कटिहार का गोगाबिल झील विदेशी सैलानी पक्षियों का बना बसेरा, ग्रे के बाद रेड हेरेन साइबेरियन बर्ड

कटिहार का गोगाबिल झील विदेशी सैलानी पक्षियों के लिए बेहतरीन है। झील पर प्रवासी पक्षी दशको पूर्व से पहुंचते रहे हैं। शिकारमाही पर प्रतिबंध लगाए जाने के कारण नवंबर अंतिम सप्ताह से साइबेरियन पक्षियों का कलरव सुनने को मिल रहा है।

Dilip Kumar ShuklaWed, 01 Dec 2021 05:39 PM (IST)
गोगाबिल झील में विदेशी पक्षियों का कलरव, तीन माह तक होगा प्रवास।

कटिहार [नीरज कुमार]। पक्षी अभ्यारण्य के रूप में अधिसूचित जिले के मनिहारी एवं अमदाबाद प्रखंड की सीमा पर स्थित गोगाबिल झील विदेशी सैलानी पक्षियों को रिझाने लगा है। झील पर प्रवासी पक्षी दशको पूर्व से पहुंचते रहे हैं। लेकिन इस बार झील में मछली मारने की शिकारमाही पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाए जाने के कारण नवंबर अंतिम सप्ताह से साइबेरियन पक्षियों का कलरव सुनने को मिल रहा है। शिकारमाही नहीं होने से सैलानी पक्षियों में सुरक्षा का भाव आने को पर्यावरणविद इसका मुख्य कारण बता रहे हैं।

लालसर, अधींगा सहित ग्रे हेरेन प्रजाति का साइबेरियन बर्ड का पहुंचना तक पिछले वर्षों में देखा गया। लेकिन इसबार रेड हेरेन साइबेरियन बर्ड का झील के समीप दिखाई देना भी शुभ् संकेत माना जा रहा है। पर्यावरणविदों ने उम्मीद जताई है कि इस साल जाड़े में 600 से अधिक संख्या में विदेशी पक्षी तीन माह के प्रवास के लिए यहां पहुंचेगी। बताते चलें कि दो वर्ष पूर्व गोगाबिल झाील को पक्षी अभ्यारण्य के रूप में अधिसूचित किया गया है। वन एवं पर्यावरण विभाग को झाील के सौंदर्यीकरण की जवाबदेही दी गई है। झाल के विकास का पूरा खाका भी तैयार कर लिया गया है। कोरोना संक्रमण, पंचायत चुनाव को लेकर अब तक इस दिशा में कोई पहल शुरू नहीं की जा सकी है। जल्द ही झील को पक्षी अभ्यारण्य के रूप में विकसित किए जाने पर काम शुरू होने की बात कही जा रही है।

पिछले वर्ष 250 से 300 की संख्या में ही पहंचा था प्रवासी पक्षी

पर्यावरण विशेषों के एक अनुमान के मुताबिक पिछले वर्ष 250 से 300 की संख्या में ही विदेशी पक्षी गोगाबिल झील तक पहुंचा था। झाील में मछली मारने के लिए उपयोग किए जाने वाले रसायन के कारण प्रवासी पक्षियों का इस झील से मोहभंग तेजी से हो रहा था। पिछले एक दशक में हर वर्ष आने वाली सैलानी पक्षियों की संख्या घट रही थी।

218 एकड़ में फैला है गोगाबिल झील

मनिहारी व अमदाबाद की सीमा पर स्थित गोगाबिल झील 218 एकड़ में फैला हुआ है। गंगा व महानंदा नदी के छाडऩ से बनी झील गोखुर आकृति की है। प्राकृ़तिक खूबसूरती के कारण झील विदेशी पक्षियों को अपनी ओर आकर्षित करता है।

गोगााबिल झील पर प्रवासी विदेशी पक्षियों के आने का सिलसिला शुरू हो गया है। नवंबर के अंतिम सप्ताह में पक्षियों की कई प्रजातियों का झुंड पहुंचना शुरू हो गया है। साइबेरियन बर्ड ग्रे हेरेन को ही अब तक देखा जाता था। लेकिन इस बार लाल शुतुरमुर्ग रेड हेरेन को भी देखा गया है। यह पक्षियों के संरक्षण को लेकर शुभ् संकेत है। जाड़े में इस बार 500 से अधिक की संख्या में विदेशी सैलानी पक्षियों के पहुंचने की संभावना है। - डा. टीएन तारक, पर्यावरणविद

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