अस्पताल में कई कमियां, पांच घंटे में भी नहीं ढूंढ सकी टीम

भागलपुर। जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (जेएलएनएमसीएच) में मंगलवार को बिना किसी सूचना के तीन सदस्यीय टीम निरीक्षण करने पहुंच गई। यह निरीक्षण मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआइ) की ओर से होने वाली जांच को लेकर फाइनल मॉक ड्रिल था। इस जांच रिपोर्ट पर ही एमबीबीएस की सौ सीटों के लिए स्थायी मान्यता मिलने की संभावना है। टीम ने करीब पांच घंटे तक अस्पताल का निरीक्षण किया लेकिन अस्पताल में उसे कहीं कमी नहीं दिखी। जबकि अस्पताल के हर विभाग में कुछ न कुछ कमिया हैं।

एमआरआइ मशीन जांच के दौरान बीच में ही बंद हो जा रही है लेकिन टीम इसे नहीं देख सकी। दरअसल, कॉलेज में एमबीबीएस की सौ सीटों पर स्थायी मान्यता को लेकर करीब दो साल से एमसीआइ निरीक्षण कर रही है। मान्यता के लिए हर मापदंड पर अस्पताल को खरा उतरना है। इसके लिए कॉलेज और अस्पताल हर मापदंड को पूरा करने का दावा कर रहा है। अब आने वाले दिनों में सौ सीटों की स्थायी मान्यता के लिए एमसीआइ का फाइनल निरीक्षण होना है। इसे देखते हुए गया मेडिकल कॉलेज के डॉ. पीके वर्मा, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद और राजकीय मेडिकल कॉलेज पाटन गुजरात के डॉ. विपुल ने पाच घटे तक कॉलेज व अस्पताल के विभिन्न विभागों का जायजा लिया।

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कैसे करते हैं मरीजों का इलाज..

निरीक्षण के क्रम में टीम ओपीडी, इमरजेंसी पहुंची। जहां डॉक्टरों से टीम ने बात की। टीम ने पूछा, आप कैसे मरीजों का इलाज करते हैं। कितनी संख्या में मरीज प्रतिदिन आते हैं। संबंधित डॉक्टर से जानकारी लेने के बाद टीम ब्लड बैंक गई। रेडियोलॉजी समेत अन्य विभागों की भी जांच की। निरीक्षण के दौरान अधीक्षक डॉ. आरसी मंडल सहित कई विभाग के विभागाध्यक्ष और चिकित्सक थे।

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भीड़ देखकर रह गई भौंचक

दो दिनों से आउटडोर सेवा बंद होने के कारण मंगलवार को ओपीडी में दिखाने वाले मरीजों की संख्या बहुत ज्यादा थी। टीम निरीक्षण करने के बाद आउटडोर गई। जहां कतारबद्ध मरीजों को देखकर भौंचक रह गई। टीम ने कहा कि यहा मरीजों का बहुत अधिक दबाव है। इसके लिए कुछ वैकल्पिक व्यवस्था होनी चाहिए।

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1900 मरीजों का कटा पर्चा, अफरातफरी

आउटडोर में इलाज कराने के लिए मंगलवार को भीड़ लगी रही। भीड़ इस कदर थी कि मरीजों की कतार शेड से बाहर आ गई। सुरक्षा में लगे गार्ड को इसे नियंत्रण करने में काफी परेशानियां हुई। नया और पुराना मिलाकर करीब 1900 मरीजों का निबंधन हुआ। दरअसल, रविवार को अवकाश और सोमवार को भारत बंद होने के कारण दोनों दिनों का दबाव मंगलवार को था। पर्ची कटाने के लिए काफी शोर-शराबा हुआ।

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