Madhepura: कोरोना की मार... मास्टर साहब बन गए किसान, कोई चला रहा पॉल्ट्री फॉर्म तो कोई दूध का कर रहा कारोबार

कोरोना के कारण कोचिंग चलाने वाले शिक्षक बेरोजगार हो गए हैं। वे अब खेती किसानी से लेकर डेयरी पॉल्‍ट्री फाॅर्म आदि का संचालन करने लगे हैं। साथ ही कुछ शिक्षक शहर छोड़ घर जाकर तरह की सब्जियों की खेती करने लगे हैं।

Abhishek KumarFri, 18 Jun 2021 04:51 PM (IST)
स्‍कूल बंद होने के कारण मधेपुरा में बालू आदि बेचते शिक्षक। जागण।

मधेपुरा [प्रदीप आर्या]। कोरोना की मार से परेशान कई लोगों के जीवन में बदलाव आ गया है। रोटी-रोटी के लिए कार्य भी बदल रहे हैं। साल भर से बंद स्कूल व कोङ्क्षचग सेंटर के कारण कई विद्यालय संचालकों की आर्थिक स्थिति चरमरा गई है। ऐसे में कई निजी विद्यालयों के संचालकों ने तो दूसरा व्यवसाय शुरू कर दिया है। ताकि किसी प्रकार जीवन चल सके। कोई गौ पालन (डेयरी फॉर्म) का कारोबार शुरू किया है तो कोई विद्यालय परिसर में ही भवन निर्माण सामग्री बेचना शुरू कर दिया है। यहीं नहीं कुछ ने तो खेती-बारी शुरू कर दी है। इसके अलावा फर्नीचर, किराना दुकान, पॉल्ट्री फार्म आदि व्यवसाय कर शुरू कर दिया है। विद्यालय संचालकों का कहना है कि अगर निजी विद्यालयों की स्थिति ऐसी ही रही तो स्थिति और बिगड़ेगी।

सरकारी स्तर से निजी विद्यालय, कोङ्क्षचग संस्थान व होम ट््यूशन से जुड़े शिक्षकों के लिए साकारात्मक पहल करने की जरूरत है। शिक्षकों को स्वाबलंबी व आर्थिक ²ष्टिकोण से मजबूत नहीं बनाया गया तो बड़ी संख्या में शिक्षा का अलख जगाने वाले निजी विद्यालय सदा के लिए बंद हो जाएंगे। मालूम हो कि कोरोना महामारी को लेकर कोङ्क्षचग संस्थान व निजी विद्यालयों को बंद दिया गया है। विद्यालय बंद होने से कार्यरत शिक्षक सहित संचालकों की आमदनी बंद हो गई है। ऐसे में स्वजनों के भरण-पोषण की समस्या हो गई है। लिहाजा निजी विद्यालय के संचालक अपनी बिगड़ी आर्थिक स्थिति को पटरी पर लाने के उद्देश्य से अलग व्यवसाय चुनने पर मजबूर हो गए हैं।

्रकेस स्टडी 1

पुरैनी पब्लिक स्कूल के संचालक आर्यण रस्तोगी व गुरूधाम विद्या मंदिर कड़ामा के संचालक आशुतोष झा ने गौ पालन (डेयरी फॉर्म) का कारोबार शुरू किया है। विद्यालय संचालक का कहना है कि विद्यालय बंद होने से आर्थिक स्थिति बिगडऩे लगी थी। फिलहाल कब तक विद्यालय बंद रहेगा कहा नहीं जा सकता। ऐसी स्थिति में डेयरी फार्म शुरू किया गया है।

केस स्टडी 2

एसएम पब्लिक स्कूल के संचालक सोनू यादव ने विद्यालय परिसर में ही भवन निर्माण सामग्री का काम शुरू किया है। ताकि दिक्कत न हो। उनका कहना है कि विद्यालय बंद रहने से परेशानी बढ़ गई थी। इस कारण व्यवसाय शुरू किया गया है।

केस स्टडी 3

श्री कृष्ण विद्या मंदिर बघरा के संचालक प्रभाष कुमार यादव की भी आर्थिक स्थिति खराब होने लगी थी। पिछले साल कोरोना के कारण विद्यालय बंद हुआ था किसी प्रकार अपने को संभाला था। लेकिन फिर से इस साल विद्यालय बंद होने से परेशानी बढ़ गई थी। फलाफल पानी का व्यवसाय को को शुरू किया गया।

केस स्टडी 4

आम्रवाटिका कैरियर इंस्टीच्यूट बथनाहा के संचालक अमरदीप कुमार, लिट््ल फेयर पब्लिक स्कूल चटनमा के संचालक व मुख्यालय स्थित कृष्णा चिल्ड्रेन ऐकेडमी के संचालक दीप नारायण यादव के निधन के उपरांत संचालक बने जवाहर झा ने खेती-बारी की राह पकड़ ली है।

बंद होने के कगार पर है कई विद्यालय

कोरोना आपदा काल में लगातार निजी विद्यालय के बंद रहने से कई विद्यालय पूर्ण रूपेण बंद होने के कगार पर है। विद्यालय की आर्थिक स्थिति खराब हो चुके संचालक परेशान हैं। मुख्यालय स्थित संत जोसेफ पब्लिक स्कूल के संचालक अवधेश अस्थाना व गुरूकुल विद्या मंदिर के संचालक श्वेतांबर गोस्वामी विद्यालय बंद करने पर मजबूर हैं। वहीं वैदिक ऐकेडमी कड़ामा के संचालक व मुख्यालय स्थित गुडलक केरियर इंस्टीच्यूट के संचालक भी अब विद्यालय बंद करने पर विचार कर रहे हैं।  

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