे हैं। स्थायी थाना अध्यक्ष नहीं रहने के कारण थाना की व्यवस्था काफी प्रभावित होती है। यह हाल केवल सहायक खजांची थाना क्षेत्र का ही नहीं है। शहर का एक महत्वपूर्ण ओपी मधुबनी टीओपी भी प्रभारी थाना प्रभारी के भरोसे चल रहा है। जिला स्थानांतरण होने पर यहां के के थाना अध्यक्ष को तो विरमित कर दिया गया लेकिन यहां दो सप्ताह से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी स्थायी थाना अध्यक्ष की पदस्थापना नहीं की गयी है। यही वजह है की जब गुरूवार को मधुबनी टीओपी में अपराधियों ने जेलर हत्याकांड के आरोपी गुड्डू मियां की गोली मारकर हत्या कर दी तो पुलिस घटना स्थल पर एक घंटे विलंब से पहुंची।

स्थायी थाना अध्यक्ष नहीं रहने के कारण अपराधियों का मनोबल इस कदर बढ़ा हुआ है की अपराधी हत्या की घटना को अंजाम देने के बाद घटनास्थल पर तब तक डटे रहे जब तय उन्हें इस बात का यकीन नहीं हो गया की गुड्डू ङ्क्षमया की मौत हो चुकी है। अपराधियों का यह बैखोफ होना इस बात को दर्शाता है की अब अपराधियों के मन में पुलिस का कोई खौफ नहीं रहा। स्थायी थाना अध्यक्ष के अभाव में पुलिङ्क्षसग काफी प्रभावित हुई है। ना तो थाने द्वारा समय पर गश्ती की जाती है ना वाहन जांच अभियान चलाया जाता है और ना ही फरार अपराधियों के खिलाफ छापामारी अभियान चलाया जाता है।

कसबा एवं केनगर जैसे महत्वपूर्ण थाने में प्रभार के भरोसे

पूर्णिया जिले की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस के आला अधिकारी कितने गंभीर हैं इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है की कसबा एवं केनगर जैसे महत्वपूर्ण थानों के थाना प्रभार का कार्य भी प्रभारी पुलिस पदाधिकारी द्वारा किया जा रहा है। कसबा में प्रभारी थाना अध्यक्ष के रूप में अमित कुमार कार्य कर रहे हैं। ये वही अमित कुमार हैं जो कुछ माह पूर्व सहायक खजांची के थाना अध्यक्ष बनाए गए थे। लेकिन बाद में उनको बायसी का प्रभारी थाना अध्यक्ष बनाया गया। बायसी थाना पुलिस निरीक्षक स्तर के पुलिस पदाधिकारी का यहां पद है लेकिन अवर निरीक्षक के स्तर के पुलिस पदाधिकारी को यहां प्रभारी थाना अध्यक्ष बनाया गया। बाद में महादलित टोले में हुए हमले में अमित कुमार को लापरवाही के आरोप में निलंबित कर दिया गया। मगर अभी वे वर्तमान में कसबा थाना के प्रभारी थाना प्रभारी का पद संभाल रहे हैं। केनगर थाना भी काफी संवेदनशील थाना है लेकिन यह भी प्रभार के ही भरोसे चल रहा है। कटिहार सीमा से सटा मफ्फसिल थाना भी प्रभारी थाना के भरोसे चल रहा है।

जिले से स्थानांतरण प्रभार का बताया जा रहा कारण

आइजी द्वारा जिले से पुलिस पदाधिकारियों का स्थानातंरण थाना का प्रभारी पदाधिकारी के भरोसे संचालन सबसे बड़ी वजह बताई जा रही है। मगर स्थानांतरण पूर्णिया प्रमंडल के सभी जिलों में हुआ है लेकिन पूर्णिया को छोड़कर कटिहार किशनगंज एवं अररिया जिले में इतनी बड़ी संख्या में थाने प्रभारी थाना अध्यक्ष के भरोसे नहीं चलाया जा रहा। पूर्णिया में तो कई ऐसे भी थाने हैं जो स्थानांतरण के पूर्व भई प्रभारी थाना अध्यक्ष के भरोसे लंबे समय से चलाया जा रहा है। स्थानांतरण के बाद भी पूर्णिया से तत्काल थाना अध्यक्षों को विरमित कर दिया गया जबकि जिन जिलों से पुलिस पदाधिकारी आने थे वहां से उन्हें विरमित ही नहीं किया गया। यही वजह है की पूर्णिया की विधि व्यवस्था चरमरा कर रह गयी है।

 

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