लक्ष्मीकांत यादव हत्याकांड में गवाही बगैर लौटाए गए आइओ

भागलपुर। राष्ट्रीय जनता दल के जिलाध्यक्ष रहे प्रो. लक्ष्मीकांत यादव हत्याकांड में बुधवार को द्वितीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश जयप्रकाश ने गवाही को पहुंचे अनुसंधानकर्ता को लौटा दिया। अभियोजन पक्ष को जज ने कहा कि हत्या के इस मुकदमे में सूचक की गवाही कराई नहीं गई तो अनुसंधानकर्ता की गवाही कैसे ली जा सकती है। गवाही देने पहुंचे अनुसंधानकर्ता नागेंद्र नारायण ओझा बिना गवाही वापस लौटा दिए गए। ओझा वर्तमान में सिमुलतला सीटीएस कैंप में इंस्पेक्टर पद पर तैनात हैं। लक्ष्मीकांत यादव की हत्या के समय मधुसूदनपुर सहायक थाने के प्रभारी पद पर तैनात थे।

नाथनगर अंचल के नूरपुर गांव निवासी तत्कालीन राजद जिलाध्यक्ष प्रो. लक्ष्मीकांत यादव की हत्या 23 फरवरी 2008 की देर शाम 7.35 बजे गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उन्हें गोपाल भगत के मकान के दरवाजे पर अपराधियों ने निशाना बनाया था। घटना के संबंध में लक्ष्मीकांत यादव के पुत्र समीर कुमार के फर्द बयान पर मधुसूदनपुर सहायक थाना कांड संख्या 41-2008 दर्ज की गई थी। दर्ज प्राथमिकी में कुख्यात सत्तन यादव समेत आधा दर्जन स्थानीय लोगों को हत्या का आरोपित बनाया गया था। बाद में अनुसंधान के क्रम में अन्य लोगों के नाम भी अप्राथमिकी आरोपितों में सामने आए। राजद के तत्कालीन जिलाध्यक्ष लक्ष्मीकांत यादव की हत्या बाद उनके पुत्र समीर कुमार ने पुलिस के समक्ष जो फर्द बयान दिया था उसमें भूमि विवाद को हत्या का कारण बताया था।

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