पूर्वी बिहार में अवैध तरीके से रह रहे हैं कई बांग्लादेशी संदिग्ध, सुरक्षा एजेंसियां कर रहीं तलाश

पूर्वी बिहार में अवैध तरीके से रह रहे हैं कई बांग्लादेशी संदिग्ध सुरक्षा एजेंसियां कर रहीं तलाश। फर्जी तरीके से आधार समेत अन्य दस्तावेज करवाए तैयार। सुरक्षा एजेंसियां कर रहीं तलाश पुलिस भी सतर्क। एक चिल्ला पार्टी के जरिये पहचान पत्र बनवाने में इनकी मदद की जाती है।

Dilip Kumar ShuklaThu, 21 Oct 2021 11:03 AM (IST)
भागलपुर में बांग्लादेशी नागरिकों की सक्रियता है।

भागलपुर [कौशल किशोर मिश्र]। बांग्लादेश में अल्पसंख्यक दुओं के साथ हिंसा की घटनाओं में बढ़ोतरी और दिल्ली में पाकिस्तानी आतंकी अशरफ अली की गिरफ्तारी के बाद सतर्क हुईं सुरक्षा एजेंसियों को भूमिगत बांग्लादेशी नागरिकों से जुड़े इनपुट ने चौंका दिया है। ताजातरीन जानकारी के अनुसार किशनगंज, कटिहार, भागलपुर, बांका, मुंगेर और झारखंड के गोड्डा जिले में कई बांग्लादेशी घुसपैठिए मौजूद हैं। इन्होंने फर्जी तरीके से आधार समेत अन्य दस्तावेज भी बनवा रखे हैं।

बताया जाता है कि जिन इलाकों में इनकी मौजूदगी है, वहीं से ये कदम-दर-कदम पहचान-पत्र बनवाने की प्रक्रिया शुरू करते हैं। कोरोना काल में संदेह के घेरे में आई एक चिल्ला पार्टी के जरिये पहचान पत्र बनवाने में इनकी मदद की जाती है। भागलपुर में बांग्लादेशी नागरिकों की आवाजाही 2005 में भी उजागर हो चुकी है। एक बांग्लादेशी नागरिक का पासपोर्ट स्थानीय एलएन रोड, नाथनगर के पते पर फर्जी तरीके से तैयार कराया जा चुका है। नए इनपुट के बाद सुरक्षा एजेंसियां और सतर्क हो गई हैं। इन बांग्लादेशी नागरिकों को भारतीय पहचान देकर देश के चुनिंदा महानगरों में भी चिल्ला पार्टी द्वारा भेजे जाने की बात बताई जा रही है। दिल्ली में पकड़े गए पाकिस्तानी आतंकी अशरफ अली की गिरफ्तारी बाद से सुरक्षा एजेंसी से जुड़े अधिकारियों की जांच में चौंकाने वाली जानकारियां सामने आ रही हैं। भूमिगत बांग्लादेशी नागरिकों को भारतीय पहचान देकर बांग्लादेश में सक्रिय आतंकी संगठन जमात-उल-मुजाहिदीन खास मकसद से दिल्ली, मुंबई जैसे महानगरों की तरफ कूच कराने की तैयारी में है। सुरक्षा एजेंसियां अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों और उनके मददगारों को खोज रही हैं। भागलपुर रेंज के पुलिस उप महानिरीक्षक सुजीत कुमार ने भागलपुर, बांका और नवगछिया एसपी को भूमिगत बांग्लादेशी नागरिकों की तलाश को लेकर सभी एहतियाती कदम उठाने को कहा है।

बिलाल ने उगले थे कई राज : बांग्लादेश सीमा से घुसपैठ के जरिये पूर्वी बिहार के चुनिंदा जिलों में बांग्लादेशी नागरिकों को प्रवेश कराने और उनके आतंकी संगठन जमात-उल-मुजाहिदीन से रिश्ते की बात का पता सुरक्षा एजेंसियों को तब चला, जब कोलकाता के हरिदेवपुर में 11 जुलाई 2021 को रबी-उल-इस्लाम की गिरफ्तारी की गई थी। वह अपने दो अन्य आतंकी साथियों नजी-उर रहमान उर्फ बापरी जयराम पावेल उर्फ जोसफ और मिकाइल खान उर्फ शेख साबिर के साथ गिरफ्तार हुआ था। तीनों आतंकियों से कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिली थीं। फर्जी पहचान पत्र के बारे में भी पता चला था। इसके पूर्व, 22 दिसंबर 2019 में धनबाद रेलवे स्टेशन पर गिरफ्तार बांग्लादेशी नागरिक मुहम्मद बिलाल के पास फर्जी आधार कार्ड समेत अन्य दस्तावेज बरामद किए गए थे। पूछताछ में उसने खुफिया एजेंसियों को बताया था कि झारखंड के गोड्डा जिले की फंसिया डंगाल बस्ती में उसके चार बांग्लादेशी साथियों के आधार कार्ड और पहचान पत्र स्थानीय पते पर बनाए गए थे।

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