किशनगंज थानाध्यक्ष हत्याकांड: इंस्‍पेक्‍टर मनीष ने सुनाया वो खौफनाक मंजर,कहा-हिंसक भीड़ को देख भागना ही था एकमात्र विकल्प

शहीद दारोगा अश्विनी कुमार की फाइल फोटो व घटना स्‍थल पर छानबीन करती पुलिस।

इंस्पेक्टर मनीष कुमार पश्चिम बंगाल के पांतापाड़ा में छापेमारी करने गए शहीद अश्विनी कुमार के साथ थे। कहा- आरोपित की ससुराल पहुंचते ही माइक से एलान होने पर भीड़ जमा हो गई। तब गांव में चोर-डाकुओं के घुसने का दुष्प्रचार कर लोगों को हमले के लिए उकसाया गया।

Sumita JaiswalTue, 13 Apr 2021 09:45 PM (IST)

किशनगंज, जागरण संवाददाता। 10 अप्रैल की अलसुबह का खौफनाक मंजर अब भी इंस्पेक्टर मनीष कुमार के चेहरे पर चस्पा है। बताते हैं, हिंसक भीड़ को देख जान बचाकर भागना ही एकमात्र विकल्प था। पांतापाड़ा स्थित मुख्य आरोपित फिरोज के घर दबिश देते ही गलियों से निकली लाठी-डंडों से लैस भीड़ पुलिस पर टूट पड़ी थी। इस बीच मस्जिद से चोर-डाकू के गांव में घुस जाने को लेकर एलान भी किया गया।

मनीष ने बताया कि चारों ओर से जुटी उग्र भीड़ को देख टाउन थानाध्यक्ष अश्विनी कुमार (अब शहीद) ने सभी साथियों से कहा, भाग चलिए। मनीष ने बताया कि भागने के क्रम में उनकी गाड़ी सबसे आगे थी। उनके पीछे थानाध्यक्ष की गाड़ी थी। उन्हें लगा कि सभी लोग वहां से निकल चुके हैं। इस बीच दो बार अश्विनी कुमार को कॉल किया गया, लेकिन फोन रिसीव नहीं हुआ। इसके बाद उन्होंने किशनगंज के एसपी और एसडीपीओ को घटना की जानकारी दी।

तब तक देर हो चुकी थी

इंस्पेक्टर मनीष ने बताया कि अश्विनी कुमार के चालक ने जब फोन कर उनसे पूछा कि बड़ा बाबू आपके साथ हैं, तो वे चौंक गए। तब तक उनकी गाड़ी एनएच 31 के समीप पहुंच चुकी थी। वहां पहले से ही बंगाल पुलिस मौजूद थी। मनीष ने बताया कि वे फिर बंगाल पुलिस के साथ घटनास्थल पर पहुंचे, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। घटनास्थल पर बेसुध पड़े अश्विनी कुमार को इस्लामपुर अस्पताल ले जाया गया। चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

थानाध्‍यक्ष ने फोन कर बुलाया

कुमार बताते हैं कि बीते शुक्रवार की रात को 12.30 बजे टाउन थानाध्यक्ष अश्विनी कुमार ने उन्हें फोन कर बुलाया था। वे अपने चालक और एक जवान के साथ छगलिया में अश्विनी कुमार के पास पहुंचे थे। सड़क पर ही उन्होंने कहा कि बाइक लूट की एक घटना हुई है, जिसमें छगलिया के मो. जाकिर समेत तीन अपराधी शामिल हैं। जाकिर के घर में पता चला है कि वह  बंगाल के पांतापाड़ा स्थित अपनी ससुराल में है। इसके बाद सभी लोग दो गाड़ी लेकर पांतापाड़ा चल पड़े। साथ में मो मुश्फिक भी था, जिसकी बाइक लूटी गई थी।

पांजीपाड़ा पुलिस ने नहीं की मदद

मनीष ने बताया कि सबसे पहले पांजीपाड़ा ओपी प्रभारी को फोन कर जानकारी दी गई। उन्होंने बाहर होने की बात कह साथ जाने से इन्कार कर दिया था। इसके बाद पांजीपाड़ा ओपी के ओडी इंचार्ज ने भी साथ जाने से इन्कार कर दिया। तब अश्विनी ने कहा-यहां तक आ ही गए हैं तो रेड कर ही लेते हैं। उन्होंने बताया कि गांव पहुंचते ही माइक से एलान कर भीड़ जुटा ली गई। इसके बाद थानाध्यक्ष की पीटकर हत्या कर दी गई।

हालांकि किशनगंज के एसपी कुमार आशीष ने कहा कि टीम में शामिल किसी पुलिस पदाधिकारी या जवान को भागना नहीं चाहिए था। यह कायरता है। सभी को अपने साथियों के साथ समर्पित होकर हालात का सामना करना चाहिए था।

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