बारिश ने तोड़ा किसानों का सपना; आम की मिठास गायब, मक्के का रंग हुआ बदरंग, लीची हुआ खराब

बारिश से फसलों को व्यापक नुकसान किसान मायूस। आम का काफी नुकसान हुआ है। मक्‍का को भी क्षति पहुंचा। मिर्च मूंग और सब्जी की फसल भी हुई बर्बाद लीची में पड़ गए कीड़े। धान का बिचड़ा खेतों में नहीं गिरा पा रहे किसान।

Dilip Kumar ShuklaMon, 21 Jun 2021 09:21 AM (IST)
बारिश के कारण फसलों को काफी नुकसान हुआ है।

जागरण संवाददाता, भागलपुर। जून में हो रही भारी बारिश से फसलों को व्यापक पैमाने पर नुकसान पहुंचा है। आम की मिठास गायब हो गई। मक्के का रंग बदरंग हो गया। मक्का खेत से किसानों के घर तक नहीं पहुंच पा रहा। आम पकने के साथ ही सडऩे लगा। धान का बिचड़ा खेतों में नहीं गिर पा रहा है। जिन किसानों ने बिचड़ा तैयार कर लिया है, उनके लिए बारिश फायदेमंद रहा। मिर्च, मूंग और सब्जी की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। बची हुई लीची में कीड़े लग गए हैं। इससे किसान मायूस हैं। पीरपैंती के किसान वरूण यादव, बभनबामा के निरंजन चौधरी, बंटी चौधरी व तेलघी के सुमित कुमार सिंह ने कहा कि बारिश ने किसानों की कमर तोड़ दी।

 

अभी और बारिश होने की संभावना

जून में अमूमन 170 एमएम के करीब बारिश होती है। लेकिन इस साल मानसून आने के साथ शनिवार तक 250 एमएम तक बारिश हो गई है। इस महीने अभी और बारिश होने की संभावना है। भारी बारिश होने की वजह से सबसे अधिक नुकसान सब्जी और मूंग को पहुंचा है। जिले में मूंग की 1240 एकड़ में फसल लगी है। कहलगांव, शाहकुंड, जगदीशपुर आदि इलाके में सबसे अधिक फसल लगी है। भारी बारिश की वजह से निचले इलाके में लगी फसल गल गई। किसान दो से तीन बार ही मूंग तोड़ पाए।

खेतों में नहीं गिर पा रहा धान का बिचड़ा

ज्यादा बारिश होने की वजह से खेतों में पानी जम गया है, जिससे किसान बिचड़ा नहीं गिरा पा रहे हैं। अधिक अवधि वाले बीज कुछ किसानों ने खेतों में गिराए हैं। वो धान की रोपाई कर रहे हैं। लेकिन मध्यम व छोटी अवधि के धान का बिचड़ा अभी खेतों में नहीं गिर पाया है। हालांकि कुछ किसान पानी के बीच ही धान के खेत की जोताई कर बिचड़ा गिरा रहे हैं। इस साल 52 हजार हेक्टेयर में धान रोपाई का लक्ष्य है। कृषि विभाग के स्तर से बीज वितरण का कार्य शुरू हो गया है।

खेतों से घरों तक नहीं पहुंचा मक्का

मूसलाधार बारिश के चलते मक्का किसानों के घरों तक नहीं पहुंच पाया। जिले में 44 हजार हेक्टेयर में मक्के की फसल लगी थी। धान व सरसों के खेत में लगी मक्के की फसल लेट से लगी, इसलिए यह लेट से तैयार हुआ। सबसे अधिक मक्के की खेती कोसी-गंगा दियारा में होती है। दियारा इलाके में सड़क की सुविधा नहीं रहने से गाडिय़ां वहां तक नहीं पहुंच पा रही है। इस कारण व्यापारी नहीं पहुंच पा रहे। मक्का व्यापारी बिहपुर, नवगछिया, तेतरी आदि जगहों पर गोदाम बना रखे हैं। लेकिन वहां तक मक्का नहीं पहुंच पा रहा है।

गल गया मिर्ची का पौधा

बारिश की वजह से मिर्ची का पौधा गल गया। इस साल लगभग दो हजार एकड़ में मिर्च की फसल लगी है। खेत में जलजमाव की वजह से मिर्च का पौधा गल गया। ऊंचे खेत में अत्यधिक नमी रहने की वजह से पौधों में ग्रोथ नहीं हो पा रहा है। इस साल मिर्च की अच्छी उपज की उम्मीद थी। लेकिन भारी बारिश की वजह से मिर्च को भारी नुकसान पहुंचा है।

आम टूटने के दो दिन बाद से ही सडऩे लगा है

अधिक बारिश की वजह से आम बागान में पानी जम गया है। इस कारण आम टूटने के दो दिन बाद से ही सडऩे लगा है। लीची का समय बीत गया है। लेकिन जो लीची पेड़ में लगी है, उसमें कीड़ा पडऩे लगा है। मिठास में भी कमी आई है। इस साल जिले में लीची की पैदावार कम हुई थी। लॉकडाउन की वजह से बाहर से कम व्यापारी आए। इससे किसानों को काफी नुकसान पहुंचा है।

धान के बीज के वितरण शुरू हो गया है। जल्द ही आवेदन करने वाले किसानों तक बीज पहुंचा दिया जाएगा। बारिश की वजह से बिचड़ा गिराने में किसानों को परेशानी हो रही है। - कृष्ण कांत झा, जिला कृषि पदाधिकारी

जून में काफी अधिक बारिश होने की वजह से सभी फसलों को नुकसान पहुंचा है। खासकर नीचे के खेतों में लगी फसल को बहुत नुकसान हुआ है। - वीरेंद्र कुमार, किसान सलाहकार, मौसम वैधशाला सबौर

आम व लीची सहित मक्का, सब्जी को बारिश से नुकसान पहुंचा है। आम की मिठास गायब है। लीची में कीड़े पड़ गए है। जलजमाव की वजह से पौधे जल रहे हैं। - डॉ. फिजा अहमद, बिहार कृषि, निदेशक उद्यान (फल) सबौर कृषि विवि

 

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