भागलपुर के अस्‍पतालों में ओपीडी में इलाज कराना अब हुआ आसान, रहेंगे सभी विभाग के चिकित्‍सक

भागलपुर में अब जेएलएनएमसीएच और सदर अस्‍पतालों के ओपीडी में अलग-अलग विभाग के डॉक्टर रहेंगे। पहले एक कमरा में ही डॉक्टर रहते थे। जहां सर्जरी फिजिशियन शिशु आदि विभाग के डॉक्टर बैठते थे। सभी का एक ही साथ इलाज किया जाता था।

Dilip Kumar ShuklaMon, 21 Jun 2021 11:40 AM (IST)
भागलपुर के अस्‍पतालों में समुचित व्‍यवस्‍था कर दी गई है।

जागरण सवांददाता, भागलपुर। सदर अस्पताल में अब मायागंज ओपीडी जैसा मरीजों की इलाज की व्‍यवस्था की जा रही है। यानी सोमवार से अब शिशु, हड्डी, गायनी, सर्जरी व फिजिशियन का अलग कमरा रहेगा। जिस बीमारी से मरीज ग्रस्त होंगे, उन्ही डॉक्टर से इलाज करवाएंगे। इससे मरीजो की परेशानी कम होगी साथ ही भीड़ भी नही रहेगी।

पहले ओपीडी में एक कमरा में ही डॉक्टर रहते थे। जहां सर्जरी, फिजिशियन, शिशु आदि विभाग के डॉक्टर बैठते थे ओर एक साथ मरीजों का इलाज किया जाता था। सिविल सर्जन डॉ. उमेश शर्मा ने कहा कि इसके लिए तैयारी कर ली है। सोमवार से नई व्यवस्था के मरीजों का इलाजे किया जाएगा। सर्जन को दस-दस मरीजों का ऑपरेशन करने का टारगेट हर महीने का होगा। ताकि टारगेट रहने से ज्यादातर मरीजों का ऑपरेशन हो सके। इससे दलालों पर भी लगाम लगाया जा सकता है।

आज से ओपीडी में होगा मरीजों का इलाज

मायागंज अस्पताल में करीब दो माह बाद सोमवार से ओपीडी में मरीजों का इलाज शुरू हो जाएगा। इसकी तैयारी पूरी कर ली गई है। ओपीडी में कुर्सियां भी लगाई गई हैं। साथ ही ओपीडी को संक्रमण मुक्त भी किया गया है। दवा के दो काउंटर बनाए गए हैं, ताकि मरीजों को दवा लेने में कोई परेशानी नहीं हो। कोरोना के मरीजों में बढ़ोतरी के कारण 16 अप्रैल को ओपीडी बंद कर दिया गया था। यहां सर्जरी के मरीजों को भर्ती किया जा रहा था। कोरोना मरीज की संख्या में कमी होते ही सरकार ने ओपीडी चालू करने का निर्देश दिया।

अस्पताल में सामान्य दिनों की तरह हो रहा है इलाज

कोरोना काल में स्वास्थ्य केंद्र जगदीशपुर में इलाज कराने वाले मरीजों की संख्या बहुत कम हो गई थी। हालांकि प्रसव के लिए महिलाएं सामान्य दिनों की तरह ही कोरोना काल में स्वास्थ्य केंद्र आती रहीं, जहां तक की महिलाओं की संख्या प्रसव के मामले में अधिक थी। चिकित्सा प्रभारी डॉ. आशुतोष कुमार ने बताया कि कोरोना के संक्रमण का जब पीक चल रहा था, उस वक्त निजी क्लीनिकों में इलाज नहीं के बराबर हो रहा था। इसलिए महिलाओं की संख्या प्रसव में अधिक थी। अब कोरोना के मामले घट गए हैं। लोग इलाज कराने आने लगे हैं। हालांकि मरीजों की संख्या कम है। पहले जहां दो सौ के करीब लोग इलाज कराने आते थे। वहीं अभी करीब 80 लोग इलाज के लिए आ रहे हैं।

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